छत्तीसगढ़

राइस मिल के बफाई पानी से जानवरों को हो रहा नुकसान

रवि सेन

बागबाहरा।

नगर के मध्य में स्थित शारदा राइसमिल है जिसमे प्रतिदिन लाखो लीटर पानी का उपयोग किया जाता है पानी के उपयोग करने के बाद राइसमिलर्स द्वारा इस पानी को टैंकर में डालकर शहर के अन्यत्र जगहों पर फेंक दिया जाता है जिसके चलते मवेशी इस पानी को पीते है और बीमार हो जाते है वही कई जानवर इस पानी को पीकर मर भी जाते है । मवेशियों के मरने से मवेशी पालको को हजारों रुपये का नुकसान होता है जिसकी भरपाई के लिए कोई सुनवाई नही होती है ।

राइसमिलर्स नियमतः नहीं फेंक सकते पानी

पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के नए कानून जल अधिनियम 33 के तहत राइसमिल के दूषित पानी के निष्पादन एवम चिमनियों से निकलने वाले धुंए के लिए नए तरीके से अत्याधुनिक यंत्र ई.टी.पी.(इनवायरमेंट ) मशीन लगाया जाना अनिवार्य है , ताकि राइसमिल के चिमनियों से निकलने वाले धुंए एवम दूषित पानी को रिसाइक्लिंग कर पुनः उपयोग में लाया जा सके ।

राइसमिलर्स के निर्देश पर फेंका जाता है दूषित पानी

शारदा राइसमिल में कार्यरत टैंकर चालक चिरोंज साहू निवासी जुनवानी कला के द्वारा बताया गया कि शारदा राइसमिल के मालिक दिलीप सेठ के कहने पर प्रतिदिन 4 से 5 टैंकर दूषित पानी फेका जाता है । चिरोंज साहू ने यह भी कहा कि कोई भी मवेशी को नुकसान पहुचता है तो हम छोटे कर्मचारी क्या कर सकते है जैसा मालिक का आदेश होता है वैसा काम करते है ।

डॉ. शोभाराम साव (पशु चिकित्सक सहायक संलग्न बागबाहरा) – राइसमिल के दूषित पानी मे पशुओं को अनेक प्रकार की बीमारियां होती है जिसमें लेमोनिया, पाचन में गड़बड़ी , पेट गड़बड़ी , फ़ूड पॉयजनिंग होती है । दूषित पानी पीने से मवेशियों की मौत भी हो सकती है।

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