क्या सचमुच, रमन सरकार अंगद का पैर है..?

श्याम वेताल
     श्याम वेताल

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने डोंगरगढ़ में अटल विकास यात्रा के शुभारंभ के अवसर पर अपने भाषण में कहा कि छत्तीसगढ़ में मौजूदा भाजपा सरकार अंगद का पैर है, इसे कोई उखाड़ नहीं सकता. आत्मविश्वास से भरे इस कथन का प्रमाण तो विधानसभा चुनाव के बाद ही मिलना है लेकिन परिस्थितियां भी फिलहाल भाजपा के पक्ष में ही दिखलाई देती हैं.

इसमें कोई संदेह नहीं कि डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में पिछले 15 वर्षों से चल रही राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ की चाल, चरित्र और चेहरे में सकारात्मक परिवर्तन लाया है. राज्य गठन के तीन वर्ष बाद तक छत्तीसगढ़ को बीमारू राज्य का दर्जा प्राप्त था और भारत के नक्शे में इस राज्य की कोई पहचान नहीं थी.

देश की राजनीति में भी इस प्रदेश की अहमियत नहीं थी. पहचान थी तो सिर्फ नक्सल प्रभावित राज्य के रूप में थी. वर्ष 2003 में भाजपा की सरकार आने के बाद पहले मुख्यमंत्री के रूप में डॉ. रमन सिंह ने कार्यभार संभाला. उसके बाद लगातार वे 2008 और 2013 में भी मुख्यमंत्री बने.

इन तीन कार्यकालों में रमन सिंह ने न केवल राज्य में इंफ्रास्ट्रक्चर पर ध्यान दिया बल्कि आदिवासियों, किसानों, गरीबों एवं पिछड़ों के जीवन स्तर को सुधारने के लिए तल्लीनता से काम किया. इसी के परिणाम स्वरुप आज छत्तीसगढ़ को विकासशील राज्य के रूप में पहचान मिली और राष्ट्रीय राजनीति में भी छत्तीसगढ़ को प्राथमिकता मिलने लगी.

यह बात तो सभी मानेंगे कि जो काम करता है, उससे गलतियां भी होती है. जो कुछ नहीं करेगा, उससे गलतियां होने का प्रश्न ही नहीं उठता. बीते 15 वर्षों में छत्तीसगढ़ में काफी काम हुआ इसलिए कुछ गलतियां भी हुईं लेकिन काम के मुकाबले गलतियों का प्रतिशत नगण्य माना जाएगा.

जहां तक भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह द्वारा व्यक्त किए गए आत्मविश्वास का प्रश्न है, वह थोथा नहीं है. इसके दो कारण है. पहला तो यह कि 15 सालों में रमन सरकार ने राज्य का भरपूर विकास किया जो लोगों की नजर में है. दूसरा कारण है, इस बार की राजनीतिक स्थिति. पिछले विधानसभा चुनाव तक राज्य में दो ही राजनीतिक दल थे जिनकी गतिविधियां दिखाई देती थी. ये राजनीतिक दल भाजपा और कांग्रेस रहे. इस कारण चुनावी लड़ाई बराबर की थी लेकिन इस बार यह लड़ाई चतुष्कोणीय नजर आ रही है.

चतुष्कोणीय संघर्ष के बावजूद भाजपा को नुकसान होता नहीं दिख रहा है जबकि इस परिस्थिति में भाजपा को ही सबसे ज्यादा क्षति पहुंचनी चाहिए थी. इस बार चार दल जो मैदान में प्रमुख होंगे उनमें भाजपा, कांग्रेस के अलावा छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस (जोगी) और आम आदमी पार्टी है.

सभी जानते हैं कि छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी की पार्टी है. अजीत जोगी ने कांग्रेस से अलग होकर नयी पार्टी का गठन किया और अपना पूरा नेटवर्क भी बना लिया है. उनकी पार्टी राज्य की सभी 90 सीटों पर चुनाव लड़ रही है. चूँकि राज्य का मतदाता जोगीजी को बखूबी जानता है, इसलिए कांग्रेस समर्थक मतदाताओं का जोगी के प्रति आकर्षण स्वाभाविक है.

कहने का तात्पर्य है कि जोगी की पार्टी के प्रत्याशी कांग्रेस के ही वोट काटने में सफल रहेंगे. उधर, आम आदमी पार्टी भी कांग्रेस के लिए खतरा है. इसका मुख्य कारण है कि कोई नयी पार्टी सबसे पहले दूसरे नंबर की ही पार्टी को नुकसान पहुंचाती है.

अतः कांग्रेस पर दोहरा खतरा मंडरा रहा है. भाजपा में ऐसी कोई बड़ी बगावत नहीं है जिससे उसके वोटों में सेंध लगे. कहने का तात्पर्य है कि भाजपा की जीत में फिलहाल कोई बाधा नहीं दिखलाई दे रही है हां, अगर कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के बीच चुनावी गठबंधन होता है तो शायद भाजपा की विजय के प्रति आशंका हो सकती है अन्यथा राज्य में चौथी पारी खेलने के लिए भाजपा को मैदान साफ मिला है और फिर अंगद का पैर वाली अमित शाह की बात सही साबित हो जाएगी.

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