शिक्षा क्षेत्र में जारी राष्ट्रीय रैंकिंग में रमन सरकार फिसड्डी साबित हुये

रायपुर : छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता विकास तिवारी ने केंद्र की मोदी सरकार के मानव संसधान विकास मंत्रालय की ओर से हाल में जारी राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग ढाचे (एमआईआरएफ) द्वारा भारत वर्ष के टाॅप रैंकिग काॅलेज एवं विश्वविद्यालयों की सूची जारी कि जिसमें की इंजीनियरिंग, मेंनेजमेंट, र्फामेंसी, मेडिकल काॅलेज एवं लाॅ काॅलेजो की सूची में छत्तीसगढ़ राज्य के काॅलेजो की रैंकिंग का बहुत बुरा हाल है। मंत्रालय द्वारा रैंकिंग पद्धति में शिक्षण, शिक्षा, संसाधन, अनुसंसाधन, व्यवसायिक व्यवहार, स्नातक परिणामों के आधार पर विश्वविद्यलयों की रैंकिंग तय कि जाती है जिसके की सभी कसौटीयों में छत्तीसगढ़ के सभी काॅलेज की स्थिति बेहद खराब और बहेद निचले पायदानों पर दिख रही है।

प्रवक्ता विकास तिवारी ने कहा कि राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग ढाचे (एमआईआरएफ) के सभी कसौटीयों में रमन सरकार फिसड्डी साबित हुयी वर्ष 2018 में जारी किये गये रैंकिंग में प्रदेश के कोई भी विश्वविद्यालयों में प्रथम 100 की सूची में स्थान नहीं मिला इंजीनियरिंग काॅलेजो में प्रथम 100 की सूची में रायुपर एनआईटी का स्थान 81वां रहा, र्फामेसी कालेजो की सूची में पं. रविशंकर विश्वविद्यालय को प्रथम 50 की सूची में 48वां स्थान मिला, कृषि विश्वविद्यालय के जारी रैंकिंग सूची में छत्तीसगढ़ के काॅलेजो को स्थान नहीं मिला जबकि छत्तीसगढ़ कृषि प्रधान प्रदेश है सबसे बुरा हाल प्रदेश के मेडिकल काॅलेजो का रहा जिसमें जारी रैंकिंग की सूची में देश के प्रथम 25 काॅलेजो में से एक भी प्रदेश का काॅलेज नहीं है।

प्रवक्ता विकास तिवारी ने कहा कि शिक्षा क्षेत्र में अध्ययनरत छात्र-छात्रा रैंकिंग देखकर ही काॅलेजो में दाखिला लेते है। लेकिन राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग ढाचे (एमआईआरएफ) द्वारा जारी रैंकिंग सूची में प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था की पोल पट्टी खोल दी और रमन सरकार शिक्षा व्यवस्था के हर क्षेत्र में फिसड्डी हो गयी। बड़े दुर्भाग्य का विषय है कि प्रदेश सरकार के मुखिया जो खुद चिकित्सक है उनके द्वारा गत 14 सालों में ऐसे कोई भी प्रयास नहीं किये गये जिससे की प्रदेश के चिकित्सा महाविद्यालयों को देश के टाॅप मेडिकल काॅलेज में स्थान मिल सके। मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा जारी रैंकिंग सूची में प्रदेश के काॅलेजो को स्थान नहीं मिलने पर छात्र-छात्राओं में निराशा और हताशा का वातावरण बन हुआ है।

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