माहवारी स्वच्छता को लेकर सेनेटरी पैड के इस्तेमाल के लिए दिला रहीं संकल्प

मासिक धर्म गर्भावस्‍था को छोड़कर यौवन के आरंभ से रजोनिवृत्‍ति तक होता है।

रायपुर, 7 मार्च 2021। माहवारी स्वच्छता जागरुकता के लिए सेनेटरी पैड के इस्तेमाल के लिए राजधानी के सरोना की मितानिन सुमित्रा गेडाम अपने साथियों के साथ महिलाओं परम्परागत साधनों की जगह हाईजेनिक पेड के लिए प्रेरित कर रही हैं।

सुमित्रा गेडाम बताती है उनके साथ महिलाओं की टीम में चंद्रिका निषाद, हेमकांता निषाद व चंद्र किरण दिबे घर-घर पहुंच कर महिलाओं व किशोरी बालिकाओं की बैठक लेकर मासिक धर्म के प्रति भ्रांतियों को दूर कर जागरुक कर रही है। ‘माहवारी’ महिलाओं की एक जैविक प्रक्रिया है जिसमें प्रत्‍येक माह गर्भाशय से रक्‍त तथा अन्‍य पदार्थ प्रवाहित होता है। मासिक धर्म गर्भावस्‍था को छोड़कर यौवन के आरंभ से रजोनिवृत्‍ति तक होता है।

मितानिन सुमित्रा बताती हैं, माहवारी को लेकर अक्सर महिलाएं चर्चा नहीं करती हैं। ऐसे में वे माहवारी की पीड़ा से जुझती रहती है। पराम्परिक रुप से कपड़े के इस्तेमाल को लेकर साफ-सफाई के प्रति जागरुक नहीं होने से महिलाएं अंजाने में ही स्वास्थ्य संबंधी जरुरी सावधानियां नहीं रख पाती हैं। हाईजेनिक सेनेटरी पेड नहीं होने से अक्सर महिलाएं खुजलीव चर्मरोगों से ग्रसित हो जाती है।

मासिक धर्म (पीरियड्स) को लेकर वर्जनाएं और चुप्पी लंबे समय तक हमारे समाज का हिस्सा रही हैं लेकिन इस दिशा में अब अच्छे संकेत दिखने लगे हैं। समाज में लोग अब खुलकर इस बारे में बात कर रहे हैं। माहवारी स्वच्छता को लेकर सालभर से लगातार महिलाओं की बैठक लेकर अब तक 400 से अधिक हाईजेनिक सेनेटरी पेड के इस्तेमाल के लिए प्रेरित कर चुकी हैं।

आमतौर पर 70 फीसदी महिलाएं पारम्परिक रुप से माहवारी के प्रति जानकारी के अभाव में एक ही कपड़े को सालभर इस्तेमाल करती हैं। इसकी वजह से बच्चेदानी में इनफेक्शन, कैंसर, अनियमित माहवारी, बांझपन जैसी समस्याओं से जुझना पड़ता है,’’ सुमित्रा कहती है। सुमित्रा मितानिन होने के साथ ही समाज की अज्ञानता, परिवार की द्वारा उपेक्षित और कुरीतियां झेल रही महिलाओं के लिए भी काम करती है ।

बदलाव को तैयार महिला योद्धाओं की टोलियां

एक तरफ तमाम कवायदों के बीच बाल विवाह जैसी समस्याएं बेटियों के आगे बढ़ने की राह को रोक रही हैं तो दूसरी ओर राजधानी के महिला योद्धाओं की टोलियां सिर उठाती माहवारी में होने वाली समस्याओं को जड़ से खत्म करने हाईजेनिक सेनेटरी पेड का उपयोग खुद करते हुए दूसरों को इस्तेमाल करने का संकल्प दिला रही हैं।

मितानिन होने से शतप्रतिशत संस्थागत प्रसव, दो बच्चों की बीच तीन साल का अंतर, परिवार नियोजन के अस्थायी व स्थायी साधन का उपयोग, स्तनपान, शिशुओं की देखभाल, टीकाकरण, एनिमिया मुक्तव बच्चों के कुपोषण को दूर करने सहित महिलाओं के शाररिक व मानसिक समस्या होने पर जागरुक कर रही हैं। बाल विवाह की कुरीतियों को रोकने विवाह योग्य बेटियों की आदर्श सामुहिक विवाह कराने में भी योगदान दे रही है।

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