छत्तीसगढ़

रामकथा शास्त्र भी है शस्त्र भी- श्री शंभुशरण लाटा जी महाराज

रामकथा चंद्रमा की किरणों के समान है.यह हमें शीतलता तो प्रदान करता ही है यह लोगों के दुःख भी हर लेता है.यह हमारे लिए शास्त्र भी है और शस्त्र भी. अगर इसके भाव को इसकी गहराईयों को व्यक्ति समझ ले तो सारे दुःख स्वतः कम लगने लगते है

रामकथा शास्त्र भी है शस्त्र भी- श्री शंभुशरण लाटा जी महाराज

रायपुर में बही रामरस की धारा,रायपुर हुआ राममय

नौ दिवसीय रामकथा के पहले दिवस 

रायपुर : रामकथा चंद्रमा की किरणों के समान है। यह हमें शीतलता तो प्रदान करता ही है यह लोगों के दुःख भी हर लेता है। यह हमारे लिए शास्त्र भी है और शस्त्र भी। अगर इसके भाव को इसकी गहराईयों को व्यक्ति समझ ले तो सारे दुःख स्वतः कम लगने लगते है।

यह बात व्यासपीठ पर विराजित वाणी भूषण पंडित शंभू शरण लाटा महाराज ने  संगीतमय प्रभु श्री रामकथा के प्रथम दिवस रामनाम महिमा के दौरान कही। इस पावन अवसर पर राम भक्त श्रद्धालु श्री राम भजन पर थिरकते नज़र आये।श्रीराम कथा का यह भव्य और दिव्य आयोजन धर्मस्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल की पहल पर राष्ट्रीय दिशा मंच,रायपुर स्वागत एवं प्रोत्साहन समिति,श्री हनुमान महापाठ समिति द्वारा इनडोर स्टेडियम परिसर रायपुर में किया जा रहा है।

कथा से श्रद्धालुओं को जोड़ते हुए लाटा जी महाराज ने कहा कि पैसे से राम नहीं खरीद सकते हैं परंतु प्रभु श्रीराम पकड़ में आ जाए तो मान लीजिए लक्ष्मी जी भी उनके पीछे-पीछे आएगी और आपको आशीर्वाद देगी। परंतु इसके लिए प्रभु राम के आदर्शों को आत्मसात करते हुए उनके पदचिन्हों पर चलना होगा।

उन्होंने कहा कि आजकल लोगों को भगवान पर से विश्वास कम  हो रहा है। इसलिए श्रद्धा का भाव उन् में नहीं आता । इस राम कथा में रम जाईये, फिर देखिए श्रद्धा का भाव आपके जीवन मे कैसे आता है। निश्चित ही आप जीवन में शांति का अनुभव करेंगे। साथ ही कहा कि कोई गलती करके भी जिसके मन मे पश्चाताप नही होगा उसका जीवन निष्पाप नही हो सकता। उन्होंने एक तीखी टिपण्णी करते हुए कहा कि “दुनिया मे झूठे लोगों को हुनर आता है, सच्चे लोग तो इल्जाम से ही मर जाते है।”

महाराज श्री ने कहा कि यह लोक किसी का बिगड़ जाए तो उसे स्वर्ग नहीं मिलेगा। जो सुख और दुख है यही झेलना है। प्रभु राम के आदर्शों में चलते हुए स्वर्ग जैसा सुखी जीवन स्वयं बनाये तो ही परलोक स्वर्ग की आशा कर सकते है।

