ज्योतिष

सही व्यापार की सही राह – कुंडली से जानें

ज्योतिष आचार्या रेखा कल्पदेव 8178677715, 9811598848

बदलने का नाम ही जीवन है, और जीवन रोज करवट बदलता है, जिससे हम सभी के जीवन की घट्नाओं में भी हर रोज बदलाव होता है। यह बदलाव हम सभी अपने दैनिक जीवन में सहजता से देख सकते है, इस बदलाव को महसूस कर सकते है।

संसार के चराचर होने के कारण मनुष्य मात्र, जीव, जन्तु और प्राणीमात्र सभी चराचर है। बदलाव मात्र जीवन में ही नहीं अपितु व्यक्ति के व्यवहार, व्यक्तित्व, कार्यक्षेत्र और विचारधारा में भी स्पष्ट रुप से देखा जा सकता है, अनुभव किया जा सकता है।

हमने अक्सर देखा है कि किसी व्यक्ति को कई वर्षों से जानते है, समझने का दावा भी करते है, परन्तु अचानक से उस व्यक्ति के व्यवहार में आने वाला परिवर्तन हमारी समझ से परे होता है। यही स्थिति जीवन की घट्नाओं में भी देखने में आती है।

कर्म व्यक्ति को जीने की वजह और जीने के साधन उपलब्ध कराता है। आजीविका का साधन ही उसके और उसके परिवार के पालन-पोषण में सहयोग करता है। इसे ही व्यापार कहा जाता है। आज जो व्यक्ति नौकरी में है वह भी यह अवश्य जानना चाहता है कि उसके लिए कौन सा व्यापार करना उत्तम रहेगा।

भले ही व्यापार करने की स्थिति में वह ना हो, परन्तु व्यापार का क्षेत्र जानने की जिग्यासा हम सभी को जीवन के किसी न किसी मोड़ पर अवश्य रहती है। कौन सा व्यापार, कौन सा व्यवसाय करना सही रहेगा, यह प्रश्न व्यवसायी और अव्यवसायी सभी के मन में होता है। सहजता से और उत्तम लाभ पाने की कामना से ही यह प्रश्न जन्म लेता है। ज्योतिष विद्या इस विषय में क्या कहती है आईये जानें-

जिस व्यक्ति की कुंडली में सूर्य सुस्थित हो, उच्चस्थ, मूलत्रिकोणस्थ, मित्रराशिस्थ, अतिमित्रराशिस्थ हो तो व्यक्ति में उत्तम आत्मविश्वास होता है और व्यक्ति व्यवसाय से लाभ उठाता है। इसके अतिरिक्त यदि सूर्य नवम भावस्थ हो, वर्गकुंड्लियों में बली हो तब भी व्यक्ति नौकरी की जगह व्यवसाय से लाभ कमाता है।

सूर्य के प्रभाव से व्यक्ति को स्वर्ण विक्रेता, देन-देन कार्य, वैदय आर्य, चिकित्सा कार्य आदि देता है। चंद्र का जन्मपत्री में सुस्थित होना, जैसे -उच्चादि राशि या वर्गोत्तम होना व्यक्ति को पानी से प्राप्त वस्तुओं के व्यापार से जोड़ता है।

व्यक्ति भावनाओं, प्रेम, स्नेह का प्रयोग कर व्यापार में सफल् होने का प्रयास करता है। सेवा से जुड़े क्षेत्रों में भी उसे व्यापारिक लाभ की प्राप्ति होती है। राजसहयोग से लाभ और द्रव्य वस्तुओं के व्यापार में व्यक्ति के सफल होने की संभावनाएं बनती है।

जन्मपत्री में यही स्थिति मंगल की हो अर्थात वह उच्च, वर्गोत्तम, मूलत्रिकोणस्थ, भाग्य भाव में हो तो व्यक्ति साहस से जुडे क्षेत्रों में लाभ प्राप्त करता है। उसके व्यापार की सफलता में पहल, उत्साह, ऊर्जा शक्ति, जोश और लिडरशीप गुणों की प्रमुखता होती है। ऐसे व्यक्ति को लेखन में भी कुशलता प्राप्त होती है।

