रामानुजगंज में बदलेंगे दोनों लड़ाके, सामरी में मचेगा घमासान

प्रदीप शर्मा

रामानुजंगज विधानसभा क्षेत्र सामरी विधानसभा क्षेत्र

रामविचार नेताम की कुंडली पर भारी पड़े थे बृहस्पत

सामरी किला जीतने भाजपा को करनी होगी मशक्कत

 

बृहस्पत सिंह

प्रीतम रामअविभाजित मध्यप्रदेश में जिन विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा ने पैठ बनाई थी उनमें अनुसूचित जनजाति के लिए सुरक्षित सीट पाल और सामरी शामिल हैं। हालांकि पाल विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस के देवसाय मरावी लंबे समय तक विधायक चुने गए पर इस मिथक को भाजपा के रामविचार नेताम पहली बार तोड़ा। जिसके बाद से ये सीट लगातार तीन बार भाजपा के कब्जे में रही। पिछले चुनाव में नेताम को हार का सामना करना पड़ा। 2003 के परिसीमन में पाल विधानसभा सीट को विलोपित कर रामानुजगंज सीट अस्तित्व में आई। वहीं सामरी विधानसभा जनता शासन काल में केंद्रीय राज्य राज्यमंत्री रहे दबंग आदिवासी नेता लरंग साय का गढ़ रही है। सामरी में ज्यादातर चुनाव में भाजपा का ही कब्जा रहा है।

रायपुर: छत्तीसगढ़ राज्य बनने से पहले अनुसूचित जनजाति के आरक्षित पाल विधानसभा क्षेत्र में लगातार जीत हासिल करने वाले रामविचार नेताम ने 2003 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के चिरपरिचित प्रतिद्वंद्वी बृहस्पत सिंह को सीधे मुकाबले में 10213 मतों से हराया। भाजपा के रामविचार नेताम को 36309 व कांग्रेस के बृहस्पत सिंह को 26092 मत मिले।

2008 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने नेताम को फिर अपना उम्मीदवार बनाया। इस चुनाव में भाजपा के रामविचार नेताम ने अपने पुराने प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस के बृहस्पत सिंह को सीधे मुकाबले में 4598 मतों से हराया। इस चुनाव में भाजपा को मिलने वाले मतों में कमी आई। भाजपा उम्मीदवार रामविचार नेताम को 53546 मत मिले वहीं कांग्रेस उम्मीदवार बृहस्पत सिंह को 48967 मतों से संतोष करना पड़ा।

साल 2013 में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा ने पुन: रामविचार नेताम को अपना उम्मीदवार बनाया पर भाजपा को एंटीइनकम्बेंसी फेक्टर का सामना करना पड़ा। इस बार भाजपा को कांग्रेस से हार का सामना करना पड़ा। कांग्रेस के बृहस्पत सिंह भाजपा के कद्दावर मंत्री नेताम को सीधे मुकाबले में 11592 मतों से हरा कर विधानसभा में पहुंंचने में कामयाब रहे। कांग्रेस के बृहस्पत सिंह को 73174 मत मिले जबकि भाजपा के रामविचार नेताम को 61582 मतों से संतोष करना पड़ा।

वर्तमान में भाजपा के रामविचार नेताम राज्य सभा सदस्य के रूप में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधितत्व कर रहे हैं ऐसे में भाजपा को नए चेहरे की तलाश है. वहीँ कांग्रेस का टिकट भी इस बार शायद किसी और को मिलने की चर्चा है . बताया जाता है कि बृहस्पत सिंह की अजीत जोगी से निकटता के कारण टिकट कट सकती है ।

भाजपा का गढ़ रहा है सामरी, कांग्रेस के प्रीतम राम ने लगाई है सेंध

आजादी के बाद से सामरी विधानसभा में जनसंघ के जमाने से जिस चेहरे ने क्षेत्र में भाजपा की जड़ों को सींचा उनमें स्वर्गीय लरंग साय का परिवार प्रमुख रहा है। सामरी विधानसभा क्षेत्र में वनवासी कल्याण आश्रम व आॅपरेशन घर वापसी से जुड़े रहे पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री दिलीप सिंह जूदेव व पदमश्री गहिरा गुरु का प्रभाव शुरू से ही रहा है। यहीं वजह रही कि सामरी विधानसभा सीट ज्यादातर चुनाव में भाजपा के खाते में ही रही।

अब तक हुए चुनाव में भाजपा ने स्वर्गीय लरंग साय के परिवार के लोगों को ही अपना उम्मीदवार बनाया है। साल 2003 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने स्वर्गीय लरंग साय के भतीजे सिद्धनाथ पैकरा को चुनाव में उतारा था। जिन्होंने सीधे मुकाबले में कांग्रेस महेश्वर पैकरा को 18469 मतों के अंतर से हराया। भाजपा के सिद्धनाथ पैकरा को 31878 मत मिले वहीं कांग्रेस के महेश्वर पैकरा को 18469 मतों से संतोष करना पड़ा।

2008 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने सिद्धनाथ पैकरा को फिर मौका दिया और उन्होंने कांग्रेस के चिंतामणी महाराज को सीधे मुकाबले में 19523 मतों के भारी अंतर से हराया। भाजपा के सिद्धनाथ पैकरा को 50101 और कांग्रेस के चिंतामणी महाराज को 19523 मतों से संतोष करना पड़ा।

साल 2013 के चुनाव में भाजपा की ओर तीसरी बार सिद्धनाथ पैकरा को उम्मीदवार बनाया गया। इस बार कांग्रेस ने नए चेहरे पर दांव लगाया था। कांग्रेस ने डॉ. प्रीतम राम को अपना उम्मीदवार बनाया। जिसमें कांग्रेस को सफलता भी मिली। सीधे मुकाबले में कांग्रेस के डॉ. प्रीतम राम ने भाजपा के सिद्धनाथ पैकरा को सीधे मुकाबले में 7750 मतों से हराया। कांग्रेस के प्रीतम राम को 82585 और भाजपा के सिद्धनाथ पैकरा को 50762 मतों से संतोष करना पड़ा।
इस बार कयास लगाए जा रहे हैं कि कांग्रेस डॉ. प्रीतम राम को दोबारा अपना उम्मीदवार बना सकती है वहीं भाजपा को अपना गढ़ जीतने के लिए सशक्त चेहरे की तलाश है।

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