छत्तीसगढ़

चिकन पॉक्स से बचाव

कोरबा : छोटी माता (चिकन पॉक्स) एक वायरल संक्रमण तथा अत्यधिक संक्रामक बीमारी है। यह बीमारी वेरिसला – जोस्टर वायरस के कारण होती है। चिकन पॉक्स मुख्यतः दस साल से कम उम्र के बच्चों में पाये जाने वाला रोग है, लेकिन यह वयस्कों को भी प्रभावित करता है। इस बीमारी के कारण त्वचा पर भिन्न-भिन्न तरह की फुंसी, खुजली, थकान और बुखार होता है।

चिकन पॉक्स के लक्षण:- शरीर पर दाने, खुजली, अचानक बुखार आना, पीठ दर्द, सिर दर्द, भूख न लगना, कमजोरी महसुस करना इत्यादि।
कारण:- चिकन पॉक्स सक्रंमित व्यक्ति से असंक्रमित व्यक्ति में फैलता है। इसका संक्रमण खांसने या छीकने से फैलता है तथा बीमारी के कारण निकले दानों को छूने से भी फैलता है। आमतौर पर इस बीमारी के संपर्क में आने के बाद लगभग 10 से 21 दिनों में लक्षण प्रकट होते हैं।
निदान:- चिकन पॉक्स का निदान लक्षणों के आधार पर किया जा सकता है। बीमारी की प्रयोगशाला से पुष्टि के लिए त्वचा के दानों का सूक्ष्म परीक्षण तथा खून की जांच से की जा सकती है।

प्रबंधन:- चिकन पॉक्स के दौरान होने वाले खुजली से राहत पाने के लिये कैलेमाइन लोशन का उपयोग किया जा सकता है। छालों को खरोचने से बचें। दर्द से राहत के लिये दर्द नाशक दवाईयां जैसे कि पैरासिटामॉल ली जा सकती है। एंटीवायरल दवाईयां केवल चिकित्सक के परामर्श पर ही लेवें। रोगी को अधिक से अधिक मात्रा में तरल पदार्थों का सेवन करना चाहिए।

रोकथाम:- चिकन पॉक्स को रोकने का सबसे सुरक्षित उपाय टीकाकरण है। इसका टीका चिकित्सकीय सलाह पर बच्चों को दिया जाता है। पहली खुराक 12 से 15 माह के दौरान तथा दूसरी खुराक 04 से 06 वर्ष की उम्र में दी जाती है। बीमारी के फैलाव को रोकने हेतु पीड़ित मरीज को घर अथवा आसपास के बच्चों के संपर्क में आने से बचना चाहिए। सार्वजनिक कार्यक्रमों में जाने से बचें। बैक्टीरियल संक्रमण होने पर समुचित उपचार लिया जावे। ऐसी कोई भी स्थिति उत्पन्न होने पर स्वास्थ्य कार्यकर्ता या निकट के स्वास्थ्य केन्द्र में संपर्क करें ।

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