छत्तीसगढ़

आरक्षक की दोनों किडनी खराब, इलाज के लिए कोरबा पुलिस देगी एक दिन का वेतन

रायपुर : अक्सर हम और आप बचपन से सूनते आ रहे हैं कि, एकता में बड़ी ताकत होती है। यदि एक साथ मिलकर हालात से मुकाबला किया जाए तो बड़े से बड़े मुश्किल तथा जंग को जीता जा सकता है। ऐसा ही एकता का परिचय कोरबा पुलिस ने दिया है।
दरअसल थाना दर्री में तैनात आरक्षक क्रमांक 339 मुकेश सिंह ठाकुर का दोनों किडनी पूरी तरह से खराब हो चुका है। आरक्षक को इलाज के लिए उसके परिजन गुजरात ले गए हैं। यहां मुलजी भाई पटेल यूरोलॉजिकल हॉस्पिटल नाडियाड में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों ने कहा की मरीज के ऑपरेशन में करीब 10 लाख रुपए खर्च आएगा। अस्पताल प्रबंधन ने आरक्षक के परिजनों को शुरुआत में 25 सितंबर तक किडनी ट्रांसप्लांट कराने के लिए 7 लाख रुपए अस्पताल में जमा करवाने कहा है।
इधर, कोरबा पुलिस को आरक्षक के इलाज में खर्च की राशि की जानकारी मिलते ही एसपी डी शरवन कुमार ने एक आदेश-पत्र जारी किया है। इसमें लिखा है कि सभी राजपत्रित अधिकारी और सिपाहियों की एक दिन का वेतन राशि में कटौती की जाएगी तथा उक्त राशि को आरक्षक मुकेश सिंह के खाते में जमा करवाया जाएगा। पुलिस अधीक्षक कार्यालय से जारी आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि, जो कर्मचारी, अधिकारी प्रस्ताव के अनुरूप एक दिन का वेतन देने में असहमत है ऐसे कर्मचारियों की सूचि तत्काल एक दिन के भीतर एसपी कार्यालय में प्रस्तुत किया जाए।

डेढ़ साल से ले रहा था दवाई :
दर्री पुलिस ने बताया कि आरक्षक लंबे समय से बीमार था। उसका इलाज भी स्थानीय अस्पताल में चल रहा था और डेढ़ साल से दवाई ले रहा था। आरक्षक के तबीयत अधिक खराब होने की स्थिति में उसे राजस्थान के अस्पताल में शिफ्ट किया गया। जहां वर्तमान में इलाज जारी है। बताया गया कि कुछ दिनों में आरक्षक का ऑपरेशन होगा।

पुलिस आरक्षक की पत्नी देगी किडनी :
पुलिस आरक्षक मुकेश सिंह ठाकुर की पत्नी को उसके पति के किडनी फेल होने की जानकरी होने के बाद वह टूट गई थी। इस दौरान आरक्षक की पत्नी ने हिम्मत दिखाया और अपनी एक किडनी पति को देने के तत्काल तैयार हो गई। आरक्षक की पत्नी का कहना है कि यदि उसका पति उनके साथ नहीं होंगे तो वह अकेले जीकर क्या करेगी। बता दें कि आरक्षक के 2 बच्चे हैं।
कोरबा एसपी डी शरवन कुमार ने कहा कि, आरक्षक कोरबा पुलिस परिवार का सदस्य है। वह बीमार है और जिंदगी-मौत से जूझ रहा है। ऐसे में हमारी जिम्मेदारी बनती है कि, इस दु:ख की घड़ी में हम मिलकर उसके साथ खड़े रहें। तभी सिपाही का हौसला और भी मजबूत होगा।

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