प्रत्येक व्यक्ति जीवन की किसी न किसी मोड़ पर इस स्थिति में अवश्य में अवश्य होता है कि वह कौन सा कार्य करें? यह निर्धारित करने में जन्मपत्री महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। प्रत्येक व्यक्ति में अलग-अलग कार्य करने की योग्यता होती है, उसकी कार्यक्षमताएं भी अलग अलग होते है।

जीवन की परिस्थितियां और सामार्थ्य भी अलग अलग होता है। और कार्यक्षेत्र में अपना सामर्थ्य लगाने के साधन भी अलग अलग होते है। विवाह निर्णय के बाद कार्यक्षेत्र का सही निर्णय लेना जीवन को पूरी तरह से बदल कर रख सकता है।

जिस प्रकार एक गलत व्यक्ति से विवाह आपके जीवन को स्वर्ग बना सकता है और एक गलत व्यक्ति से विवाह जीवन को नरक भी बना सकता है। ठीक इसी प्रकार कार्यक्षेत्र का निर्धारण अगर गलत हो तो व्यक्ति को हानि के साथ साथ जीवन में असफलता, निराशा और हताशा का सामना भी करना पड़ता है। कुंडली एक मात्र ऐसा साधन है जो हमें जीवन में सही मार्ग का चयन करने में पूर्ण सहयोग करती रही है।

जन्मकुंडली का लग्न भाव, लग्नेश, दशम

जन्म पत्रिका का लग्न, लग्नेश, दशम भाव तथा दशमेश उन पर विभिन्न ग्रहों का प्रभाव हमें उचित व्यवसाय चुनने में सहायता करते हैं। व्यवसाय को चयन करने के लिए आप पहले यह देखे कि सब से ज्यादा ग्रह कौन सी राशि में है।

चर, स्थिर या द्विस्वभाव राशियों की प्रकृति के अनुसार व्यवसाय का निर्धारण कर सकते है। चर राशियां 1,4,7,10 राशियां है। स्थिर राशियां 2,5,8,11वां राशियां है। और 3,6,9,12 राशियां द्विस्वभाव राशियां है।

चर राशियां और व्यवसाय

चर राशियां में दशमेश हो या स्थिर राशियों में अधिक ग्रह स्थित हों तो व्यक्ति अपनी चतुराई, युक्ति, निपुणता और अपने सामर्थ्य का प्रयोग कर व्यवसाय का चुनाव करता है। ऐसा व्यक्ति थोड़ी परेशानी होने पर ही व्यवसाय में बदलाव का सोचने लगता है। परिवर्तन करने का निर्णय जल्द लेता है। कभी एक तो कभी दूसरे व्यवसाय में भाग्य आजमाता है। चलायमान प्रकॄति के व्यवसाय में उसकी रुचि होती है।

स्थिर राशि और व्यवसाय

नौ में से अधिकतर ग्रह यदि स्थिर राशियों में हो तो व्यक्ति धैर्य, एकाग्रता, सहनशीलता, दृढ़ निश्चय तथा चिंतन मनन करने के बाद ही अपने व्यवसाय का चयन करता है। ऐसा व्यक्ति एक बार जिस व्यवसाय का चयन कर लेता है, उसमें बार बार बदलाव नहीं करता है।

परेशानियां, दिक्कतें आती भी है तो उन्हें भी स्वीकार कर सुधार कर सफल होने का प्रयास करता है। ऐसे व्यक्ति को सामान्यत: सेवाक्षेत्रों से जुड़ा व्यवसाय करने में सफलता हासिल होती है। इसके अतिरिक्त वह अध्यापक, प्रोफेसर, आढ़तिया एवं किराना आदि का व्यवसाय भी कर सकता है। व्यवसाय दीर्घकालीन होता है परन्तु व्यक्ति का व्यवसाय विस्तृत रुप का होता है इसलिए जातक को एक शहर से दूसरे शहर भी जाना पड़ता है।

