रमन बोले – मुझे टिकट देते हैं कि नहीं यह संगठन तय करेगा, सुनकर मंत्रियों के माथे पर आया पसीना

टिकट कटने वालों में कई मंत्री व विधायक भी शामिल

रायपुर : कैरोना सहित अन्य क्षेत्रों से गुरुवार को आए उप चुनाव के परिणामों ने भाजपा नेतृत्व की परेशानी बढ़ा दी है। भाजपा नेतृत्व की ओर उंगलियां भी उठने लगी हैं, पार्टी के शीर्षस्तर पर हार के कारणों को परत-दर-परत खंगाला जा रहा है। ऐसे में इसी माह अंबिकापुर में होने वाली अमित शाह की सभा में भीड़ जुटाने में भाजपा ने पूरी ताकत झोंंक दी है। हालांकि पार्टी अध्यक्ष अमित शाह व संगठन के तेज तरार प्रभारी महासचिवों के छत्तीसगढ़ दौर के समय ही चुनावी दांवपेंच की बात उठती है मगर अंदरखाने में आरएसएस और संघ से जुटे अनुषांगिक संगठनों ने अपने तौर पर सर्वे का काम पूरा कर लिया है।

हाल ही आए भाजपा के महासचिव व केंद्रीय मंत्री कैलाश विजयर्गीय रायपुर आए थे। वो गुपचुप तरीके से संगठन नेताओं की रिपोर्ट लेकर दिल्ली वापस लौटे गए, अब अमित शाह के दौरा होना वाला है। यही वजह है कि उन विधायकों व मंत्रियों की उल्टी गिनती शुरू हो गई है, जिन्होंने पार्टी अध्यक्ष अमित शाह की कड़ी हिदायत के बाद भी अपना परफारमेंस में कोई सुधार नहीं किया है।

बता दें कि मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की विकास यात्रा के दौरान टिकट के दावेदार खुलकर सामने आ रहे हैं। दावेदार सीएम से लेकर संगठन के बड़े नेताओं से संपर्क साधने में लगे हैं। ऐसे समय ने मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने साफ शब्दों में कहा दिया है कि टिकट वितरण की जिम्मेदारी संगठन की है। मुझे टिकट देना है या नहीं यह बात भी संगठन तय करेंगे। बता दें कि मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद उनकी कार्यशैली से वाकिफ मंत्री और विधायकों की सांसे फूलने लगी हैं जो अब तक इस मुगालते में थे वे मुख्यमंत्री की गुडबुक के भरोसे टिकट का जुगाड़ कर चुनाव जीत लेंगे।

संघ के आकंलन के साथ आईबी रिपोर्ट भी तैयार : आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए पार्टी ने कई स्तर पर सर्वे का काम पूरा कर लिया है। संगठन, आरएसएस के साथ-साथ आईबी की रिपोर्ट भी पार्टी के पास पहुंच गई है। ऐसे में पार्टी ने नए दावेदारों की खोजबीन भी अपने स्तर पर शुरू कर दी है। इसमें विकास यात्रा सबसे अहम भूमिका है। दरअसल मुख्यमंत्री की नजर इस भीड़ में उन चेहरों को तलाश रही है, जिनमें विधानसभा चुनाव जीत कर आने का मद्दा है।

बता दें कि जुलाई में पार्टी के राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री सौदान सिंह भी कार्यकर्ताओं का मन टटोलने जिलों का दौरा करेंगे। माना जा रहा है कि इस दौरान जिलों में दावेदार शक्ति प्रदर्शन करेंगे। वहीं मंत्री व सीटिंग विधायकों के खिलाफ कार्यकर्ताओं में का गुस्सा दोबारा टिकट पाने की जुगाड़ में लगे लोगों पर भारी पड़ने वाला है।

बूथ और शक्ति केंद्रों में होगी प्रत्याशी की पड़ताल, पिछला रिपोर्ट कार्ड भी होगा अहम : बताया जा रहा है कि इस बार टिकट वितरण में जिलों की तुलना में बूथ और शक्ति केंद्रों की भूमिका सबसे अहम होगी। माना जा रहा है कि पार्टी बूथ और शक्ति केंद्रों में जाकर जीत सकने वाले दावेदारों की तलाश करेगी। जाहिर ऐसे हालात में बूथ के कार्यकर्ता में मंत्री और विधायकों से उनकी नाराजगी आड़े आने वाली है। समयदानी कार्यकर्ता पहले ही पूरी रिपोर्ट तैयार कर चुके हैं। जिसकी हार्ड कॉपी भाजपा मुख्यालय तक पहुंच चुकी है।

इन मंत्रियों की टिकट खतरे में : महेश गागड़ा, अजय चंद्राकर, पुन्नूलाल मोहिले, रमशीला साहू, केदार कश्यप, भइया लाल राजवाड़े, दयालदास बघेल। इनके अलावा कई संसदीय सचिव भी इसमें शामिल हैं।

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