सड़क हादसे रोकने के लिए उपाय ढूंढेगी रोड सेफ्टी सेल

- पीएचक्यू ने जारी किया फरमान

बिलासपुर।

सड़क हादसों को रोकने के लिए रोड सेफ्टी बॉडी का गठन करने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के परिपालन में पीएचक्यू (पुलिस हेड क्वार्टर) ने फरमान जारी किया है। बिलासपुर जिले के सभी 20 थाना क्षेत्रों में रोड सेफ्टी बॉडी का गठन कर दुर्घटनाओं को रोकने के उपाय करने के निर्देश दिए गए हैं।

सड़क पर निर्माण संबंधी कार्य पीडब्ल्यूडी, एनएच, निगम और राज्य मार्ग प्रधिकरण से करवाने के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस मुख्यालय ने जिले के 6 थानों को संदेवनशील मानते हुए थाना प्रभारियों को विशेष दिशा निर्देश दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने देश भर में प्रत्येक 3 मिनट में 1 व्यक्ति की सड़क हादसे में मौत होने के मामले में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए फरवरी 2018 में केन्द्रीय गृह मंत्रालय, परिवहन और राज्य के मुख्य सचिवों को रोड सेफ्टी बॉडी का गठन करने का आदेश जारी किया था।

आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि रोड सेफ्टी बॉडी में पुलिस, पीडब्ल्यूडी, स्वास्थ्य, नेशनल हाइवे, नगर निगम और ट्रैफिक पुलिस के अधिकारियों को शामिल किया जाए। यह बॉडी सड़क हादसे रोकने के लिए उपाय करेगी। इसके परिपालन में पीएचक्यू ने प्रदेश के सभी जिले के पुलिस अधीक्षकों को आदेश जारी कर थाना स्तर पर रोड सेफ्टी सेल का गठन करने के आदेश दिए हैं।

थाना स्तर पर बनने वाली रोड सेफ्टी सेल में 1 थाना प्रभारी, 1 हवलदार और 1 आरक्षक को शामिल करने कहा गया है। सेल को डेंजर जोन का चिन्हांकन करने के बाद दुर्घटनाओं को रोकने के लिए उपाय करने के निर्देश दिए गए हैं।

-प्रदेश के 80 थानों की सूची में जिले के 6 थाने शामिल

प्रदेश में 80 ऐसे थाने हैं, जहां नियमित रूप से सड़क दुर्घटनाओं में लोगों की मौतें हो रही हैं। पीएचक्यू ने इन थाना क्षेत्रो में वर्ष 2017 में मौतों के अनुसार सूची बनाई है, जिसमें बिलासपुर जिले के 6 थाने शामिल हैं। इनमें चकरभाठा थाना सूची में 35 वें स्थान पर है। यहां वर्ष 2017 में 87 हादसों में 26 की मौत हुई, और 53 लोग घायल हुए हैं।

इसी प्रकार 38 वें स्थान पर रतनपुर थाना है, जहां 92 हादसों में 24 की मौत और 57 घायल हुए हैं। 45 वें स्थान पर मस्तूरी थाना है। यहां 84 हादसों में 22 की मौतें और 59 घायल हुए हैं। 64 वें स्थान पर तखतपुर थाना है, यहां 46 हादसों में 20 की मौतें और 43 घायल हुए हैं। 68 वें स्थान पर कोनी थाना है, यहां 60 हादसों में 19 की मौतें और 43 व्यक्ति घायल हुए हैं। वहीं 72 वें स्थान पर कोटा थाना है, यहां 50 हादसों में 18 की मौतें और 26 व्यक्ति घायल हो चुके हैं। चकरभाठा, कोनी, रतनपुर, मस्तूरी, तखतपुर और कोटा थाना प्रभारियों को सड़क हादसे रोकने के लिए 17 अगस्त को पीएचक्यू में विशेष प्रशिक्षण दिया गया।

-जिला स्तरीय रोड सेफ्टी सेल का गठन

पीएचक्यू ने थाना स्तर पर रोड सेफ्टी सेल के अलावा जिला स्तर पर रोड सेफ्टी सेल का गठन करने का फरमान जारी किया है। इसमें पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को शामिल किया गया है। थाना स्तर पर बने सेल के प्रभारी डेंजर जोन की जानकारियां जिला स्तरीय सेल के समक्ष रखेंगे। दुर्घटनाओं के कारणों को विश्लेषण कर प्रभारी हादसे रोकने के उपाय करेंगे।

-रोड सेफ्टी सेल को दिए गए काम

1. जिल स्थानों पर दुर्घटनाएं अधिक हो रही हैं, वहां का मौका मुआयना कर दुर्घटनाओं के कारणों का पता लगाना। कारणों का उपाय ढूंढने विश्लेषण करना। 2. सड़क हादसे रोकने के लिए प्रभारी कार्रवाई करना। जैसे सड़क पर ब्रेकर, स्टॉपर, गड्ढों को भरना। 3. जिला स्तरीय रोड सेफ्टी सेल के साथ मिलकर थाना स्तर सेल के सदस्य सामूहिक रूप से विश्लेषण करेंगे।

4. दुर्घटना होने पर मौके का सर्वेक्षण, केस स्टडी करना, मौके का वीडियो और फोटो लेकर दुर्घटनाएं रोकने के उपाय करना। 5. जिले में यातायात शिक्षा का प्रचार-प्रसार करना। थाना स्तर और जिला स्तर पर बनी सेल हर महीने जागरूकता अभियान चलाना।

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