छत्तीसगढ़

धार्मिक पाठशालाओं का होना अत्यंत आवश्यक

रायपुर : निपुणाकी विदुषी शिष्या स्नेहयशाकी अंतेवासिनी साध्वी रत्ननिधिआदि ठाणा-3 की निश्रा में शुक्रवार को जिनकुशल सूरि जैन दादाबाड़ी, एमजी रोड में जैन धार्मिक पाठशालाओं का छत्तीसगढ़ राज्य स्तरीय सम्मेलन हुआ। सम्मेलन में बच्चों ने विविध आकर्षक प्रस्तुतियां दी।
ऋषभदेव मंदिर ट्रस्ट , और वर्धमान सेवा संघ, शैलेन्द्रनगर के संयुक्त तत्वावधान में हुए इस सम्मेलन में मुंगेली, धमतरी, दुर्ग, महासमुंद, केशकाल, चरौदा, खरियार रोड, सदर जैन मंदिर-रायपुर आदि अनेक स्थानों की जैन धार्मिक पाठशाला के बच्चों और शिक्षकों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। बच्चों की ओर से विविध आकर्षक वेशभूषाओं में धर्म संस्कारों को प्रेरित करते गीत, समूह नृत्य, लघु नाटिका आदि सांस्कृतिक कार्यक्रमों की मनोहारी प्रस्तुतियां दी गईं। साध्वी भगवंत की ओर से सभा को मांगलिक प्रदान करने उपरांत सम्मेलन के प्रथम सत्र की शुरुआत ऋषभदेव मंदिर ट्रस्ट के ट्रस्टी , वर्धमान सेवा संघ के प्रमुख सदस्यों, प्रमुख रूप से सम्पतलाल झाबक, डॉ. अशोक पारख, महावीर पारख, श्यामसुंदर बैदमुथा, दीपक संघी के हाथों दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। इसके बाद संभव सूरि ज्ञानवल्लभ पाठशाला विवेकानंदनगर की बालिकाओं ने श्वेत, हरित, लाल, पीत और काले वर्ण के पारम्परिक परिधानों में शामिल होकर मंगलाचरण नवकार मंत्र है प्यारा की प्रस्तुति आकर्षक नृत्य के माध्यम से दी। वहीं संभव संस्कार सुरभि ज्ञानवल्लभ पाठशाला की बालिकाएं भाविता सेठ और योगिता बैद ने स्वागत गीत `मन की वीणा से गुंजित ध्वनि मंगलम् स्वागतम-स्वागतम स्वागतम स्वागतम की मधुर प्रस्तुति दी।
कार्यक्रम के सम्पूर्ण दिवस के स्वामी वात्सल्य के लाभार्थी सम्पतलाल झाबक ने कहा कि, वर्तमान परिदृश्य में नैतिक मूल्यों के बढ़ते ह्रास को रोकने आज की शिक्षा पद्धति में परिवर्तन-संशोधन की महती आवश्यकता है। आज हम अपने बच्चों को शिक्षा प्रदान कर, डिग्रियां दिलाकर अच्छी नौकरी के लिए प्रोत्साहित तो करते हैं, लेकिन नैतिक शिक्षा पर ध्यान नहीं दिया जाता। इसके फलस्वरूप युवा होकर युवा पीढ़ी को यह भान ही नहीं रहता कि क्या उचित है, क्या अनुचित, क्या किया जाना चाहिए, क्या नहीं ? बच्चों को नैतिक और धार्मिक संस्कारों से युक्त शिक्षा प्रदान करने में धार्मिक पाठशालाओं का अहम् योगदान होता है। यहां से धार्मिक शिक्षा प्राप्त बच्चों में न केवल उचित-अनुचित का ज्ञान होता है अपितु वे विनम्र, धार्मिक और अपने माता-पिता, गुरुजनों और बड़ों को सम्मान देने वाले होते हैं। ऐसी धार्मिक पाठशालाओं को संचालित करने में अपना अहम योगदान देने वाले गुरुजनों और संचालकों को मैं नमन करता हूं।
00 लघु नाटिका `संसार का स्वार्थ` ने दी सीख
ज्ञानवल्लभ पाठशाला, जैन मंदिर सदरबाजार के बच्चों ने शिक्षिकाओं के निर्देशन में लघु नाटिका `सांसार का स्वार्थ` की प्रेरणास्पद प्रस्तुति दी। इस नाटिका में बच्चों ने बड़ी ही खूबी के साथ यह दर्शाया कि, परिवार में बड़े-बुजुर्गों का स्थान इस स्वार्थ भरी दुनिया में तब तक ही रहता है जब तक कि घर के माता-पिता या सास-ससुर के पास धन-सम्पत्ति और धरोहर होती है। जैसे ही धन-सम्पत्ति जायजाद घर के बेटों-बहुओं को सौंप दी जाती है तो घर के ही बेटों-बहुओं में माता-पिता के प्रति सम्मान, सेवा और प्रेम का वह भाव नहीं रहता जैसा कि पहले हुआ करता था। बड़े-बुजुर्गों के प्रति सम्मान, सेवा और आदर का भाव परिवार के हर सदस्यों में सदैव बना रहे यह संदेश इस लघु नाट्य प्रस्तुति से जनमानस के मध्य प्रदान दिया गया।

पुण्यतिथि पर साध्वी कुसुम का स्मरण : अध्यक्ष तिलोकचंद बरडिय़ा ने कहा कि, आगम ज्ञाता साध्वी कुसुमकी शुक्रवार को पुण्यतिथि पर गुणानुवाद सभा भी हुई, जिसमें साध्वी रत्ननिधि ने उनकी अध्यात्मिक जीवन यात्रा का स्मरण करते हुए साध्वी मंडल और श्रीसंघ की ओर से उन्हें भावांजलि अर्पित की। नवपदजी की ओली की आराधना का शुक्रवार को तृतीय दिवस रहा, अनेक श्रद्धालुओं ने आचार्य भगवंत की आराधना कर आयम्बिल व्रत रखा। महावीर भवन सदरबाजार में सामूहिक आयम्बिल के लाभार्थी रहे- संतोष कुमार सचिन कुमार दुग्गड़ परिवार। चातुर्मास समिति के प्रचार प्रभारी मानस कोचर ने कहा कि, जैन मंदिर सदरबाजार के उपाश्रय में आनंदघन महाराज के स्तवन और अर्थ की विवेचना प्रतिदिन सुबह 8 से 8.45 बजे तक चल रही है।

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