यदि हालात अनुमति देते हैं तो सचिन पायलट मुख्यमंत्री बन सकते हैं: सतीश पूनिया

राजस्थान हाईकोर्ट अपना फैसला सुनाने वाला है और इसके बाद राजनीतिक घटनाक्रम में बड़े फेरबदल की उम्मीद

जयपुर। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया के एक बयान ने हलचल पैदा कर दी है। एक समाचार एजेंसी को दिए इंटरव्यू में पूनिया से जब पूछा गया कि क्या पायलट राजस्थान के सीएम बन सकते हैं? तो इसके जवाब में उन्होंने कहा कि ‘यदि हालात अनुमति देते हैं तो सचिन पायलट मुख्यमंत्री बन सकते हैं। वास्तव में, उन्होंने इस लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए एक बड़ा कदम उठाया है।

मामला फिलहाल कोर्ट में और इसलिए आगे किसी तरह की टिप्पणी करना जल्दबाजी होगी। सबसे पहले, यह सचिन पायलट को तय करना है कि उनका अगला कदम क्या होगा और उसके बाद फिर हम विचार करेंगे।’ पूनिया के इस बयान के बाद सियासी गलियारों में नई अटकलें लगाई जाने लगी हैं।कोर्ट के फैसल का असर और विधानसभा में विधायकों का गणित

हाईकोर्ट की ओर से आने वाले फैसले में यदि विधानसभा अध्यक्ष की कार्रवाई को सही ठहराया जाता है तो सचिन पायलट सहित 18 विधायकों की संख्या घट जाएगी। इससे सदन में मौजूदा सदस्यों की संख्या कम होने के साथ ही अशोक गहलोत को भी बहुमत साबित करने में आसानी हो जाएगी।

फिलहाल अशोक गहलोत का दावा है कि उनके पास 100 से अधिक विधायक है और यदि पायलट गुट बाहर होता है तो सदन में उन्हें महज 91 विधायकों का साथ चाहिए होगा। लेकिन यदि सचिन पायलट और बागी विधायकों के पक्ष में कोर्ट फैसला सुनाता है तो गहलोत की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

इसे यूं समझा जा सकता है कि विधानसभा में बीजेपी के पास 75 विधायकों का संख्या बल है। कांग्रेस के 19 बागी और बीटीपी विधायक भी उन्हें साथ देते हैं तो उनका आंकड़ा 99 तक पहुंच जाएगा। अब कोर्ट के फैसल पर तय होगा कि आगे आना वाला समय किसके अनुकूल होता है।.

पूनिया ने कहा कि कार्यपालिका, विधायिका और न्यायापालिका भारत के संविधान की खूबसूरती है और उनके अपने अपने कार्य और महत्व हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री के लिए कहा कि उन्होंने नैतिकता की दुहाई देते हुए जो पत्र प्रधानमंत्री जी को लिखा है, मैं उनको याद दिलाना चाहता हूं कि कांग्रेस की ओर से 1957 से 1990 के अंतिम तक कई राज्य सरकारों को बर्खास्त किया गया, इसलिए मुख्मयंत्री को याद रखना चाहिए कि कांग्रेस सरकारों द्वारा संविधान की जितनी धज्जियां उड़ाई हैं, फिर किस नैतिकता की बात करते हैं।

सरकार एक बाड़े में बंद है और प्रदेश की आम जनता विपदा से गुजर रही है, फसलों पर टिड्डियों के हमले से किसान परेशान हैं, सभी मुद्दों पर विफल हो चुकी एवं अपनी असफलताओं को छुपाने के लिये राज्य की सरकार ने आरोप लगाने के लिये बीजेपी को एक कंफर्ट एजेंसी मान लिया है।

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