यूपी के इस गांव में कुछ इस तरह कम खर्च में होती हैं शादियां

ऐसे वक्त में जब शादी के मौके पर ऊल-जलूल खर्च कर खुद को अलग और बड़ा दिखाने की होड़ लगी हो, ठीक उसी दौरान रामपुर का एक गांव मामूली खर्च में शादियां कराकर नजीर पेश कर रहा है.

यहां शादी में ज्यादा रकम खर्च करने पर प्रतिबंध है. इसकी निगरानी के लिये एक कमेटी भी बनाई गई है, जो शादी में होने वाले खर्च पर नजर रखती है.

इतना ही नहीं, शादी के बाद पति-पत्नी के बीच होने वाले किसी भी तरह के विवाद का निपटारा भी तंजीम की पंचायत में होता है जिसे सभी मानते हैं. ऐसे में दंपति कोर्ट-कचहरी के चक्कर से बच जाते हैं.

रामपुर के दोकपुरी टांडा गांव में चाहे कोई अमीर हो या फिर गरीब, सबकी शादियां एक ही समारोह में होती हैं.

मुस्लिम बहुल इस गांव के बाशिंदे एक-दूसरे के रिश्तेदार हैं. यहां मुस्लिम बंजारा बिरादरी के लोग ज्यादा हैं. इन्होंने ‘फलाहे मुस्लिम बंजारान तंजीम’ नाम से समिति बना रखी है. तंजीम ने शादी में होने वाली फिजूलखर्ची रोकने के लिये कुछ नियम बना रखे हैं. मसलन, गांव में शादी सिर्फ दिन में होती है.

किसी एक दिन समारोह आयोजित करके एक ही जगह 10 शादियां कराई जाती हैं. दहेज में कार, बाइक या महंगी चीजें देना सख्त मना है.

तंजीम के सदर मोहम्मद अहमद उर्फ बाबर और सरपस्त मौलाना मनसब अली हैं. शादियों में फिजूलखर्ची रोकने के लिये इन्होंने पड़ोस के गांव खेड़ा टांडा में भी इन्हीं नियमों को लागू कराया है. मौलाना मनसब अली ने बताया कि शादी में दूल्हे को लड़की वालों की तरफ से सिर्फ घरेलू बर्तन, बेड, मेज, कुर्सी और कपड़े दिये जाते हैं.

ज्वैलरी के नाम पर लड़की को सिर्फ मामूली ज्वैलरी देने की छूट है.

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