‘पद्मावत’ के विरोध में राजपूत महिलाओं ने दी ‘जौहर’ की धमकी

रविवार को प्रोटेस्ट में सिर्फ 200 महिलाएं ही शामिल थीं

‘पद्मावत’ के विरोध में राजपूत महिलाओं ने दी ‘जौहर’ की धमकी

रविवार की सुबह चित्तौड़गढ़ किले में हाथ में तलवार लिए और पगड़ी पहनकर दो कॉलेज स्टूडेंट्स, निक्की चौहान और जयश्री राठौड़ खड़ी थीं। उनके साथ 200 महिलाएं और भी थीं, जिन्होंने धमकी दी कि अगर ‘पद्मावत’ 25 जनवरी को रिलीज हुई तो वे लोग ‘जौहर’ कर लेंगी। उनकी जैसी दूसरी युवा लड़कियां भी हैं, जो यहां फोटो-सेल्फी लेने के बाद उन्हें फेसबुक पर पोस्ट कर रही हैं।

इस प्रोटेस्ट का आयोजन करने वाले और चित्तौड़गढ़ जौहर स्मृति संस्थान में औरतों का प्रतिनिधित्व करने वाले महेंद्र कुंवर ने कहा, ‘आप यहां की राजपूत महिलाओं का गुस्सा और हौसला देख रहे हैं? ये किसी भी हद तक जा सकती हैं।’ महिलाओं को यहां इकट्ठा करने में बीजेपी नेता और जौहर क्षत्राणी मंच की संयोजक संगीता चौहान ने भी सहयोग दिया है।

करणी सेना के पुरुष किले के अंदर बगीचे के एक कोने में बैठे हुए हैं। वे महिलाओं को मीडिया कवरेज दिलवा रहे हैं। पिछले हफ्ते करणी सेना ने कहा था कि 1,800 महिलाओं ने 24 जनवरी को ‘जौहर’ करने के लिए हस्ताक्षर किया है। हालांकि, रविवार को प्रोटेस्ट में सिर्फ 200 महिलाएं ही शामिल थीं।

राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर इच्छामृत्यु की मांग
चौहान ने बताया, ‘जौहर आखिरी कदम है, इसकी भी जरूरत पड़ सकती है। हमारे पुरुषों ने अपनी तरफ से पूरा प्रयास किया, लेकिन वे फिल्म को रिलीज होने से नहीं रोक सके। हम प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को पत्र लिखकर इच्छामृत्यु की मांग रहे हैं।’ विश्व धरोहर स्थल ‘पद्मावत’ की वजह से विरोध का केंद्र बन गया है। किले को प्रदर्शनकारियों की वजह से पिछले एक महीने में दो बार बंद भी करना पड़ा था।

यहां तक की विदेशी पर्यटकों की समझ में भी कुछ नहीं आ रहा है। प्रोटेस्ट करने वाली महिलाओं के साथ सेल्फी लेने के बाद अमेरिकी टूरिस्ट एविना जॉर्डन ने पूछा, ‘क्या ये महिलाएं एक फिल्म की वजह से सचमुच आग में कूदने जा रही हैं?’ इसके बाद वह रानी पद्मिनी के पोस्टर खरीदने किले के अंदर चली गईं, जो खूब बिक रहे हैं।

चित्तौड़गढ़ के डीएसपी गजेन्द्र सिंह भी किले में मौजूद थे। उन्होंने बताया, ‘मुझे नहीं लगता कि कोई यहां आत्महत्या करने जा रहा है। हम उन्हें शांतिपूर्वक प्रोटेस्ट और मार्च करने दे रहे हैं। आत्महत्या करने का प्रयास करना अपराध है।’ एक महिला अधिकारी भी यहां हैं, जो बिल्कुल भी चिंतित नहीं हैं। उन्होंने भीड़ में अपने आईफोन से सेल्फी लेती हुई एक लड़की की तरफ इशारा करते हुए कहा, ‘यह सब मीडिया कवरेज पाने के लिए किया जा रहा है।’

राजपूत महिलाओं ने बताए फिल्म के साथ दो विवाद
यहां जौहर कुंड में एक छोटा सा ‘हवन’ किया गया (जहां रानी पद्मिनी ने प्रतीकात्मक जौहर किया था)। खास तौर पर बुलाए गए राजपूत पुजारी ने भी इस छोटी सी भीड़ को सही ठहराया। उसका कहना है कि राजपूत महिलाओं आमतौर पर खुले में नहीं आती हैं। पुलिस ने करणी सेना को एक जीप और साउंड सिस्टम को किले के अंदर लाने की इजाजत दी है। उसने महिलाओं को जौहर स्मृति संस्थान से 5 किलोमीटर लंबा मार्च निकालने की अनुमति भी दी है। कुछ बुजुर्ग राजपूत महिलाओं ने बताया कि फिल्म के साथ दो विवाद हैं। पहला तो रानी पद्मिनी को ‘काल्पनिक’ दिखाया गया, जबकि वह ऐतिहासिक शख्सियत थीं। दूसरा, उन्हें मनोरंजन के लिए नाचते हुए दिखाया गया है। रक्षा राठौड़ ने कहा, ‘हम अपनी मां पद्मिनी के लिए मरेंगे।’

किले के अंदर दर्पण को भी ढक दिया गया
‘खून से तिलक करो, गोलियों से आरती’ और ‘शस्त्राणियों के सम्मान में, हर नारी मैदान में’ जैसे नारे हवाओं में गूंजते हैं और पुलिस देखती रहती है। पद्मिनी महल में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने अब अपनी पट्टिका को ढक दिया है। एएसआई ने पहले कहा था कि रानी पद्मिनी का प्रतिबिंब अलाउद्दीन खिलजी को एक दर्पण में दिखाया गया था। दो महीने पहले करणी सेना की तोड़-फोड़ के बाद मिरर रूम को भी बंद कर दिया गया था।

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