रामकथा में राजश्व मंत्री प्रेमप्रकाश पांडे, संत श्री बालकदास जी महाराज, संनिर्माण कर्मकार मंडल के अध्यक्ष मोहन एंटी,श्रम कल्याण मंडल के उपाध्यक्ष सुभाष तिवारी, बिरगांव महापौर अम्बिका यदु,छत्तीसगढ़ चैम्बर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष जितेंद्र बरलोटा,आरडीए उपाध्यक्ष रमेश सिंह ठाकुर,विजय अग्रवाल,योगेश अग्रवाल, जिला भाजपा कोषाध्यक्ष योगी अग्रवाल, प्रदेश भाजयुमों महामंत्री संजु नारायण सिंह,सुखनंदन सोनकर,महिला मोर्चा महामंत्री मीनल चौबे,किसान मोर्चा प्रदेश मंत्री श्रीवास जी, महिला मोर्चा जिला अध्यक्ष शैलेन्द्री परगनिया,राजेश पांडे, प्रदेश भाजयुमों सह मीडिया प्रभारी अनुराग अग्रवाल,प्रशांत ठाकुर , अरुण लूथरा,सालिक सिंह ठाकुर,आकाश दुबे,मनोज चक्रधारी, पाहवा जी, किरण अवस्थी, चूड़ामणि निर्मलकर,सचिन मेघानी, विनय ओझा, मुकेश पंजवानी, सुमित शर्मा,दिनेश डोंगरे,बाबी खनूजा,सदाशिव सोनी,श्रेयांश जैन,सोनू राजपूत, अम्बर अग्रवाल,शशि अग्रवाल,नीतू सोनी,सुभद्रा तम्बोली,सीमा सिंह ,सविता साहू,पायल अम्बानी सहित हज़ारों की संख्या रामभक्त श्रद्धालु मौजूद थे।

तुलसीदास जी ने विनायक से पहले की वाणी को पूजा

महाराज श्री ने कहा कि हमारी धर्म संस्कृति में किसी शुभ काम के पहले श्री गणेश जी की पूजा करना अच्छा माना जाता है परंतु रामचरितमानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास जी ने सर्वप्रथम माता सरस्वती की पूजा की बाद में श्री गणेश जी की। उन्होंने कहा कि श्री गणेश जी विशाल हृदय के है। वाणी का वर्णन विनायक से पहले किया जाना मतलब मातृशक्ति की महत्ता को बतलाना है।

हमारा धर्म विशुद्ध विज्ञान है।

कथा को आगे बढ़ाते हुए महाराज श्री ने कहा की लंका पहुंचने के लिए प्रभु राम की वानर सेना द्वारा बनाये गये रामसेतु की मान्यता पर रोक उंगली उठाते रहे हैं। पर अब इसे नासा ने भी प्रमाणित कर दिया है। उन्होंने कहा कि हमारा हर धर्म ग्रंथ विशुद्ध विज्ञान है। इसमें लिखी हर बात सिद्ध है। आज का विज्ञान भी अब इसकी सत्यता को स्वीकार करने लगा है।

गुरु गुरु रहे भगवान न बने

गुरु की आवश्यकता पर कथा वाचक लाटा जी महाराज ने कहा कि गुरु जीवन की आवश्यकता है। गुरु बिन भव सागर पार नहीं हो सकता। गुरु का काम है शिष्य को धर्म-कर्म में लगाओ और पाप से छुड़ाओ। परंतु इस कलयुग में लोगों से भूल हो रही है वे गुरु को ही भगवान मानने लगे हैं। पर मेरा सवाल है गुरु भगवान कैसे हो सकता है? ऐसे गुरु धर्म से विमुख है इस कारण आए दिन सुर्खियों में उनकी धर्म-संस्कृति को शर्मसार कर देने खबरें आती रहती हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कोई भी सरकार ऐसे गुरुओं को सजा दिलाने आगे नहीं आती उन्हें लगता है कि ऐसे गुरु के शिष्य उन्हें वोट नहीं देंगे।

गोस्वामी तुलसीदास ने दी राष्ट्रवाद की सीख

गोस्वामी तुलसीदास जी ने रामचरितमानस की रचना का शुभारंभ प्रभु श्री राम की पूजा कर नही अपितु  अयोध्या की पावन भूमि को पूज कर किया। गोस्वामी तुलसीदास जी ने यह संदेश देने की कोशिश की कि सबसे पहली हमारी मातृभूमि है उसके बाद हमारा धर्म हमारी संस्कृति है। इसीलिए मातृभूमि का पूजन और उसके लिए सम्मान सभी के हृदय में होना चाहिए।

इसके बाद उन्होंने सरयू नदी को पूजा जो राज्य की समृद्धि का कारक थी तत्पश्चात मर्यादापुरूषोत्तम राम के अयोध्या की जनता को नमन किया और कहा कि जब जनता नही तो राजा कहा के राज कहा का।

04 Jun 2020, 9:22 AM (GMT)

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