द्विस्वभाव राशि और व्यवसाय

द्विस्वभाव राशि में जब अधिक ग्रह हों तो व्यक्ति को लेन-देन, बौद्धिक कार्यों और आयात-निर्यात जैसे व्यवसायों में सफलता मिलती है। इस योग का जातक बहुत बुद्धिमान होता है। द्विस्वभाव राशियों के विषय में पाराशरी और जैमिनी पद्वतियों के नियम कुछ भिन्न है। जैमिनी पद्वति में द्विस्वभाव राशियों को सबसे उत्तम माना गया है।

आईये अब इन योगों को कुंड्ली विश्लेषण के माध्यम से समझते हैं-

04-02-1963, 23-15, सुनाम पंजाब
कुंड्ली विश्लेषण

इस जन्म विवरण से निर्मित जन्मपत्री में कन्या लग्न उदित हो रहा है। चंद्र मिथुन राशि में दशम भाव में स्थित हो। शुक्र और बुध मिथुन राशि चतुर्थ भाव। शनि, सूर्य और केतु पंचम भाव में स्थित है। गुरु छ्ठे भाव में है। मंगल और राहु एकादश भाव में स्थित है।

इस प्रकार इस जातक की कुंडली में चर राशियों में पांच ग्रह है और द्विस्वभाव राशियों में तीन ग्रह स्थित है। चर राशियों के अनुसार कार्यक्षेत्र चयन का नियम यहां लागू होता है। इस जातक ने शुरु में जनरल स्टोर का कार्य शुरु किया। इसके लिए यह एक शहर से दूसरे शहर अपडाउन भी करता रहा।

सामान कम और थोक मूल्य पर लाने के लिए यह दूरदराज भी जाता रहा। तथा वस्तुएं थोक में खरीदकर फुटकर में बेचता रहा। बीच में इसने कार्य में परेशानियों के चलते व्यवसाय बदलने का भी प्रयास किया परन्तु निर्णय क्षमता कमजोर होने के कारण यह फिर से इसी व्यवसाय में आ गया।

आईये अब तत्वों से व्यवसाय चयन करने का प्रयास करते हैं-

लग्न भाव में कौन से तत्व की राशि है? यह जानना सर्वप्रथम आवश्यक है। आगे बढ़ने से पूर्व तत्वों पर विचार कर लेते हैं-

अग्नि तत्व से युक्त ग्रह सूर्य और मंगल है और अग्नि तत्व राशियों में मेष, सिंह और धनु राशि आती है। अग्नि तत्व से युक्त जातक महत्वाकांक्षी तथा प्रगतिशील विचारों से युक्त होते है। स्वतंत्र होकर कार्य करना पसंद करते हैं। स्वावलंबी होते हैं और अधीनता, दबाव में कार्य नहीं करते हैं।

भूमि तत्व में बुध ग्रह आता है और राशियों में वॄषभ, कन्या और मकर राशि आती है। भूमि तत्व राशियों से युक्त व्यक्ति धैर्य रखने वाला और शारीरिक श्रम करने वाला होता है। यह तत्व व्यक्ति को अंतरिक्ष संबंधी विषयों से जोड़ता है।

जल तत्व

जलतत्व ग्रहों में शुक्र और चंद्र आते है और राशियों में कर्क, वॄश्चिक और मीन राशि आती है। जल तत्व का प्रभाव व्यक्ति में हो तो व्यक्ति अस्थिर स्व्भाव का होता है। संपूर्ण जीवन में वह कई कार्यों में हाथ आजमाता है। वह व्यवसाय मौसम आधारित या चलायमान या गतिशील स्वभाव का होता है। इसमें जल संबंधी कार्यक्षेत्र भी आते है। तरल पदार्थों से जुड़े पदार्थों के व्यवसायिक क्षेत्र भी आते है।

