रिपोर्ट: स्‍वच्‍छता मिशन को गंभीरता से अपनाएंगे तो टल जाएंगी 3 लाख मौतें

-पीएम नरेंद्र मोदी की मुहिम पर WHO की मुहर

नई दिल्लीः

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए स्वच्छत भारत मिशन की तारीफ की है। शुक्रवार को डब्लूएचओ ने स्वच्छता मिशन के तहत पूरे भारत को खुले में शौच करने की समस्या से मुक्त करने की मुहिम पर एक रिपोर्ट जारी की है।

डब्लूएचओ ने कहा है कि अगर भारत स्वच्छता मिशन को गंभीरता से लेता है और इसके प्रति 100 फीसदी यानी पूरी तरह से प्रतिबद्ध रहता है तो डायरिया और प्रोटीन एनर्जी मालन्यूट्रिशन (पीईएम) के कारण साल 2014 से अक्टूबर 2019 के बीच होने वाली तीन लाख से ज्यादा मौतों को रोका जा सकता है।

रिपोर्ट के मुताबिक ग्रामीण इलाकों में स्वच्छ भारत मिशन के लॉन्च होने के बाद से डायरिया से होने वाली करीब 1.8 लाख मौतों को रोका जा चुका है। आपको बता दें कि स्वच्छता मिशन मुख्य तौर पर टॉयलेट निर्माण और खुले में शौच करने की समस्या के निवारण करने पर फोकस करता है।

डब्लूएचओ ने स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण (एसबीएम-जी) का लोगों की हेल्थ पर क्या प्रभाव पड़ रहा है, इस पर एक स्टडी रिपोर्ट जारी की है, जिसमें यह कहा गया है कि खुले में शौच करने की समस्या से छुटकारा पाने के लिए भारत की तरफ से जो दृढ़ संकल्प दिखाया जा रहा है उससे डायरिया और पीईएम की समस्या पर अच्छा खासा प्रभाव पड़ रहा है और ये समस्याएं कम होने से मृत्यु-दर के साथ-साथ विकलांगता-समायोजित जीवन वर्ष (डेली [DALY]) भी कम हो रही हैं।

-हर साल डायरिया के करीब 199 मिलियन केस

डब्लूएचओ ने कहा,आकलन के मुताबिक अगर सभी स्वच्छता सेवाओं का उपयोग किया जाता है, तो ऐसे में सेहतमंद जिंदगी में 14 मिलियन से अधिक वर्ष बढ़ जाएंगे। पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय ने जानकारी दी है कि 2014 से पहले असुरक्षित सेनिटेशन के कारण हर साल डायरिया के करीब 199 मिलियन केस आते थे।

आपको बता दें कि मोदी सरकार के तहत 2 अक्टूबर 2014 को स्वच्छ भारत मिशन को लॉन्च किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य साल 2019 तक खुले में शौच की समस्या से लोगों को छुटकारा दिलाना था। इसके तहत 1.96 लाख करोड़ रुपए में 2019 तक 12 मिलियन टॉयलेट्स बनाने थे। अभी तक हरियाणा, केरल, गुजरात और हिमाचल प्रदेश को खुले में शौच मुक्त राज्य घोषित किया जा चुका है।

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