छत्तीसगढ़

हरिओम राइस मिल से निकल रहे धान के डस्ट से छुरा के मासूम छात्र त्रस्त

रिपोर्ट: हितेश दीक्षित छुरा/गरियाबंद

छुरा: छुरा में बस स्टैंड व सरस्वती शिशु मंदिर प्राथमिक व माध्यमिक शाला से महज 200 की दूरी पर लगे हरिओम इडस्ट्रीज यूनिट राइसमिल से निकलने वाले डस्ट ने मासूम छात्रों का आना जाना और छुट्टी के पलों में खेलना दुभर कर दिया है। जिसका मासूम बच्चों के आंख व स्वस्थ पर बुरा असर पड़ रहा है। छुरा लोगो का जीवन दुश्वर कर रही है।

राईस मिल से निकलने वाले डस्ट सेे स्कूली छोटे छोटे छात्रो से लेकर जवान महिला पुरूषो के साथ ही अति वरिष्ठ नागरिको को श्वांस दमा की बीमारी होने की आंशका के साथ साथ सांस लेने की तकलीफ बढते जा रही है।

दुकानों में जमी रहती है परत

छुरा नगर स्थित बस स्टेंड जंहा दिनभर लोगो का हुजूम लगा रहता है साथ ही भोजनालय, पान पैलेश, हेयर सेलून व कई दुकानें है जो दिन रात हरिओम इडस्ट्रीज राइस मिल से निकलने बाले डस्ट से जिनकी दुकानों मे राइसमिल के डस्ट की परत जमी रहती है।

हरिओम इडस्ट्रीज राइसमिल जो कि सभी नियमो को ताक में रखकर राईस मिल को नगर में संचालित किया जा रहा है। जिसपर निकलने बाले डस्ट का कोई पुख्ता इंतजाम नही है। राइस मिल के पीछे खुल्ले पाइप से डस्ट बाहर निकलता है, जिससे स्कूल और बस स्टैंड में कोहरा छाया रहता है।

राईस मिल से वर्तमान में हो रही धान कुटाई से हो रही वायु प्रदुषण जिसमे धान का भुसा पूरे शिक्षक नगर में फैल रहा है, जिससे लोगो को सांस लेने में परेशानी हो रही है।

दिखावे के लिये नाममात्र का टायर लगाया

गौरतलब है कि हरिओम इडस्ट्रीज राईस मिल को चलाने वाले ठेकेदार ने दिखावे के लिये नाममात्र का टायर लगाया है जो कि इस मिल से निकलने वाले डस्ट को रोकने के लिये काफी उपयोगी साबित नही हो रहा है।

प्रदुषण के चलते कडकडाते ठंड ने वायु प्रदुषण में बढोत्तरी कर रही है जबकि वायु प्रदुषण से त्रस्त देश की राजधानी दिल्ली वासी इस समस्या से काफी परेशान हो रहे हैै।

समय रहते यदि इस मिल से निकलने वाली समस्या का हल नही निकाला गया तो कहा नही जा सकता शासन और प्रशासन को इसके लिये भविष्य में इस समस्या का निदान करना मुश्किल हो जायेगा।

ठेकेदार के द्वारा की जा रही अपनी मनमानी

वही दूसरी तरफ इस हरिओम इडस्ट्रीज राईस मिल को चलाने वाले ठेकेदार के द्वारा अपनी मनमानी की जा रही है। राईस मिल के प्रबंधक के द्वारा इस समस्या को नजर अंदाज कर मोहल्ले की सुध लेने में रूचि नही दिखा रहे है।

ठेकेदार सागर रतनानी ने बताया के शेड के लिये मैने पैसा दे दिया हुँ और शेड जल्दी बनाया जायेगा लेकिन कई दिन बित जाने के बाद भी आज पर्यंत तक शेड निर्माण का काम शुरू नही हुआ है।

इस संबंध में जिला चिकित्सालय गरियाबंद के मेडिकल आफिसर डाॅ अजय सिंह ने बताया कि धान के भूसां से दमा के अटैक होने की संभावना बढ जाती है। इसके जो छोटे कण है वो हमारे फेफडा के निचे एल्बुलाई तक पहुच जाते है,

ब्रोकाईटिस से फिवर और बहुत सारे एलर्जी के मरीज हो जाते है, जिसको त्वचा रोग के लक्षण, सांस लेने मे तकलीफ ऐसी परेशानियां होने लगती है। कण आंख में चले जाने से आंखो में नुकसान पहुंचता है। ठंड के मौसम में खासकर तकलीफ बढ़ जाती है।

Summary
Review Date
Reviewed Item
हरिओम राइस मिल से निकल रहे धान के डस्ट से छुरा के मासूम छात्र त्रस्त
Author Rating
51star1star1star1star1star
congress cg advertisement congress cg advertisement
Tags