छत्तीसगढ़

राजनांदगांव कलेक्टर ने खेती-बाड़ी एवं कृषि के क्षेत्र में किए गए नवाचार का किया अवलोकन

डॉ. खूबचंद बघेल पुरस्कार से सम्मानित किसान श्री एनेश्वर वर्मा एवं उनके परिजनों से भेंट की

राजनांदगांव।राजनांदगांव कलेक्टर टोपेश्वर वर्मा ने आज खेती-बाड़ी एवं कृषि के क्षेत्र में किए गए नवाचार का अवलोकन किया। साथ ही डोंगरगढ़ विकासखंड के ग्राम पारागांव खुर्द जाकर डॉ. खूबचंद बघेल पुरस्कार से सम्मानित किसान श्री एनेश्वर वर्मा एवं उनके परिजनों से भेंट की।

कलेक्टर श्री टोपेश्वर वर्मा ने उनके कार्य देखकर प्रसन्नता जाहिर की और अन्य किसानों को भी ऐसे ही नवीनतम तकनीकों को अपनाने के लिए उन्हें प्रेरित करने के लिए कहा। कलेक्टर ने उनके द्वारा धान की फसल के साथ ही दलहन एवं तिलहन तथा फसल विविधीकरण के लिए किए गए कार्यों की प्रशंसा की।

उन्होंने कहा कि किसानों को रासायनिक खाद के बदले जैविक खाद का उपयोग करने के लिए प्रेरित करें। वहां उपस्थित सरपंच एवं ग्रामवासियों ने बताया बारिश से चने की फसल को नुकसान होने पर बीमा की राशि एवं आरबीसी 6-4 की राशि मिल गई है।

एक ओर उनके खेतों में जहां धान की फसल लहलहा रही है, वहीं मनभावन बाड़ी में विभिन्न किस्म की फल-फूल एवं सब्जियां लगी हैं। किसान श्री एनेश्वर ने बताया कि नलकूप में मोबाईल स्टार्टर का उपयोग किया गया है जिससे फसलों को जितने पानी की जरूरत है उतना ही पानी मिलेगा।

उन्होंने बताया कि यह मोबाईल स्टार्टर उनके मोबाईल से कनेक्ट है जिसकी वजह से वे अपने मोबाईल के माध्यम से दिल्ली, राजस्थान एवं अन्य स्थानों से अपने नलकूप को ऑपरेट करते हैं।

उन्होंने बताया कि अपने सभी खेतों को पाईप लाईन से जोड़ दिया है। इसके साथ ही उन्होंने ड्रीप पद्धति को अपनाकर जल का सही उपयोग करते हुए खेती, साग-सब्जी एवं फल लगाएं हैं। जिससे जल का संरक्षण भी हो रहा है और दुगुनी फसल हो रही है।

उन्होंने अपनी बाड़ी में दशहरी, आम्रपाली, मल्लिका एवं मुंबई के आम लगाए हैं। अमरूद के ग्वावा-11 वैरायटी भी लगाया है। जिमी कांदा की गजेन्द्र वैरायटी मल्चिंग पद्धति से लगाई है। उनकी बाड़ी में आम के 70, अमरूद के 55 एवं नींबू के 60 पेड़ लगे हुए हैं।

उन्होंने कहा कि उद्यानिकी विभाग की मदद से अपनी बाड़ी में बिना बीज वाला नीबू लगाया है और शासन की योजनाओं का लाभ लेते हुए उन्होंने बहुत फसल लगाई है। उन्होंने मल्चिंग पद्धति से लहसुन की खेती की है। इसके साथ ही उनकी बाड़ी में टमाटर, लौकी, प्याज, भाटा, मिर्च, धनिया, फूलगोभी, पत्तागोभी, बरबटी, सेमी, लगाया गया है।

उन्होंने बताया कि राजनांदगांव जिले की मिट्टी काजू के लिए उपयुक्त है। उनकी बाड़ी में काजू, पपीता, हल्दी लगे हुए हैं। वर्मी कम्पोस्ट का निर्माण भी वे कर रहे हैं। सौर प्लांट, गोबर गैस का उपयोग कर रहे हैं एवं नर्सरी प्रबंधन भी उनके द्वारा किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि उनके बाड़ी की सब्जी राजनांदगांव एवं डोंगरगढ़ बाजार में विक्रय के लिए भेज रहे हैं जिससे काफी मुनाफा हो रहा है। किसान एनेश्वर वर्मा ने बताया कि पीवीसी पाईप एवं गैस लाइटर के द्वारा एक मॉडल तैयार किया है। जिससे खेत का नुकसान करने वाले पक्षियों एवं बंदरों को भगाने में मदद मिलती है। मेढ़ों में अरहर, अरबी एवं फलदार फसल एक साथ सीजन में मिल जाता है तथा उन्होंने मेढ़ों पर ही इमारती लकड़ी का पौधरोपण भी किया है।

माली प्रशिक्षण प्राप्त कर उद्यानिकी एवं पौध प्रबंधन में कार्य कर पौधा बनाना, ग्राफ्टिंग तथा ग्राम के बेर के पेड़ को बडिंग कर उन्नत किस्म में परिवर्तन करने का प्रयास सफल रहा। खाली पड़े एक हेक्टेयर जमीन को पानी एकत्र कर खेती करने के लिए स्वयं का बांध उन्होंने तैयार किया है। इस अवसर पर एसडीएम डोंगरगढ़ अविनाश भोई, तहसीलदार अविनाश ठाकुर, सरपंच, सचिव एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

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