आरटीआई ने किया खुलासा, पीएम मोदी के चाय बेचने का नहीं है कोई रिकार्ड

कांग्रेस समर्थक और सामाजिक कार्यकर्ता ने मांगा था रिकार्ड

नई दिल्ली :

कांग्रेस समर्थक और सामाजिक कार्यकर्ता तहसीन पूनावाला ने आरटीआई से यह रिकार्ड मांगा था की क्या देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बचपन में रेलवे प्लेटफार्म या ट्रेनों में चाय बेचते थे।

जिसके बाद इस बात का आरटीआई ने किया खुलासा किया की ऐसा कोई रिकॉर्ड नहीं है जो यह साबित कर सके कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बचपन में रेलवे प्लेटफार्म या ट्रेनों में चाय बेचते थे।

आईएएनएस के अनुसार, इस आरटीआई के जवाब में रेल मंत्रालय ने कहा, “रेलवे बोर्ड के पर्यटन और खानपान निदेशालय की टीजी ब्रांच में ऐसी किसी तरह की जानकारी उपलब्ध नहीं है।

”दरअसल, नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2014 के लाेकसभा चुनाव के समय खुद को एक ‘चाय वाला’ बताया था। उन्होंने कहा था कि बचपन में वे स्टेशन पर और ट्रेनों में चाय बेचते थे। चुनाव के बाद भी वे अक्सर खुद को चाय वाले के रूप में दिखाते रहे।

हाल ही में पीएम मोदी ने एक ट्वीट किया था, “कांग्रेस को अभी भी हैरानी है कि एक चायवाला पीएम बन गया! और, कांग्रेस की पीड़ा का कारण यह भी है कि चार पीढ़ियों ने जो जमा किया था, वो पैसा अब कुछ परिवारों के लिए नहीं, बल्कि जनता के विकास के लिए खर्च हो रहा है।”

बता दें कि कुछ दिनों पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बचपन से जुड़ी बातों को लेकर एक फिल्म ‘चलो जीते हैं’ रिलीज हुई थी। इस फिल्म को राष्ट्रपति भवन से लेकर मोदी के संसदीय क्षेत्र बनारस के सरकारी विद्यालयों में भी दिखाया गया।

32 मिनट की इस फिल्म में एक ‘नारू’ नाम के बच्चे का किरदार है, जो अपनी जिंदगी में काफी संघर्ष करता है। फिल्म देखने के बाद केंद्रीय मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठोर ने कहा था, “यह पीएम मोदी के बचपन की घटनाओं से अद्भुत और प्रेरित करने वाला फिल्म है।”

कांग्रेस नेता और पूर्व कानून मंत्री ने यहूदियों से कर डाली ब्राह्मणों की तुलनाट्विटर के सीईओ जैक डोरसी हाल ही में भारत दौरे पर आए थे। उनका यह दौरा उस वक्त विवादों में आ गया, जब एक कार्यक्रम में कुछ महिला पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ उनकी एक तस्वीर सामने आयी।

भाजपा राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति के सदस्य और त्रिपुरा के प्रभारी सुनील देवधर ने ट्वीटर पर लिखा था, “चलो जीते हैं, नरेंद्र मोदी की जिंदगी से प्रेरित फिल्म है ।” हालांकि, आरटीआई से मांगे गए जवाब से यह साबित नहीं हो पा रहा है कि पीएम मोदी चाय बेचते थे।

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