रेंजरों को 19 साल पहले मिले हथियार हुए कबाड़, लाठी सेे कर रहे जंगल की सुरक्षा

रायपुर। छत्तीसगढ़ के जंगलों में तस्करों और वन्य प्राणियों को रोकने की जिम्मेदारी जिन अधिकारी-कर्मचारियों को विभाग ने दी है। उन अधिकारी-कर्मचारी की सुरक्षा लाठी के भरोसे है। छत्तीसगढ़ राज्य का गठन हुए 19 वर्ष हो गया लेकिन राज्य सरकार वनक्षेत्र में पदस्थ अधिकारियों-कर्मचारियों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम आज भी नहीं कर पाई है। वनक्षेत्र में पदस्थ कर्मी हथियार के अभाव में हिंसक वन्य प्राणी और तस्करों का शिकार हो रहा है, इसके बाद भी राज्य सरकार ने कोई पहल नहीं की है। सरकार तक अपनी बात पहुंचाने के लिए वनक्षेत्र में पदस्थ कर्मी प्रदर्शन कर अधिकारियों तक अपनी बात पहुंचाने के लिए मजबूर है।

राज्य गठन के बाद 2000 में मध्यप्रदेश से छत्तीसगढ़ वन विभाग के जिम्मेदारों को 8 बंदूक मिली थी। यह बंदूक वनक्षेत्र में पदस्थ रेंजरों को दी जाती थी, ताकि आवश्यकता पडऩे पर वो इसका इस्तेमाल कर खुद की और अपनी टीम की रक्षा कर सके। वर्ष 2001 तक अफसरों के पास ये बंदूक रही, लेकिन 2001 के बाद वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर सभी बंदूके रेंजरों ने मुख्यालय में जमा कर दी और उसके बाद अधिकारियों ने संबंधित थाना में उसे जमा करवा दिया। बंदूक जमा होने के बाद से अब तक विभाग ने वापस नहीं ली है। प्रदेश में हर साल आधा दर्जन से ज्यादा वनकर्मियों की ऑन ड्यूटी मौत होने की बात सामने आ रही है, इसके बाद भी विभाग सक्रिय कदम नहीं उठा रहा है।

5 साल से कर रहे मांग

वनक्षेत्र में पदस्थ अधिकारी-कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए छत्तीसगढ़ वन कर्मचारी संघ के पदाधिकारी लगातार मांग कर रहे है। बीजेपी सरकार से मांग के बाद छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार से भी उन्होंने सुरक्षा के लिए हथियार मुहैया करवाने की बात कही थी। संघ की मांग पर राज्य सरकार ने कमेटी का गठन किया है। कमेटी की रिपोर्ट कर्मचारियों की सुरक्षा का भविष्य तय करेगी।

मंत्रालय ने ली सुध

देश के वनक्षेत्र में पदस्थ अधिकारी-कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो इसलिए 10 मार्च 2019 को केंद्रीय सरकार ने राज्य सरकारों को पत्र लिखकर भारतीय वन कानून संशोधन करने के लिए प्रस्ताव भेजा है। प्रस्ताव में जायज कारण पर गोली चलाने समेत 5 बिंदुओं पर संसोशधन करने की बात लिखी है। केंद्र सरकार के इस प्रस्ताव का कुछ संगठन विरोध कर रहे है, लेकिन राज्य सरकारों से अब तक किसी भी तरह की प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

रेंजरों को हथियार रखने की इजाजत

विभागीय नियम के अनुसार वनक्षेत्र में पदस्थ रेंजर को हथियार अलॉट किया जाता है। रेंजर कार्रवाई के दौरान और वन्य प्राणियों के हिंसक होने पर लोगों की सुरक्षा के लिए उसका इस्तेमाल कर सकता है। मध्य प्रदेश, राजस्थान जैसे राज्यों में आधुनिक हथियार वनक्षेत्र में पदस्थ अधिकारी-कर्मचारी को अलॉट हुआ है, लेकिन छत्तीसगढ़ में इसमें अभी कोई काम नहीं हुआ है।

पीसीसीएफ छत्तीसगढ़ राकेश चतुर्वेदी ने बताया कि वनक्षेत्र में पदस्थ अधिकारी-कर्मचारी की सुरक्षा के लिए उनकी मांग पर हमने सामान उपलब्ध करवाया है। छत्तीसगढ़ वन कर्मचारी संघ ने 11 सूत्रीय मांग का ज्ञापन मंत्री महोदय को पिछले दिनों सौपा था, जिसमें हथियार उपलब्ध करवाने का भी जिक्र है। संघ की मांग पर कमेटी बन गई है। कमेटी की रिपोर्ट अनुसार सरकार हमें जो निर्देश देगी हम पूरा करवाएंगे।

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