अंतर्राष्ट्रीय

बगैर कैप्टन के समुद्र में तैरेगी रोबोटिक कार्गो शिप

हवा में मानव रहित ड्रोन और सड़कों पर स्वचालित कार के बाद अब वैज्ञानिक 2018 तक ऑटोमेटिक कार्गो शिप समुद्र में उतारने जा रहे हैं। नॉर्वे में विकसित हुई इस कार्गो शिप को बगैर किसी इंसानी सहायता के चलाया जाएगा। नॉर्वे के वैज्ञानिकों ने इस माल वाहक पानी के जहाज को समुद्र में तैरने वाले एक बड़े रोबोट की संज्ञा दी है। उनका दावा है कि इस जहाज के विकसित होने के बाद समुद्री वातावरण में प्रदूषण का स्तर भी कम किया जा सकेगा।

हाईक्वालिटी सेंसर से सुरक्षा
समुद्र में तैरते जहाज को सुरक्षा देने के लिए वैज्ञानिकों ने इसमें हाई-क्वालिटी सेंसर सिस्टम लगाया है। DYSS26T प्रोग्राम पर आधारित सेंसर प्रणाली खराब मौसम की जानकारी जहाज को दो घंटे पहले प्रदान कर देती है। यह जहाज के रास्ते में आने वाले दूसरे जहाजों और कश्तियों के अलावा समुद्री ग्लेशियर की भी जानकारी आधे घंटे पहले देने में सक्षम है। यह सेंसर प्रणाली जहाज को खुद अपना वैकल्पिक रास्ता तलाशने में भी मदद करती है।

जीपीएस दिखाएगा रास्ता
जहाज में लगे जीपीएस सिस्टम की मदद से यह समुद्री तूफान में भी अपना रास्ता नहीं भटकेगा। जहाज को बनाने वाले नॉर्वे के वैज्ञानिक जैफर्ड क्लू के अनुसार इसमें चारों ओर 81 कैमरे लगे हुए है। इन कैमरों में नैनो तकनीक के आधार पर माइक्रोलेंस का उपयोग किया गया है। यह कैमरे बेहद खराब रोशनी में भी जहाज को रास्ता दिखाने का काम करते हैं। इसमें लगी हाइटेक कंप्यूटर प्रणाली को एक बार एक्टिव करने पर यह जहाज लगातार पांच हजार मील तक यात्रा कर सकता है।

प्रदूषण की होगी रोकथाम
मानव रहित समुद्री विमान से 90 फीसदी तक ईंधन की बचत होती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि पूरी तरह से कंप्यूटर प्रणाली पर चलने वाले इस विमान में सोलर प्लेट्स की सहायता से ऊर्जा पैदा होती है। ऐसे में ईंधन का प्रयोग बेहद कम होने से समुद्री वायुमण्डल में प्रदूषण का स्तर घटेगा। इस तरह से वायु, ध्वनि और जल प्रदूषण से समुद्र को बचाया जा सकेगा। मानव रहित पानी के जहाज को बनाने में 25 मीलियन डॉलर की लागत आई है।

सी-हंटर का भी चल रहा परीक्षण

नॉर्वे के माल वाहक जहाज जहां अगले वर्ष समुद्र में उतरने की तैयारी कर रहा है वहीं अमेरिका का युद्धक विमान सी-हंटर का भी परीक्षण चल रहा है। 2019 तक अमेरिका सी-हॉक विमान का परीक्षण करेगा। डिफेंस एडवांस्ड रिसर्च प्रोजेक्ट्स एजेंसी (डारपा) अमेरिका की नौसेना के साथ मिलकर इस पर प्रयोग कर रही है। सैन डियागो के तट पर होने वाले परीक्षण में देखा जाएगा कि यह जहाज अन्य जहाजों से कैसे पेश आता है। इसी तरह जापान और चीन भी वर्ष 2025 तक स्वचालित माल वाहक जहाज बनाने की तैयारी कर रहा है।

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