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उपवास का उपहास

- श्याम वेताल

दलितों पर अत्याचार के खिलाफ उपवास पर बैठने वाले दिल्ली के कांग्रेसी नेताओं को अपने पेट पर अत्याचार करना गवारा नहीं हुआ. राहुल गांधी के साथ राजघाट पर अनशन में शामिल होने वाले दिल्ली के बड़े कांग्रेसी नेताओं का छोले – भठूरे खाते हुए चित्र वायरल हो गया. दिल्ली के कांग्रेसी नेता ने छोले – भठूरे भोज पर सफाई देते हुए कहा कि उपवास का समय सुबह साढ़े दस बजे से तय हुआ था. उसके पहले हम क्या करते हैं, क्या खाते हैं, इससे किसी को कोई मतलब नहीं होना चाहिए.

कांग्रेसी नेता के इस बयान से स्पष्ट है कि पार्टी ने यह ‘उपवास’ नेताओं पर थोपा था और दिए समय में ही उन्हें अपने पेट पर नियंत्रण रखना था. इसलिए उपवास के निर्धारित समय से पहले या बाद में खाने – पीने पर कोई रोक – टोक नहीं होनी चाहिए.

देश के राजनीतिक इतिहास में अनशन या उपवास की परंपरा गांधी ने शुरू की थी लेकिन ऐसा कभी सुनने को नहीं मिला कि गांधी ने उपवास शुरू करने से पहले जमकर पेट पूजा की हो. गांधी तो कई – कई दिनों तक अनशन पर बैठे. गांधी के बाद देश की राजनीति में अनशन और उपवास कर विरोध प्रदर्शन का क्रम चलता रहा.

बहरहाल, आज की राजनीति में उपवास का नया स्वरूप देखने को मिला. शायद इसलिए भाजपा ने इस ‘उपवास’ को ‘उपहास’ का नाम दिया है.

वैसे, उपवास धार्मिक भावनाओं के अनुसार भी करने की प्राचीन परंपरा है. इसके तहत, अन्न ग्रहण नहीं किया जाता है. कई उपवास तो निर्जल भी किए जाते हैं जिसमें अन्न और जल दोनों ग्रहण नहीं किए जाते हैं. कई हिंदू महिलाएं शिवरात्रि, छठ, करवा चौथ, वट – सावित्री व्रत निर्जल करती हैं. माना जाता है कि जब कोई भक्ति साधना में ईश्वर की प्रतिमा के पास बैठकर इतना लीन हो जाए कि भूख-प्यास का भान ही ना रहे तो उसे ‘उपवास’ कहते हैं.

जबकि राजनीतिक उपवास किसी मांग पर दबाव बनाने के लिए किया जाता है. इस उपवास में पूरी पवित्रता होने की संभावना कम होती है. परंतु अन्ना हजारे के उपवास पवित्र होते हैं क्योंकि अन्ना को राजनीति में जाने की कोई लालसा नहीं है.

दिल्ली कांग्रेस के नेताओं की ब्रेकफास्ट फोटो ने राहुल गांधी के अनशन कार्यक्रम की धज्जियां उड़ा दीं. बेहतर होता राहुल ये अनशन अकेले करते. समर्थन में कांग्रेसी भले उनके साथ बैठ जाते. यह अनशन या उपवास ज्यादा प्रभावी होता और खूब सुर्खियां बटोरता.

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