छत्तीसगढ़

शासकीय भूमि की कमी से जूझ रहा राजस्व, भूमाफियाओं व दलालों सक्रिय, बढ़ रहे अवैध अतिक्रमण

कोरबा जिले के पसान में शासकीय भूमि पर कब्जा चरम पर

पसान: कोरबा जिले के पसान में शासकीय भूमि पर कब्जा चरम पर हैं । ज्ञात हो कि वर्तमान में राजस्व विभाग शासकीय भूमि की कमी से जूझ रहा है जिसके चलते विकास कार्य ठप्प पड़े हैं। वहीं ग्राम के चारो तरफ अवैध कब्जे भी लगातार जारी है जिस वजह से प्रशासन को जनहित से जुड़ी सुविधाओं के लिए शासकीय भवनो के निर्माण को लेकर परेशानियां भी हो रही हैं । अवैध रूप से अतिक्रमण किया जा रहा है जिनमे से कई अतिक्रमण बड़े पैमाने पर है जिन्हें रोकने की प्रशासन को आवश्यकता है ।

मूलभूत निर्माणों के लिए नही राजस्व के पास भूमि

ज्ञात हो कि पसान में शासकीय निर्माण को लेकर भूमि की जब बात आती है तो काम वहीं रुक जाता है। भूमि की कमी की सवसे बड़ी वजह लगातार हो रहे कब्जे को बताया जा रहा है । पसान में अचानक बढ़ रहे आबादी के साथ अतिक्रमण ने भी सरकारी भूमि को खत्म कर दिया ।

प्रशासनिक कार्यवाही के अभाव में अवैध कब्जा बढ़ रहा है। ग्रामवासी बताते हैं कि ग्राम पसान मे ये आज का नहीं पुराना रीति रिवाज हैं। यहां कुछ दलाल नेता की आड़ में शासकीय भूमि को हडप कर किसी दूसरे को बेच देते हैं । ये बहुत ही गंभीर समस्या है।

इस पर शासकीय स्तर पर कार्यवाही होनी चाहिए। किंतु किसी प्रकार की कार्यवाही नही होने से दलाल लगातार सक्रिय है।

पसान स्कूल व दर्रीपारा की सरकारी भूमि पर भी हैं अवैध कब्जा

ज्ञात हो कि पसान स्कूल की भूमि जो कि रोड से लगी हुई है उस पर भी लगातार भूमाफियाओं द्वारा अवैध कब्जा किया जा रहा है । जिसकी शिकायत पूर्व में मंत्री स्तर तक सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा कई बार की जा चुकी हैं । जिसकी जाँच कुछ महीनों पूर्व पसान नायाब तहसीलदार राठिया द्वारा किया जा रहा था, मुख्य बात यह है कि जाँच तो किया जाता है किंतु परिणाम शून्य होता हैं , वही ग्रामीणों की माने तो लेनदेन करके हर बार मामलों को खत्म कर दिया जाता हैं व सरकारी भूमि पर कब्जा कर भूमाफिया अधिकारियों की मिलीभगत से करते है,

वही उच्च अधिकारियों को सभी जानकारी होने बाद भी कार्यवाही न करना प्रशासन व राजस्व अधिकारियों की मिलीभगत व उदासीनता को प्रदर्शित करता हैं

अतिक्रमण बना विकासकार्यों पर बाधा

पसान में भूमि ही प्रत्येक निर्माणों को लेकर विवादों में होती है । भूमि को लेकर जहां वन विभाग और राजस्व में खींच तान देखने को मिली वहीं अवैध कब्जे से शासन के पास भूमि खत्म होने की कगार पर है । इस कारण विकास कार्यों पर बाधाएं भी देखने को मिल रही है । इसके लिए भूमि ही सबसे बड़ी समस्या है । इसके अलावा अन्य छोटे बड़े निर्माण कार्य भी इसके चलते प्रभावित रहते हैं ।

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