रमन सिंह और अजीत जोगी की मिलीभगत फिर से उजागर : कांग्रेस

रमन सिंह और अजीत जोगी की मिलीभगत फिर से उजागर : कांग्रेस

रायपुर : प्रदेश कांग्रेस कमेटी के संचार विभाग के सदस्य किरणमयी नायक ने पत्रकारों से अनौपचारिक चर्चा करते हुये कहा कि मुख्यमंत्री अजीत जोगी के जाति के मामले में न्यायालय के फैसले का हम सम्मान करते हैं न्यायालय के फैसले से पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी और वर्तमान मुख्यमंत्री रमन सिंह की जो जुगलबंदी है वह बेनकाब हो गई है। जब 2003 में भारतीय जनता पार्टी ने इस मामले को लेकर चुनाव लड़ा था और अजीत जोगी को फर्जी आदिवासी कहा था तब इस मामले में पूरी संवेदनशीलता बरती जाने वाली थी, सावधानी बरती जानी थी सर्वोच्च न्यायालय का आदेश था राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की मंशा थी इन सारी बातों को देखते हुए इस मामले में जानबूझकर गलतियां रमन सिंह सरकार ने सरकार के मुखिया के आदेश पर की है और इसके परिणाम स्वरुप फैसले आया है । इस फैसले के लिए रमन सिंह सरकार और पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी जिम्मेदार है।

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इस मामले में न्यायालय के फैसले के आने की बाद की परिस्थितियों पर कांग्रेस पार्टी विधि विशेषज्ञों से विचार-विमर्श भी करेगी और मूल रूप से इसमें तो एक नई समिति की गठन की बात कही गई है, फिर से जांच होगी। हम मांग करेंगे कि सरकार अब पहले जो गलतियां की है वह गलतियां ना करें और आदिवासियों के साथ छलावा करना रमन सिंह सरकार बंद करें। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायलय के द्वारा आज जोगी जी के याचिका पर जो निर्णय दिया गया है, उस निर्णय से ही एक बार साफ जाहिर हो गयी है कि कहीं न कही भारतीय जनता पार्टी की रमन सरकार जो लगातार 2003 से चुनावी मुद्दा बनाकर चल रही थी, फर्जी आदिवासी का, वही अजीत जोगी को लगातार लाइफ लाईन देती आयी है और अलग-अलग सुप्रीम कोर्ट के डायरेक्शन के बावजूद आज तक जांच समिति हाईपावर कमेटी का सही तरीके से गठन नहीं होना और उस समिति में सही तरीके से सुनवाई नहीं होना, और उसके बाद जो फैसला होता है उस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देने पर सरकार ने जो प्रशासनिक गलतियां जानबूझकर की, वहीं हाईकोर्ट के द्वारा जोगी जी की याचिका को स्वीकार करने का कारण बनी। इन सारे मुद्दों को एक सिरे से जोड़ कर देखा जाये तो साफ-साफ यह जो साजिश है यह दोनों की जुगलबंदी है।

इसका निर्णय आम जनता स्वयं कर सकती है। स्पष्ट है कि इस पूरे मामले में चुनाव के मद्देनजर उनके जाति के निर्णय से रोकने के लिये, बचाने की कुनीति और प्रशासनिक साजिश रमन सिंह सरकार द्वारा रची थी। जोगी मामले में जांच आयोग का गठन हुआ था उस जांच आयोग की एक रिपोर्ट हुयी थी जिसमें जोगी जी के जाति के मामले में फैसला दिया था। परंतु जब ये मामला हाईकोर्ट में गया तो वहां पर महाधिवक्ता जुगल किशोर गिल्डा ने बिना आयोग की परमिशन के उस रिपोर्ट को वापस ले लिया। तब भारतीय जनता पार्टी के नेता नंद कुमार साय ने एक आरोप लगाया था कि जुगल किशोर गिल्डा ने जानबूझकर इस रिपोर्ट को वापस लिया है। उसके बाद फिर से जांच आयोग का गठन किया गया और इस जांच आयोग के गठन में भी लापरवाही बरती गयी और उसकी जांच प्रक्रिया में लापरवाही बरती गयी। तो कुल मिलाकर देखा जाये तो दोतरफा साजिश है। इस याचिका में जोगी ने भी ऑन रिकार्ड महाधिवक्ता जुगल किशोर गिल्डा के ऊपर आरोप लगाया है कि उन्होने रमन सरकार के साथ मिलकर जांच आयोग के गठन में लापरवाही बरती है।

ये पूरा मामला देखा जाये तो जुगलबंदी दोनो की साबित हो रही है। भाजपा के वरिष्ठ नेता हैं जो आरोप लगाते है अपनी ही पार्टी महाधिवक्ता के ऊपर में, इसका मतलब यह कि अपने ही सरकार पर आरोप लगा रहे है। माननीय उच्च न्यायालय के आदेश के बाद ये आरोप आज पुष्ट हो गया है। फिर से एक नयी लाईफ लाइन जोगी जी को मिल गयी है। कब हाईपावर कमेटी गठित होगी? कब उसका फैसला होगा? फिर एक लंबी प्रक्रिया चलेगी। हाईकोर्ट के आदेश के बाद जांच आवेदन की प्रक्रिया में लगने वाले समय का फिर से लाभ जोगी जी को मिल सकता है तो कुल मिलाकर के 2003 से इस मुद्दे को लेकर भाजपा लगातार सत्ता में बनी हुयी है, 2008 में 2013 में तो इस मुद्दे को जीवित रखकर शायद फिर भाजपा चौथी पारी में आ जायेंगे, इस कुटनीति उद्देश्य को लेकर ही जोगी जाति मामले में रमन सिंह और अजीत जोगी ने मिलकर साजिश रची है।

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