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क्लीनिकल ट्रायल और रजिस्ट्रेशन दोनों प्रक्रिया में नियमों का पालन हुआ: रामदेव

योग गुरु बाबा रामदेव ने कोरोनिल विवाद पर आज प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सफाई दी

नई दिल्ली: योग गुरु बाबा रामदेव ने 2 दिन पहले कोरोनिल दवा लॉन्च की थी, सरकार ने पांच घंटे बाद विज्ञापन पर रोक लगा दी. बाबा रामदेव की दवा कोरोनिल टैबलेट पर राजस्थान सरकार के बाद महाराष्ट्र सरकार ने प्रतिबंध लगाया.

वहीँ कोरोनिल विवाद पर आज प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बाबा रामदेव ने सफाई देते हुए कहा कि कोरोनिल के काम पर आयुष मंत्रालय ने हमारे प्रयासों को सराहा है. साथ ही बाबा रामदेव ने बताया कि क्लीनिकल ट्रायल और रजिस्ट्रेशन दोनों प्रक्रिया में नियमों का पालन किया गया है.

23 जून को कोरोनिल लॉन्च की गई थी. दावा किया गया था कि इससे 7 दिन के अंदर 100 फीसदी रिकवरी हो जाएगी. कोरोना की दवा के रूप में लाई गई कोरोनिल पर तुरंत ही विवाद हो गया. इसी विवाद पर आज बाबा रामदेव ने बताया, ”आयुष मंत्रालय ने कहा है कि पतंजलि ने कोविड-19 के मैनेजमेंट के लिए पर्याप्त काम किया है यानी अच्छी पहल की है. पतंजलि ने एक सही दिशा में काम करना शुरू किया है.”

बाबा रामदेव ने बताया कि उन्होंने कोरोना पर क्लीनिकल कंट्रोल का ट्रायल किया है. क्लीनिकल ट्रायल के जो भी पैरामीटर्स हैं, उनके तहत हमने रिसर्च की है. अभी तक कोरोना के ऊपर क्लीनिकल ट्रायल हुआ है. इसके अलावा 10 से ज्यादा बीमारियों पर हम ट्रायल कर रहे हैं और उसमें तीन लेवल पार कर चुके हैं. इसमें हापरटेंशन, अस्थमा, हार्ट, चिकुनगुनिया जैसे रोग शामिल हैं, जिन पर हम ट्रायल कर रहे हैं.

विवाद पर अपना गुस्सा

बाबा रामदेव ने विवाद पर अपना गुस्सा भी जाहिर किया. उन्होंने कहा, ”लोग कह रहे हैं कि पतंजली ने पलटी मारी, कोई अनुसंधान नहीं किया और कुछ लोगों ने तो मेरी जाति, धर्म, संन्यास को लेकर और अलग-अलग प्रकार से गंदा वातावरण बनाने की कोशिश की गई. ऐसे लगता है कि हिंदुस्तान के अंदर आयुर्वेद का काम करना गुनाह हो. देशभर में एफआईआर दर्ज करा दी गईं, जैसे किसी देशद्रोही और आतंकवादी के खिलाफ एफआईआर दर्ज होती हैं.”

बाबा रामदेव ने कोरोनिल पर विरोध की आवाजों को जवाब देते हुए कहा कि यह एक साम्राज्यवादी सोच है कि कैसे एक भगवा धारण करने वाला रिसर्च कर सकता है. एक ट्रायल से ही मॉडर्न मेडिकल साइंस में तूफान आ गया है. बाबा ने कहा कि अभी हम इस अनुसंधान को और आगे ले जाएंगे.

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