पठन संस्कृति के विकास हेतु रीडिंग कार्नर आवश्यक, सतत पालक सम्पर्क से बढता आत्मीयता लगाव

सोनू सेन:

सराईपाली: विद्यालय समाज और शिक्षा के बीच महत्वपूर्ण कड़ी है। जब ज्ञान, मूल्यों और सिद्धांतों, कौशलों का प्रकाश विद्यालय की चार दीवारी से बाहर समुदाय तक पहुंचता है तब समाज शिक्षा के वास्तविक महत्व, प्रगति और खुशहाली को समझने एवं स्वीकार करने में सक्षम बनता है। जागरूक समुदाय दायित्व पूरा करता है कि उनके बच्चे पढ़ें- बढ़ें- सीखें, उनका कौशल विकसित हो और सशक्त नागरिक बनें।

शत-प्रतिशत नामांकन, ठहराव, उपलब्धि नहीं मिल सकती

विद्यालय/कक्षा में शिक्षक अपने स्तर पर चाहे कितना भी प्रयास क्यों न कर लें लेकिन जब तक समुदाय- पालक साथ नहीं दें तब तक अपेक्षाकृत ढंग से शत-प्रतिशत नामांकन, ठहराव, उपलब्धि नहीं मिल सकती और इस तरह कम नामांकन, कम उपस्थिति जैसे प्रमुख समस्याओं का समाधान तब तक संभव नहीं हो पाता जब तक समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित न किया जाए।

उत्साही और नवाचारी शिक्षक यशवंत कुमार चौधरी (शास.उच्च प्राथ. शाला लांती ) के द्वारा शालेय शिक्षा एवं वर्तमान कार्यक्षेत्र में प्रतिबद्धता जाहिर करते हुए शैक्षिक लब्धि बढ़ाने सतत पालक सम्पर्क किया जाता है।

इसी तारतम्य में लांती ग्राम की तंग गलियों में डोर टू डोर सघन पालक सम्पर्क किया गया जिसमें छात्र- छात्राओं में पठन संस्कृति के विकास हेतु घरों में रीडिंग कार्नर बनाने एवं इसके उपयोगिता को देखने घरों में दस्तक दिए शिक्षक यशवंत कुमार चौधरी साथ ही माताओं – पालकों, ग्रामीणों की शाला व शिक्षा में सहभागिता बढाने के पुनीत उद्देश्य के साथ यह गृह भेंट कार्यक्रम के तहत संपर्क किया गया ।

समुदाय की भागीदारी को सुनिश्चित करने विभिन्न पहल

शासकीय उच्च प्राथमिक शाला लांती में शिक्षक यशवंत कुमार चौधरी के द्वारा पालकों एवं विद्यालय के बीच एक मजबूत रिश्ता कायम करने के उद्देश्य से गुड पेरेंटिंग, अभिभावक सम्मान ,सुपर मॉम जैसे सशक्त कदम उठाते हुए एसडीपी में समुदाय की भागीदारी को सुनिश्चित करने विभिन्न पहल किए जा रहे हैं।

व्यक्तिगत चर्चा कर सूचनाओं का आदान-प्रदान

पालक संपर्क के दौरान शिक्षा गुणवत्ता में सुधार के प्रयासों को तेज करते हुए लर्निंग को बढ़ावा देने एवं बच्चों के साथ सकारात्मक भाषा का प्रयोग करने ,बच्चों के गृह कार्य एवं शैक्षिक कार्यों की चर्चा को तरजीह देने के साथ घरों में बच्चों को पढ़ने के लिए अनुकूल शैक्षिक वातावरण प्रदान करने एवं बेहतर समय प्रबंधन, सुपोषण के साथ बच्चों को लगातार मोटिवेट करने हेतु पालकों को जागरूक किया गया । बच्चों के वर्तमान स्थिति से पालकों को अवगत कराते हुए व्यक्तिगत चर्चा कर सूचनाओं का आदान-प्रदान किया गया।

शिक्षक के सहज- सरल व्यक्तित्व व आत्मीय व्यवहार, समुदाय से मधुर संबंध एवं बाल केंद्रित शिक्षण से पालकों – माताओं में खुशी एवं आनंद का माहौल है। शिक्षक को अपने घरों में पाकर गदगद हो उठते हैं तथा शैक्षिक चर्चा से एक नया जुनून सा महसूस करने लगते हैं।

ज्ञात हो कि शिक्षक यशवंत चौधरी जी द्वारा किए जा रहे बेहतर पालक संपर्क को राष्ट्रीय स्तर पर “द टीचर ऐप”ह्यूमन्स ऑफ इंडियन स्कूल द्वारा प्रशंसा करते हुए सफलता की कहानी का सृजन कर ” बच्चों के पालक भी हैं स्कूल के हिस्सा” नाम से राष्ट्रीय स्तर पर द टीचर ऐप में स्थान दिया गया है जो विभिन्न राज्यों के शिक्षकों के लिए अनुकरणीय तथा प्रेरणादायी बना है तथा इसका लाभ शिक्षक साथी ले रहे हैं।

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