रामनवमी विशेष: इस बार गुरु पुष्य, सर्वार्थ सिद्धि, अमृत, रवि, त्रिशूल और ध्वज योग में मनाया जाएगा यह पर्व

रामनवमी के दिन भगवान श्रीराम की पूजा-अर्चना करने से विशेष पुण्य

राम नवमी एक वसंत हिंदू त्योहार है जो भगवान राम का जन्मदिन मनाता है. वह हिंदू धर्म की वैष्णववाद परंपरा के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, विष्णु के सातवें अवतार के रूप में. यह त्योहार अयोध्या में राजा दशरथ और रानी कौशल्या के जन्म के माध्यम से, भगवान विष्णु के राम अवतार के रूप में मनाता है.

चैत्र नवरात्र का आज अंतिम दिन

पूरे देश में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम का जन्मदिवस यानी रामनवमी को धूमधाम से मनाया जा रहा है. साथ ही आज चैत्र नवरात्र का अंतिम दिन भी है. इस बार नवरात्र में अष्टमी और नवमी एक साथ मनाई जा रही है.

ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक, 13 अप्रैल यानि की आज अष्टमी का योग 8:16 मिनट तक ही है. इसके बाद नवमी तिथि लग जाएगी. 13 अप्रैल 8:19 मिनट पर रामनवमी का मुहूर्त शुरू होगा और 14 अप्रैल सुबह 06:04 तक रहेगा.

इस बार रामनवमी गुरु पुष्य, सर्वार्थ सिद्धि, अमृत, रवि, त्रिशूल और ध्वज योग में मनाई जा रही है. ज्योतिर्विदों के अनुसार ऐसा महायोग 1977 के बाद आया है. बता दें कि रामनवमी के दिन भगवान श्रीराम का जन्म हुआ था. भारत में इसे बड़ी श्रद्धा और विश्वास के साथ मनाया जाता है. हिंदू तालिका के अनुसार यह त्योहार हर साल चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी को धूमधाम से मनाया जाता है.

श्रीराम की पूजा-अर्चना से मिलता है लाभ

रामनवमी के दिन भगवान श्रीराम की पूजा-अर्चना करने से विशेष पुण्य मिलता है. इस बार राम नवमी पर कुछ और दुर्लभ संयोग बन रहे हैं. इससे इसका महत्व कई गुना बढ़ गया है. रामनवमी पर पुष्य नक्षत्र के साथ-साथ बुधादित्य योग का विशेष संयोग भी बना है. उच्च का सूर्य, बुध के साथ मिलकर बुधादित्य योग बना रहा है. साथ ही पुष्य नक्षत्र भी है. कई सालों बाद इतना विशेष योग भी बन रहा है. इसके कारण इस बार राम नवमी पर पूजा-अर्चना का महत्व काफी अधिक है.

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