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अयोध्या के कनक भवन में आज भी चौसर खेलते हैं राम-जानकी

सखी स्वरूप में मौजूद हैं राम भक्त हनुमान, राम जन्मोत्सव में ढोल नगाड़ों से गूंजी अयोध्या

फैजाबाद। धार्मिक नगरी अयोध्या के कनक भवन मंदिर में तो जश्न का माहौल है। ढोल नगाड़े की धुन पर बधाई गीत गाए जा रहे हैं। मौका है श्रीराम जन्मोत्सव का है। भक् तों को ऐसा सैलाब है कि हर कोई अपने आराध्य का दर्शन पाने के लिए बेसब्री से इंतजार कर रहा है।

मां कैकेयी ने सीता को मुंह दिखाई की रस्म में दिया था कनक भवन

कनक भवन यानी नाम से ही साफ हो जाता है कि सोने का महल। ये महल प्रभु श्रीराम और माता सीता के विवाह के बाद कैकेयी ने मुंह दिखाई की रस्म में अपनी बहू सीता को दिया था। भगवान राम और माता सीता विवाह के बाद इसी महल में रहा करते थे। मान्यता है कि आज भी प्रभु श्रीराम और माता सीता यहां मौजूद हैं। राम जन्मोत्सव के समय तो देवी-देवता खुद यहां आते हैं।

भक्तों की सारी मुरादें होती हैं पूरी

यहां हर कोई बधाई गीत गाए जा रहा है। इसी धरती पर राम ने अवतार लिया था। इसीलिए कनक भवन मंदिर में भक्तों का तांता लगा है। भक्तों की मान्यता है कि यहां आने से मन की सारी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। यही नहीं यहां से कभी कोई खाली हाथ नहीं जाता।

कष्टों का निवारण होता है और पापों से मुक्ति मिलती है। इसीलिए यहां भक्तों का तांता लगा रहता है। ज्यादातर भक्त तो पूरे नौ दिन यहां रहकर आरती में शामिल होते हैं। इसके बाद ठीक 12 बजे जन्मोत्सव के समय भगवान राम अपने भक्तों को दर्शन देते हैं।

होती है फूलों की आरती

कनक भवन मंदिर के मुख्य पुजारी बताते हैं कि यहां राम जन्म के समय आरती फूलों से होती है। पुजारी के मुताबिक मंदिर के प्रथम तल पर आठ कुंज हैं यानी आठ कमरे हैं। किसी कमरे में भगवान और माता सीता के खेलने का इंतजाम हैं। दोनों यहां चौसर भी खेलते हैं। भोजन और स्नान के लिए भी यहां कक्ष बने हुए हैं। इसी के साथ संगीत का भी कक्ष है।

इसके बाद भगवन शयन कक्ष में सोने चले जाते हैं और सुबह उन्हें धीरे-धीरे जगाने के लिए शहनाई बजती है। इतना ही नहीं, यहां भगवान राम और माता सीता के साथ भरत, लक्ष्मण, शत्रुघ्न और हनुमान भी रहते हैं, लेकिन ये सभी सखी रूप में रहते हैं, क्योंकि यहां पुरुषों का प्रवेश वर्जित है।

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