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‘टॉकीज : सिनेमा का सफर’ किताब के दूसरे पड़ाव का लोकार्पण

नई दिल्ली : किताब टॉकीज : सिनेमा का सफर के दूसरे पड़ाव का लोकार्पण यहां सोमवार को सुप्रसिद्ध अभिनेत्री तब्बू, राजकमल प्रकाशन समूह के मुख्य कार्यकारी अधिकारी आमोद महेश्वरी और जागरण फिल्म फेस्टिवल के निदेशक मयंक शेखर ने किया।

सिरी फोर्ट ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम में राजकमल प्रकाशन के संपादकीय निदेशक सत्यानंद निरूपम ने कहा कहा, इस पुस्तक के जरिये हम हिंदी पाठकों के बीच जाएं और सिनेमा के समझ का दायरा बढ़ाएं। इस दूसरी पुस्तक का मुख्य उद्देश्य यही है कि सिनेमा के दुनिया के बारे जो आम समझ है, वह सही बने और ज्यादा बने।

यह किताब पंद्रह सिने अभिनेताओं से बातचीत पर आधारित है। इसमें शामिल अभिनेताओं के इंटरव्यूज को पढ़ने से पता चलता है कि किस्म-किस्म के सपनों का सफर कराने वाले ये अभिनेता कितने सुलझे हुए नागरिक हैं और हर एक अभिनेता की अपनी संघर्ष कथा है।

टॉकीज : सिनेमा का सफर राजकमल प्रकाशन और जागरण फिल्म फेस्टिवल द्वारा संयुक्त रूप से प्रकाशित एक महत्वपूर्ण पुस्तक-श्रृंखला है। जून, 2018 में प्रकाशित इस किताब के दूसरे पड़ाव में पंद्रह सिने अभिनेताओं से बातचीत शामिल है।

अन्नू कपूर, ऋषि कपूर, ओम पुरी, नवाजुद्दीन सिद्दीकी, नसीरुद्दीन शाह, पंकज त्रिपाठी, प्रेम चोपड़ा, फारूक शेख, रणवीर शौरी, राजकुमार राव, राहुल बोस, वरुण धवन, विजय राज, विनय पाठक और संजय मिश्रा जैसे विशिष्ट अभिनेताओं से अजय ब्रह्मात्मज, मयंक शेखर, विनीत कुमार और स्मिता श्रीवास्तव की ये सारी दिलचस्प बातचीत सिनेमा-प्रेमियों और सिनेमा-अध्येताओं के लिए सिनेमाई दुनिया को समझने की एक नई खिड़की खोलने वाली है।

फिल्में हमसे क्या लेती हैं और बदले में हमें क्या देती हैं, अपनी संघर्ष-कथा से इतर इस बारे में भी अभिनेताओं ने बेबाकी से बात की है। फारुख शेख की सार्वजनिक मंच से की गई अंतिम बातचीत इस लिहाज से विशेष रूप से पठनीय है, जो इस पुस्तक में शामिल है।

टॉकीज : सिनेमा का सफर के पहले पड़ाव में ग्यारह महत्वपूर्ण सिनेमा निर्देशकों से अजय ब्रह्मात्मज और मयंक शेखर की बातचीत शामिल है। अनुराग कश्यप, अभिषेक चौबे, आर. बालकी, इम्तियाज अली, कबीर खान, पूजा भट्ट, मधुर भंडारकर, राजकुमार हिरानी, सुधीर मिश्रा, सौरभ शुक्ला, हर्षवर्धन कुलकर्णी जैसे सफल और प्रयोगधर्मी निर्देशकों से हुई ये सारी वर्ष 2015 के जागरण फिल्म फेस्टिवल में हुई थी। पुस्तक के रूप में इनका प्रकाशन 2016 में हो चुका है।

यह किताब फिल्म बनाने की तकनीक, उसकी बारीकियों और परेशानियों को मजेदार किस्सों में पिरोकर पाठकों के सामने लाती है। सिनेमा की दुनिया के बारे में आम समझ का विस्तार हो, इस पुस्तक-श्रृंखला का यही प्रयोजन है

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