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पत्नी के गहने बिके-बेटी का स्कूल छूटा, बॉक्सर रोशन का हौसला नहीं टूटा

भारतीय खेलों में संघर्ष की यूं तो अनगिनत कहानियां हैं, जो हमें हैरान करती हैं. साथ ही कुछ कर गुजरने का हौसला भी देती हैं. त्रिनिदाद के बुद्धिजीवी सीएलआर जेम्स ने कहा था कि खेल शून्यता में नहीं खेला जाता, यह समाज का आईना बनकर हमारे सामने आता है.

रोशन नथेनियल भारतीय मुक्केबाजी में एक जाना पहचाना नाम हैं. जो पिछले चार साल से देश के लिए प्रोफेशनल मुक्केबाज तैयार करने में जुटे हैं.

 

एक मुक्केबाज से लेकर कोच बनने तक का सफर रोशन के लिए कभी आसान नहीं रहा. खिलाड़ी के तौर पर बॉक्सिंग छोड़ने के बाद रोशन ने दिल्ली में वुड वर्किंग इंडस्ट्री में बीस हजार रुपये की नौकरी शुरू की.

जिंदगी आसानी से चल रही थी. पर रोशन पर  कुछ और कर गुजरने का जुनून सवार था. वो 10 से 5 की नौकरी से ऊबने लगे. अपने पहले प्यार बॉक्सिंग के लिए उन्होंने नौकरी छोड़ दी और खुद को दोबारा बॉक्सिंग रिंग में उतार दिया.

रोशन के गुरु और देश के पहले प्रोफेशनल मुक्केबाज धर्मेंद्र सिंह यादव ने उन्हें सलाह दी कि अगर जिंदगी में कुछ हासिल करना है, तो वो रास्ता बॉक्सिंग से ही निकलता है. फिर क्या था अपने गुरु की बात मानी और निकल पड़े रोशन बेहद मुश्किल रास्ते पर.

रोशन इंडियन बॉक्सिंग काउंसिल से जुड़े और प्रोफेशनल मुक्केबाजों को ट्रेनिंग देने लगे. एक साल तक बिना सैलरी लिए उन्होंने कड़ी मेहनत की. लेकिन बिना पैसे के काम करने का असर उनकी निजी जिंदगी पर पड़ने लगा.

घर चलाना बेहद मुश्किल हो गया. पत्नी कुलसुम को घर चलाने के लिए अपने गहने बेचने पड़े, नाते-रिश्तेदारों से पैसे उधार लेने पड़े. बेटी को प्राइवेट स्कूल से निकाल कर सरकारी स्कूल में डालना पड़ा.

घर का किराया देना मुश्किल हो गया. जिंदगी मुश्किल दौर से आगे बढ़ती रही. इस उम्मीद के साथ अच्छे दिन जरूर आएंगे. इस बुरे वक्त में कुलसुम पति रोशन के साथ डटकर खड़ी रहीं. जिंदगी से दो-दो हाथ करती रहीं और हौसला बढ़ाती रहीं.

बॉक्सिंग के लिए जुनून रखने वाले रोशन नथेनियल ने अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया. उन्होंने प्रदीप खरेरा, कुलदीप डांडा, धर्मेंद्र, सचिन और सागर नर्वत जैसे प्रोफेशनल मुक्केबाज देश के लिए तैयार किए.

प्रोफेशनल बॉक्सर तैयार करना और उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फाइट दिलाने के लिए काफी पैसों की जरूरत होती है. तमाम चुनौतियों के बावजूद रोशन देश को मुक्केबाजी की दुनिया में नई पहचान दिलाने में जुटे हैं.

उम्मीद की जा रही है कि कड़ी मेहनत से रोशन न सिर्फ देश को नई पहचान देंगे, बल्कि अपने परिवार को अच्छी जिंदगी देने में भी कामयाब रहेंगे.

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