सोनिया गांधी के करकमलों से होगा इस वर्ष राज्योत्सव का शुभारंभ

2 नवम्बर को राज्यपाल अनुसुईया उइके होंगी मुख्य अतिथि

रायपुर: इस वर्ष राज्योत्सव का शुभारंभ एक नवम्बर को शाम 7 बजे सोनिया गांधी के करकमलों से होगा। 2 नवम्बर को मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ की राज्यपाल अनुसुईया उइके होंगी तथा राज्योत्सव का समापन 3 नवम्बर को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के मुख्य आतिथ्य में सम्पन्न होगा।

इस वर्ष राज्योत्सव में राज्य शासन व्दारा स्थापित अलग-अलग क्षेत्रों के राज्य स्तरीय सम्मान तीनों दिन प्रदाय किए जाएंगे। साथ ही इस वर्ष राज्योत्सव में छत्तीसगढ़ राज्य के ही कलाकारों को प्रस्तुति के लिए आमंत्रित किया गया है, जिसमें प्रतिदिन राज्य के विभिन्न अंचलों के पारंपरिक लोकनृत्यों की छटा के साथ ही पारंपरिक लोक गाथाओं की भी प्रस्तुति होगी।

इस वर्ष राज्योत्सव में छत्तीसगढ़ी संस्कृति की छटा बिखरेगी। तीनों दिन छत्तीसगढ़ के लोकप्रिय शास्त्रीय नृत्य, वादन, गायन के साथ गीत-गजल एवं सुगम संगीत की भी प्रस्तुतियां होंगी।

कार्यक्रमों में पंडवानी गायन, पारम्परिक नृत्य पंथी, गेड़ी, गौरी-गौरा, राउत नाचा, करमा, सैला, गौर, ककसाड़, धुरवा, सुआ नृत्य, सरहुल नृत्य, सैला नृत्य, राउत नाच, और ककसार नृत्य का प्रदर्शन किया जाएगा। छत्तीसगढ़ राज्योत्सव के तीनों दिन लोकमंच का भी कार्यक्रम आयोजित होगा।

कार्यक्रम का आरंभ मांगलिक मोहरी वादन से होगा। इसके पश्चात छत्तीसगढ़ महतारी की वंदना गीत-अरपा पैरी के धार की प्रस्तुति होगी। फिर लोकनृत्यों का संगम होगा, जिसमें राज्य के विभिन्न अंचलों के लोक नर्तक दलों की प्रस्तुति होगी।

इस प्रस्तुति में पंथी, गेड़ी, गौरी-गौरा, राउत नाचा, करमा, सैला, गौर, ककसाड़, धुरवा, सुआ नृत्य का संयोजन होगा। इसी क्रम में पंडवानी गायन, रायगढ़ की कत्थक शैली में समूह नृत्य की प्रस्तुति होगी तथा रंगारंग लोकमंच के कार्यक्रम के साथ प्रथम दिवस की सांस्कृतिक संध्या का समापन होगा।

राज्योत्सव की तैयारियां हुईं पूरी

एक नवंबर से साइंस कॉलेज ग्राउंड में शुरू होने वाले राज्योत्सव के लिए लगभग तैयारियां पूरी हो चुकीं हैं। इस बार के राज्योत्सव को खास बनाने के लिए भूपेश सरकार ने कुछ नया कर रही है। जिसमें एक और जहां छत्तीसगढ़ी लोक कलाकार अपने हिसाब से मंच सजाएंगे तो वहीं दूसरी और सरकार की पौनी पसारी योजना के अपडेट वर्जन की झलक होगी। राज्योत्सव में इस बार ज्यादातर थीम सफाई, पर्यावरण और बुनियादी जरूरतों पर आधारित है।

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