छत्तीसगढ़

रतनपुर नगर पालिका अध्यक्ष के खिलाफ रिकॉल की कार्रवाई निरस्त

बिलासपुर कलेक्टर को चार सप्ताह के अंदर पक्षकारों की उपस्थिति में जांच करने के निर्देश

बिलासपुर : छत्तीसगढ़ के बिलासपुर हाईकोर्ट ने रतनपुर नगर पालिका अध्यक्ष आशा सूर्यवंशी के खिलाफ रिकॉल की कार्रवाई को निरस्त कर दिया है। साथ ही बिलासपुर कलेक्टर को चार सप्ताह के अंदर पक्षकारों की उपस्थिति में जांच कर राज्य निर्वाचन आयोग को अनुशंसा भेजने और अनुशंसा के अनुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

क्या है पूरा मामला

बता दें कि बिलासपुर जिले के रतनपुर नगर पालिका में 4 जनवरी 2015 को आशा सूर्यवंशी अध्यक्ष पद पर निर्वाचित हुई थी। 13 पार्षदों ने 17 जुलाई 2017 को उन्हें पद से हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव पारित किया था। इसके खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी। इस पर राज्य शासन की तरफ से बताया गया था कि प्रस्ताव वापस ले लिया गया है. वर्तमान में उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लंबित नहीं है। बाद में 31 अगस्त 2017 को 13 पार्षदों ने फिर से अविश्वास प्रस्ताव प्रस्तुत किया। कलेक्टर ने नगर पालिका के सीएमओ से जानकारी मंगाई.

दो साल का कार्यकाल पूरा होने की जानकारी मिलने के बाद कलेक्टर ने 6 नवंबर 2017 को सुनवाई की तारीख तय की थी। सभी पार्षदों ने उपस्थित होकर प्रस्ताव की पुष्टि की, इसके बाद दो बार फिर से सुनवाई की गई। संतुष्टि के बाद कलेक्टर ने 23 दिसंबर 2017 को अध्यक्ष को पद से हटाने की अनुशंसा करते हुए राज्य शासन को प्रस्ताव भेजा था।

जिसके बाद राज्य निर्वाचन आयोग ने नए अध्यक्ष के चुनाव के लिए मतदाता सूची तैयार करने का कार्यक्रम जारी किया। 5 फरवरी 2018 को 13 में से 4 पार्षदों ने कलेक्टर के सामने आवेदन प्रस्तुत कर कहा कि उन्होंने गलतफहमी में प्रस्ताव का समर्थन किया था. वे अपना नाम वापस लेना चाहते हैं, लेकिन कलेक्टर ने उनके आवेदन पर विचार नहीं किया।

ये कोर्ट ने ये दिया फैसला

मतदाता सूची तैयार करने की जानकारी मिलने पर नगरपालिका अध्यक्ष आशा सूर्यवंशी ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई। इस पर हाईकोर्ट जस्टिस संजय के अग्रवाल की बेंच में सुनवाई हुई। हाईकोर्ट ने निर्णय में कहा है कि छत्तीसगढ़ नगर पालिका अधिनियम 1961 की धारा 47(2) के तहत राज्य शासन को भेजे गए प्रस्ताव का पुनर्विचार करने की शक्ति और क्षेत्राधिकार है।

हाईकोर्ट ने 4 सप्ताह के अंदर 4 पार्षदों के आवेदन पर विचार कर उनका बयान दर्ज करने के बाद राज्य शासन को दूसरा प्रस्ताव भेजने का निर्देश दिया है। राज्य शासन और राज्य निर्वाचन आयोग को कलेक्टर के दूसरे प्रस्ताव पर नियमों के मुताबिक कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए हैं।

Tags

Related Articles

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.