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RBI ने विकास दर अनुमान घटाकर 6.7% किया ,रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं

बुधवार को आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल की अध्यक्षता में समिति की बैठक हुई. इसमें महंगाई और अर्थव्यवस्था की मौजूदा स्थिति को देखते हुए रेपो रेट में कोई बदलाव न करने का फैसला लिया गया है और इसे 6 फीसदी ही रखा गया है. इसके अलावा समिति ने जीएसटी के क्रियान्वयन पर भी नाखुशी जताई है. आरबीआई ने विकास दर के अपने पिछले अनुमान को घटा दिया है. उसे विकास दर अनुमान 7.3 फीसदी से घटाकर 6.7 फीसदी कर दिया है.
कैश रिजर्व रेशि‍यो में भी नहीं किया बदलाव

यह 4 फीसदी ही रखा गया है. हालांकि समिति ने स्टैच्युअरी लिक्विडिटी ( सांविधिक नकदी अनुपात) में 50 बेसिस प्वाइंट की कटौती की है. इसे 20 से 19.5 फीसदी कर दिया गया है.

आरबीआई जीएसटी से खुश नहीं

मौद्रिक समिति ने कहा है कि जीएसटी के लागू होने का इकोनॉमी पर नकारात्मक असर पड़ा है. इसकी वजह से लघु अवध‍ि में मैन्युफैक्च‍रिंग सेक्टर के लिए दिक्कतें पैदा हुई हैं. इसकी वजह से देश में निवेश की गतिविधियों पर भी असर पड़ेगा. देश में निवेशक गतिविधियां पहले ही दबाव में है. हालांकि आरबीआई ने यह भी कहा है कि दूसरी छमाही में यह असर कम होगा और विकास को रफ्तार मिलेगी.

विकास दर का अनुमान घटाया

मौद्रिक समिति ने विकास दर को 7.3 फीसदी से घटाकर 6.7 फीसदी कर दिया है. आरबीआई ने अगस्त में ही 7.3 फीसदी का अनुमान जारी किया था.

महंगाई बढ़ेगी

वित्त वर्ष 2017 की दूसरी छमाही में यह 4.2 से 4.6 के बीच रहेगी. आरबीआई ने कहा है कि किसानों को कर्ज माफी देने से राजकोषीय घाटे पर असर पड़ेगा. आरबीआई ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इन सभी चीजों को ध्यान में रखें तो जीडीपी का अनुपात वित्त वर्ष 2017-18 में 100 बेसिस प्वाइंट अथवा 1 फीसदी बढ़ेगा.

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