भविष्य के भारत’ पर चर्चा के लिए राहुल गांधी को न्योता भेजेगा RSS

नई दिल्ली।

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को अपने कार्यक्रम में आने का न्योता भेज सकता है।यह कार्यक्रम 17 से 19 सितंबर के बीच होगा। बताते चलें कि इससे पहले पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और टाटा ग्रुप के रतन टाटा को भी संघ अपने कार्यक्रम में आने का न्योता दे चुका है।

बताते चलें कि राहुल गांधी समय-समय पर संघ और उसकी कार्य प्रणाली पर सावाल उठाते रहते हैं। हाल ही में राहुल गंधी ने जर्मनी में कहा था- भाजपा और आरएसएस के लोग देश को बांटने और नफरत फैलाने का काम कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस भारत के लोगों को जोड़ने का काम करती है। इतना ही नहीं, राहुल गांधी ने संघ की तुलना मिस्र के आतंकी संगठन मुस्लिम ब्रदरहुड से की थी।

इस बीच सूत्रों के हवाले से खबर आ रही है कि राहुल गांधी और सीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी सहित विपक्ष के कई नेताओं को संघ 17 सितंबर से 19 सितंबर के बीच दिल्ली में होने वाले अपने कार्यक्रम में आने का न्योता भेज सकता है। बताते चलें कि जर्मनी में राहुल गांधी की टिप्पणी पर आरएसएस ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी।

संघ ने कहा है कि राहुल एक बार शाखा आ जाएं, तो उन्हें देश की आत्मा का ज्ञान हो जाएगा। आरएसएस प्रवक्ता राजीव तुली ने कहा था कि आखिर उन्हें बार-बार आरएसएस का सपना क्यों आता है। उन्हें इसकी चिंता छोड़ अपनी पार्टी की चिंता करनी चाहिए।

तुली ने कहा कि कांग्रेस की आज सिर्फ 44 सीटें हैं, ऐसा ही रहा, तो अगले चुनावों में उनकी स्थिति और भी खराब हो जाएगी। राजीव ने कांग्रेस नेताओं और राहुल को संघ की शाखा में आने का न्योता भी दिया था।

प्रणब के जाने पर गर्माई थी राजनीति

बताते चलें कि इससे पहले सात जून 2018 को संघ ने पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को नागपुर में हुए अपने कार्यक्रम में आने का न्योता दिया था। उस वक्त भी राजनीतिक हलकों में इस पहल को लेकर अटकलों का बाजार गर्म था क्योंकि प्रणब मुखर्जी पहले कद्दावर कांग्रेसी नेता रहे थे।

माना जा रहा था कि वह संघ के कार्यक्रम में नहीं जाएंगे, लेकिन न सिर्फ मुखर्जी ने कार्यक्रम में हिस्सा लिया, बल्कि कहा कि वह राष्ट्र, राष्ट्रीयता और देशभक्ति पर अपनी राय आपके सामने रखना चाहते हैं।

तब मुखर्जी ने कहा था कि अगर हम भेदभाव, नफरत करेंगे, तो हमारी पहचान को खतरा पैदा हो जाएगा। हम अलग अलग सभ्यताओं को शामिल करते रहे हैं। विजयी होने के बाद अशोक शांति के पुजारी थे। व्हेनसांगऔर फाह्यान ने हिंदू धर्म की बात कही थी। सबने कहा हिंदू एक उदार धर्म है। देश के प्रति समर्पण ही देशभक्ति है और भारत का राष्ट्रवाद वसुधैव कुटुंबकम से प्रेरित है।

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