आकाश तत्व

आकाश तत्व में गुरु ग्रह है। गुरु और गुरु ग्रह से जुड़े सभी कार्यक्षेत्र इसके अंतर्गत आते है। सलाहकार्य, न्याय कार्य, प्रबंध कार्य आदि इनके व्यवसायिक कार्य है।

व्यवसाय चयन के विशेष सूत्र

• कन्या लग्न द्विस्वभाव लग्न है। बुध ग्रह के स्वामित्व की राशि लग्न भाव में होने के कारण व्यक्ति में व्यापारिक गुण जन्मजात है। बुध ग्रह को मिथुन और कन्या दो राशियों का स्वामित्व प्राप्त है।

• इसमें भी मिथुन लग्न के जातकों में अधिक आयु में भी बचपना देखा जाता है अर्थात परिपक्वता की कमी देखी जाती है और कन्या लग्न के जातक अपनी आयु से अधिक परिपक्वता रखते है। ऐसे में इस व्यक्ति ने अपनी आयु से अधिक परिपक्वता दिखाते हुए, निर्णय लिए।

• लग्न में स्थिति कन्या राशि भूमि तत्व की प्रकॄति में से एक राशि होने के कारण इस व्यक्ति का कार्यक्षेत्र चावल आदि वस्तुओं से संबंधित अधिक है, ऐसी वस्तुएं जो भूमि से प्राप्त होती है। इसी तत्व ने इसे धैर्य भी दिया।

• नौकरी या व्यवसाय दोनों में किसका चयन किया जाए? इसका निर्धारण जन्म पत्री में शनि किस राशि में स्थित है। इसके द्वारा यह निर्धारित किया जाता है। शनि यदि मकर, कुम्भ या तुला राशि में स्थित हो तो व्यक्ति को व्यवसाय करना चाहिए, ना कि नौकरी।

• इसके विपरीत यदि शनि नीचाभिलाषी हो, मेष, वृषभ, मिथुन, कर्क, सिंह राशि, वॄश्चिक राशि में स्थित हो तो व्यक्ति को नौकरी के क्षेत्र में ही कार्य करने का प्रयास करना चाहिए।

• इसके अतिरिक्त नौकरी या व्यवसाय का चयन करने के लिए लग्न भाव, लग्न भाव के स्वामी, नवम भाव और नवम भाव के स्वामी, दशम भाव और दशम भाव के स्वामी एवं एकादश भाव और एकादश भाव के स्वामी पर शुभ अथवा पाप ग्रहों के प्रभाव का विचार किया जाता है। पापी ग्रह इन्हें प्रभावित कर रहें हों तो नौकरी करने की अधिक संभावनाएं बनती है।

• इसी प्रकार केंद्र या त्रिकोण भाव में शुभ ग्रह न हो तो तब भी नौकरी करने के योग अधिक बनते है।

• व्यक्ति की आयु 35 से कम अर्थात 21 से 35 के मध्य हो तो उसके नौकरी करने की संभावनाएं बनती है। पृथ्वी तत्व व जल तत्व राशियों में अधिक ग्रह होने पर व्यक्ति नौकरी कर आजीविका चलाता है।

• कर्म भाव में सूर्य, मंगल अथवा शनि इन में से कोई दो ग्रह स्थित हों और कोई भी शुभ ग्रह ना देखता हो तो व्यक्ति नौकरी करता है। पाप ग्रहों का दशम भाव पर प्रभाव हो तो व्यक्ति सरकारी क्षेत्र में नौकरी करता है।

• दशमेश व लग्नेश की युति (किसी भी भाव में) हो तो जीविका क्षेत्र में जातक परिश्रम व निज के प्रयासों से उन्नति करता है।

