छत्तीसगढ़

माना में अफसरों का काम भी मनमाना, सुधारगृह बना कसाईखाना

रायपुर : माना बाल सुधार गृह के अधिकारियों और कर्मचारियों का काम भी मनमाना चलता है। यहां के अफसरों ने दो नाबालिग लड़कों को तब तक पीटा जब तक कि वे बेहोश नहीं हो गए। घटना शुक्रवार की बताई जा रही है । ये बर्बर कार्रवाई करने वाले कोई और नहीं बल्कि ये वो लोग थे जिन पर इन बच्चों को सुधरने की जिम्मेदारी है । ऐसे में सवाल तो यही उठता है कि क्या ऐसे ही बच्चों को सुधारा जाता है? अगर हाँ तो फिर ऐसे तथाकथित सुधारगृहों और कसाई खानों में क्या अंतर है?

क्या है पूरा मामला : दरअसल धारा 307 के मामले में पुलिस ने नाबालिग लड़के जय रक्सेल और लोकेश रक्सेल को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया था। जहां से दोनों को माना बाल सुधार गृह भेज दिया गया। दोनों नाबालिग लड़के के अंदर प्रवेश करते ही यहां के अधिकारी दोनों पर टूट पड़े। अधिकारियों ने दोनों को लात -घूंसे और डंडे से बेरहमी से पीटा गया और इतना पीटा गया कि दोनों मार खाते-खाते उल्टी कर बेहोश हो गए। दोनों लड़के के पीठ पर डंडे के निशान तीन दिनों के बाद भी नहीं हटा है।
मामले की जानकारी मिलते ही दोनों लड़के के परिजन उससे मिलने जिला अध्यक्ष राष्ट्रीय मजदूर कांग्रेस के साथ पहुंचे। जहां दोनों के साथ मारपीट होना पाया गया। दोनों ने अपने परिजनों को पहले ही दिन हुए मारपीट की जानकारी दी। इसके बाद उसके परिजनों के कहने पर दोनों को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। इधर माना बाल सुधार गृह के जिम्मेदार अफसर अशोक पांडे ने कहा कि मुझे मामले की जानकारी नहीं है। यदि लड़कों को पीटा गया है तो मामले की जांच करवाता हूं।

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