हत्या के दूसरे मामले में भी संचालक रामपाल को कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद की सजा

सजा के साथ एक-एक लाख रुपए का जुर्माना लगाया

नई दिल्ली :

चार साल पुराने हत्‍या के 2 मामलों में बरवाला के सतलोक आश्रम रामपाल को अदालत ने आज उम्रक़ैद की सजा सुना दी है। हिसार के बरवाला स्थित सतलोक आश्रम के संचालक संत रामपाल व अन्य के खिलाफ केस नंबर 429 व 430 में भी कोर्ट ने उसे उम्रकैद की सजा के साथ एक-एक लाख रुपए का जुर्माना लगाया है।

जज ने जैसे ही सजा का ऐलान किया तो रामपाल फूट-फूटकर रोने लगा। एफआईआर नंबर 430 सुरेश कुमार ने दर्ज करवाई थी। एक महिला रजनी को आश्रम से गंभीर हालत में निकाला गया था, जिसे बाद में चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया था। इस मामले को लेकर रामपाल सहित 30 लोगों को पहले ही दोषी करार दिया जा चुका है और अब कोर्ट ने इस पर अपना फैसला सुना दिया।

ये हैं मुकदमा नंबर 430 के दोषी:
1- बिजेंद्र उर्फ वीरेंद्र (रोहतक)
2- जोगेंद्र उर्फ बिल्लु (हिसार)
3- प्रीतम उर्फ राजकपूर (भिवानी)
4- राजेंद्र (सोनीपत)
5- रामपाल (धनाना, सोनीपत)
6- बलवान (किनोर)
7- पवन
8- राजीव शर्मा (सोलन)
9- राजेश उर्फ रमेश (सुमेरपुर, पाली, राजस्थान)
10- नटवर लाल उर्फ लक्ष्मण (ओगना, उदयपुर, राजस्थान)
11- राजेश (सवाई माधोपुर, राजस्थान)
12- रामचंद्र (कुरुक्षेत्र)
13- कृष्ण कुमार (झज्जर)
14- बबीता (हिसार)

बाबाओं को शह देने में राजनेता भी पीछे नहीं : कोर्ट

कोर्ट ने रामपाल व अन्य को दोषी करार दिए जाने के अपने 154 पेज के फैसले में बाबाबों व राजनेताओं के कॉकटेल पर काफी कुछ कहा है। कोर्ट ने ङ्क्षचता जताई कि देश की जनता इन बाबाओं के चंगुल में पड़ कर अपना वर्तमान व भविष्य खराब कर रही है।

खास तौर पर कोर्ट ने वोट बैंक के चक्कर में बाबाओं की शरण में जाने वाले राजनेताओं पर भी तल्ख टिप्पणी की है। कोर्ट ने अपने फैसले में लिखा है कि ये गॉडमैन ऐसे लोगों को भोजन व शरण देकर मूर्ख बनाते हैं। यह सच्चाई है कि राजनेता अपने वोट बैंक के चक्कर में इन बाबाबों को इस कदर ताकतवर बना देते हंै कि कभी कभी ये लोग समानांतर सरकार भी चलाने लगते हैं।

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