व्यवसाय के योग
• 21 से 35 वर्ष की आयु में यदि जातक को दशमेश, योगकारक ग्रह या राजयोग निर्मित होने वाले ग्रहों की दशा प्राप्त होती है तो व्यक्ति किसी बड़े व्यापार का कार्यभार संभालता है।

• अग्नि तत्व राशियों में अधिक ग्रह होने पर भी व्यक्ति नौकरी की जगह व्यापार में रुचि लेता है।

• नवमेश का दशमेश से और द्वितीयेश का एकादशेश से संबंध हो तो व्यक्ति को व्यापार में सफलता मिलती है।

• त्रिकोणेश केंद्र भाव में हो और केंद्रेश त्रिकोण भाव में स्थित, शनि उच्चस्थ होकर द्शम भाव में हो तो व्यक्ति व्यापार करता है।

• व्यापार का कारक ग्रह बुध यदि उच्चस्थ होकर सप्तम भाव में स्थित हो तो व्यक्ति बड़े पैमाने पर व्यापार करता है।

• बुध का धनेश, एकादशेश और सप्तमेश से संबंध व्यक्ति को व्यापार में लेकर जाता है।

चंद्र युति और व्यवसाय

ऐसे व्यक्ति धनी व सुखी देखे गए हैं। उनको सरकार से लाभ मिलता है। शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े व्यक्ति भी इसी श्रेणी में पाए गए हैं। मंगल युति फल: प्रायः ऐसे व्यक्ति वह कार्य करते हैं, यहां पर साहस की आवश्यकता पड़ती है। ऐसे व्यवसाय जहां पर आग, चीरफाड़, शस्त्र आदि का संबंध है।

ट्रेन, इंजन के ड्राईवर या होटलों के रसोइये भी इसी श्रेणी में आते हैं। बुध युति फल: ऐसे व्यक्ति व्यापार द्वारा या फिर कला के द्वारा शिक्षा के क्षेत्र से या फिर अपनी बुद्धि द्वारा धन कमाते हैं। बुध यदि आत्मकारक ग्रह हो तो वह उच्च पद पाता है। कई आई।ए।एस।, इंजीनियर, डाॅक्टर या व्यापारी, इनकी कुंडलियों में प्रायः बुध ही आत्मकारक ग्रह होता है।

गुरु युति फल: ऐसे व्यक्ति धार्मिक प्रवृत्ति के होते हैं। इन्हें वेद शास्त्रों का ज्ञान होता है। कई वकील, जज, प्रोफेसर आदि की कुंडली में यह देखा गया है। यदि गुरु के साथ युति होती है तो व्यक्ति उच्च पद पाता है। विद्या द्वारा या फाइनेंस द्वारा धन कमाते हैं। कई बैंक एवं चार्टेड अकाउटेंट की कुंडली में यह देखा गया है।

शुक्र युति और व्यवसाय

ऐसे व्यक्ति बड़े अफसर, कलाकार या राजनीतिज्ञ होते हैं। इन व्यक्तियों का महिलाओं से संबंध होता है। शनि युति फल: ऐसे व्यक्ति अपने क्षेत्र में उच्च स्थान अवश्य पाते हैं। ऐसे व्यक्ति यदि व्यापारी होते हैं तो बहुत बड़े उद्योगपति होते हैं, यदि लेखक होते हैं तो बहुत प्रसिद्ध लेखक होते हैं।

कई वैज्ञानिक भी इसी श्रेणी में देखे गए हैं। राहु केतु युति फल: यह व्यक्ति प्रायः व्यापार करते पाए गए हैं, ऐसे व्यक्ति बुरे कामों द्वारा धन कमाते हैं। झूठ बोलकर या चोरी द्वारा भी धन कमाते देखा गया है। प्रायः रसायन, जहरीले पदार्थों, एंटीबायटिक्स या धातुओं से इनका संबंध होता है।

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