राष्ट्रीय

रजनीकांत ने छोड़ी राजनीति, ‘रजनी मक्कल मन्त्रम’ के कई पदाधिकारी DMK में हुए शामिल

बीजेपी को पहला झटका राज्य की सत्ताधारी AIADMK पहले ही दे चुकी है.

तमिल सुपरस्टार रजनीकांत (Rajinikanth) के संगठन ‘रजनी मक्कल मन्त्रम’ के तीन जिला सचिव रविवार को पार्टी अध्यक्ष एमके स्टालिन की मौजूदगी में (DMK) में शामिल हो गए. रजनीकांत ने इस साल अप्रैल-मई में होने वाले तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में हिस्सा ना लेने की घोषणा कर दी है और राजनीति में कदम रखने के पहले ही राजनीति को अलविदा कह दिया है. उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत नहीं की.

रजनीकांत के राजनीति छोड़ने के फैसले के साथ उनके संगठन से पदाधिकारियों का पलायन भी शुरू हो चुका है. DMK की एक प्रेस रिलीज में कहा गया है कि तूतीकोरिन जिले के सचिव ए जोसेफ स्टालिन, रामनाथपुरम के जिला सचिव के. सेंथिल सेल्वनथ, थेनी के जिला सचिव आर गणेशन DMK में शामिल हो गए हैं.

जिला स्तर के पदाधिकारियों के अलावा तीन और पदाधिकारी पार्टी में शामिल हुए हैं. ये सभी पार्टी अध्यक्ष एम के स्टालिन, उपमहासचिव ए राजा और आयोजन सचिव आर एस भारती के साथ अन्य वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में पार्टी मुख्यालय ‘अन्ना आर्युलायम’ में DMK में शामिल हुए.

अचानक राजनीति में एंट्री न करने की कर दी थी घोषणा

मालूम हो कि सुपरस्टार रजनीकांत के फैंस राजनीति में उनकी एंट्री का इंतजार कर रहे थे, तभी अचानक पिछले साल दिसंबर में उन्होंने ऐलान किया कि वो राजनीति में एंट्री नहीं करेंगे. 29 दिसंबर, 2020 को रजनीकांत ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए राजनीति में नहीं उतरने की घोषणा कर दी थी. जबकि लोग जनवरी 2021 में रजनीकांत की नई राजनीतिक पार्टी के नाम के ऐलान का इंतजार कर रहे थे.

तमिलनाडु में अप्रैल-मई 2021 में विधानसभा चुनाव (Tamil Nadu Assembly elections) होने हैं. राजनीति छोड़ने से पहले रजनीकांत ने एक बयान जारी कर कहा था कि वे तमिलनाडु विधानसभा चुनावों के लिए राजनीति में जल्द एंट्री लेंगे और सभी 234 विधानसभा क्षेत्रों में अपने उम्मीदवार खड़े करेंगे और आध्यात्मिक राजनीति (Spiritual politics) का प्रचार करेंगे. लेकिन इसी के साथ ही उन्होंने यह भी कहा था कि उनकी मुख्यमंत्री बनने की कोई इच्छा नहीं हैं.

BJP को थी रजनीकांत से उम्मीद

BJP आगामी तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में रजनीकांत की पार्टी के साथ गठबंधन की तैयारी में थी. बीजेपी को उम्मीद थी कि रजनीकांत का जादू चुनावों में भी चलेगा, जिससे बीजेपी को खासा फायदा मिलेगा. क्योंकि बीजेपी को पहला झटका राज्य की सत्ताधारी AIADMK पहले ही दे चुकी है.

AIADMK ने दो टूक शब्दों में घोषणा कर दी है कि भले ही वह चुनाव BJP के साथ लड़ेंगे, लेकिन चुनाव जीतने की स्थिति में बीजेपी को सरकार में शामिल नहीं किया जाएगा, सरकार सिर्फ AIADMK की ही होगी और ई के पलानिस्वामी ही फिर से एक बार मुख्यमंत्री बनेंगे. AIADMK के कहने का मतलब साफ है, अगर बीजेपी को साथ चुनाव लड़ना है तो उसे एक सहयोगी पार्टी की ही भूमिका निभानी होगी.

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