रमन सिंह ने छत्तीसगढ़ में फंसे प्रवासी मजदूरों को हजार रुपए देने की वकालत की

लॉकडाउन की अवधि को बढ़ाने जाने के फैसले के बाद डॉ. रमन सिंह ने चिंता जाहिर की

रायपुर: वैश्विक महामारी कोरोना वायरस से निपटने के लिए लगाए गए लॉकडाउन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को तीन मई तक बढ़ाने की घोषणा कर दी है. वहीँ प्रधानमंत्री के फैसले के बाद डॉ. रमन सिंह ने चिंता जाहिर की.

डॉ. रमन सिंह ने कहा कि लॉकडाउन पर छत्तीसगढ़ के परिपेक्ष्य में मुझे दो बात की चिंता है. एक स्थानीय स्तर में रोज कमाने-खाने वाले गरीब मजदूरों के लिए भोजन की व्यवस्था करनी चाहिए. इसके लिए उन्होंने सामाजिक संगठन, धार्मिक संगठन, राजनीतिक दलों को साथ लेकर चलने की बात कही.

उन्होंने कलेक्टर के माध्यम से खाद्य सामग्री के वितरण के आदेश पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या जिलाधीश पूरे देश का लाखों लोगों को दोनों समय के लिए भोजन और नाश्ते की व्यवस्था कर सकता है. मैंने राजनांदगांव में देखा है काफी लोग एसडीएम को फोन कर रहे है, लेकिन वे फोन नहीं उठाने को तैयार नहीं है.

दूसरी सबसे बड़ी चिंता है छत्तीसगढ़ में रह रहे बाहर के मजदूरों की मजदूरी को लेकर है. उन्होंने कहा कि कहीं चावल तो कहीं खाना दिया जा रहा है, लेकिन इससे जीवन नहीं चलता है. उनके साथ बच्चे और महिलाएं हैं उनकी बीमारी यदि होती है तो दवाई भी खरीदना है.

डॉ. रमन सिंह ने कहा कि मैं मुख्यमंत्री को पत्र लिख रहा हूं कि कम से कम मजदूरों के खाते में 1000 रुपए ट्रांसफर करने की जरूरत है. आज तारीख तक कोई जवाब देने को तैयार नहीं है कि कितने लोगों को राशन दिया जा रहा है.

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