राज्यसभा: उप-सभापति पद पर एनडीए और यूपीए के बीच कांटे की टक्‍कर

बीजू जनता दल, टीआरएस और वाईएसआरसीपी की होगी निर्णायक भूमिका

नई दिल्‍ली। विपक्षी पार्टियों ने अविश्‍वास प्रस्‍ताव पर लोकसभा में 21 जुलाई को एकता का परिचय दिया था अगर उसी एकता का परिचय विपक्ष ने राज्‍यसभा उप-सभापति के चुनाव में भी दिया तो मोदी सरकार के लिए एनडीए प्रत्‍याशी को जीत दिला पाना असंभव होगा।

ऐसा इसलिए कि राज्‍यसभा में दोनों में से किसी के पास बहुमत नहीं है। ऐसी स्थिति में उन क्षेत्रीय दलों की भूमिका महत्‍वपूर्ण हो गई है। इस चुनाव में शिवसेना ने अपने रुख के बारे में स्थिति अभी तक स्‍पष्‍ट नहीं की है।

बीजेडी, टीआरएस और वाईएसआर के संपर्क में शाह


राज्‍यसभा उप-सभापति के चुनाव में तीन क्षेत्रीय दलों बीजू जनता दल, टीआरएस और वाईएसआरसीपी की निर्णायक भूमिका को देखते हुए एनडीए और विपक्षी पार्टियां इन छोटे दलों को लुभाने में जुट गई हैं।

इन तीन पार्टियों के 17 सदस्य राज्यसभा का अगला उप-सभापति चुनने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। यही कारण है कि सत्तारूढ़ दल के रणनीतिकार भी इन तीनों दलों के संपर्क में हैं,

क्योंकि इन पार्टियों ने पिछले साल राष्ट्रपति चुनाव के दौरान भाजपा का समर्थन किया था। हालांकि बीजेडी ने हालांकि उप राष्ट्रपति चुनाव के लिए कांग्रेस उम्मीदवार को अपना समर्थन दिया था।

नौ अगस्‍त को होना है चुनाव

आपको बता दें कि राज्यसभा के उप-सभापति के लिए 9 अगस्त को चुनाव होना है। इस वक्त किसी भी गुट के पास बहुमत नहीं है। इसलिए कोई भी यह दावा करने में असमर्थ है कि कांग्रेस अथवा एनडीए में से कौन जीत दर्ज करेगा।

अधिकांश विशेषज्ञ यह मानकर चल रहे थे कि राज्यसभा में अधिक संख्या होने की वजह से विपक्ष इस चुनाव को जीत सकता है, लेकिन एनडीए से जुड़े सूत्रों की मानें तो भाजपा इस बार भी विपक्षी एकता को झटका देने की योजना पर काम कर रही है।

इस योजना के तहत ही अकाली दल के नाराज होने के बावजूद भाजपा ने नीतीश कुमार के करीबी जेडीयू नेता हरिवंश का नाम एनडीए का उम्‍मीदवार बनाया है।

एनडीए के पास 112 का आंकड़ा

राज्यसभा 245 सदस्यों वाला सदन है। इस वक्त एक सीट रिक्त है। कुल सीटों का आधा 122 होता है। राज्य सभा में इस वक्त एनडीए के 112 सांसदों का समर्थन है।

यानी बहुमत से से 11 कम। इनमें भाजपा के 73, एआईएडीएमके 14, डोलैंड पीपल्स फ्रंट 1, जेडीयू 6, मनोनीत 4, नागा पीपल्स फ्रंट 1, रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया ए के 1, शिरोमणी अकाली दल 3 और सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट 1 व अन्‍य शामिल हैं।

विपक्षी एकता के पास 112

राज्यसभा में संयुक्त विपक्ष के पास 112 सांसद हैं यानी बहुमत से 11 कम। कांग्रेस के पास 50, आम आदमी पार्टी के 3, तृणमूल कांग्रेस के 13, बहुजन समाज पार्टी 4, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया के 2, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया-एम के 5,

द्रविड मुनेत्र कजगम के 4, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के 1, जेडीएस के 1, केरल कांग्रेस एम के 1, नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी 4, राष्ट्रीय जनता दल 5, समाजवादी पार्टी 13, तेलगु देशम पार्टी 6 व अन्‍य शामिल हैं।

अगर ये मानकर चलें कि शिवसेना के तीन सांसद संयुक्‍त विपक्ष के प्रत्‍याशी व टीडीपी नेता सीएम रमेश कुमार का समर्थन कर दें तो भी महागठबंधन का आंकड़ा 115 तक ही पहुंचता है।

यानि टीआरएस, बीजेडी और वाईएसआर का समर्थन महागठबंधन और भाजपा दोनों के लिए जरूरी है। ये तीनों जिस तरफ अपना रुख करेंगे उसी की जीत तय है।

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