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रणजी ट्रॉफी : मध्‍यप्रदेश का अब तक का सबसे शर्मनाक प्रदर्शन

इसी के साथ टीम को बड़ी हार का सामना भी करना पड़ा।

जिस होम ग्राउंड होलकर स्टेडियम पर मेजबान मध्यप्रदेश ने कई यादगार जीतें दर्ज की, उसी ग्राउंड पर टीम ने ऐसा शर्मनाक प्रदर्शन किया कि वह इतिहास में दर्ज हो गया।

आंध्रप्रदेश के खिलाफ मध्यप्रदेश ने रणजी ट्रॉफी इतिहास का अपना सबसे न्यूनतम स्कोर बनाया। इसी के साथ टीम को बड़ी हार का सामना भी करना पड़ा।

रणजी ट्रॉफी एलीट समूह के आखिरी लीग मैच में जिस पिच पर आंध्र प्रदेश ने दोनों पारियों में 433 रन का स्कोर बनाया और मध्य क्रम के बल्लेबाज करण शिंदे ने नाबाद 103 रन की पारी खेली, उसी पिच पर मेजबान मप्र की टीम मेहमानों के पहली पारी के स्कोर (132) को भी पार नहीं कर सकी।

वह दोनों पारियों में बमुश्किल 126 रन तक पहुंच पाईं। इस तरह यह मैच आंध्र ने तीसरे दिन ही 307 रन से जीत लिया और मप्र के नॉकआउट में पहुंचने की उम्मीदों को ध्वस्त कर दिया। उसे नॉकआउट के लिए जीत जरूरी थी।

दूसरी पारी में मप्र की पूरी टीम महज 35 रनों पर आउट हो गई। ये रणजी ट्रॉफी में उसका अब तक का सबसे न्यूनतम स्कोर है। इससे पहले बड़ौदा के खिलाफ टीम 60 रनों पर आउट हुई थी।

होलकर स्टेडियम में आंध्र प्रदेश को पहली पारी में 132 रन पर आउट करने के बाद मप्र से बड़ा स्कोर बनाने की उम्मीद थी लेकिन उसकी पहली पारी सिर्फ 91 रन पर सिमट गई।

41 रन से पिछड़ी आंध्र प्रदेश के बल्लेबाजों ने दूसरी पारी में अपने खेल में काफी सुधार किया और 301 रन बनाकर मप्र को परेशानी में डाल दिया।

इस स्कोर में करण ने अपने पहले ही प्रथम श्रेणी मैच में दम दिखा दिया। करण ने अनुभवहीन गोलमारु मनीष (21) के साथ नौवें विकेट के लिए 53 और विजय कुमार (10) के साथ दसवें विकेट के लिए 50 रन जोड़कर मप्र के गेंदबाजों को बौना साबित कर दिया।

अब बारी थी कि मप्र के बल्लेबाजों को कुछ कर दिखाने की लेकिन वह मानो शर्मनाक प्रदर्शन करने की ठान कर ही मैदान में उतरे।

सभी ने दूसरी पारी में 89 मिनट में 16.5 ओवर में सिर्फ 35 रन पर घुटने टेक दिए। इसके साथ ही मप्र ने प्रथम श्रेणी मैचों में अपने पिछले न्यूनतम स्कोर 60 रन को पीछे छोड़ दिया।

जो उसने बड़ौदा के खिलाफ उसी की धरती पर बनाया था। आउट होने की ऐसी होड़ मची थी कि आठ बल्लेबाज दोहरी रनसंख्या तक भी नहीं पहुंच सके, इनमें से छह बल्लेबाज तो खाता भी नहीं खोल सके।

छह बल्लेबाज 16 रन के भीतर आउट हो गए। यश दुबे (16) और आर्यमान विक्रम बिड़ला (12) ही कुछ कर सके।

तेज गेंदबाज गौरव यादव चोटिल होने से खेलने नहीं आए। विकेटों की पतझड़ के बीच आंध्र का कोई गेंदबाज हैट्रिक नहीं ले सका लेकिन तेज गेंदबाज वेंकटा शशिकांत ने एक ही ओवर में तीन विकेट जरूर लिए।

उन्होंने 6 विकेट अपनी झोली में डाले। शशिकांत ने 12 मैचों में तीसरी बार 5 या उससे अधिक विकेट चटकाए। विजय को 3 विकेट मिले।

 

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