दुख है वचन तोड़ने के बाद नहीं था मेरे पास कोई दूसरा पर्याय: उद्धव ठाकरे

मुंबई: शिवसेना नेता संजय राउत ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे का मुखपत्र सामना द्वारा इंटरव्यू लिया. इस दौरान सीएम उद्धव ठाकरे ने बीजेपी के साथ 25 साल की साझेदारी संभली है क्या, के सवाल पर कहा, ‘मुझे मालूम नहीं अगर उन्होंने वचन निभाया होता तो क्या हो जाता. मैंने कौन सा चांद तारे मांग लिए थे. मैं तो उनसे लोकसभा चुनाव के बाद जो कुछ भी शर्त मानी गई थीं, वही मांगा था.’

उद्धव ठाकरे ने कहा कि वचन देना और वचन निभाना यह दोनों अलग चीजें हैं और वचन देकर तोड़ देना एक बहुत बड़ी साजिश है, दुख है वचन तोड़ने के बाद मेरे पास कोई दूसरा पर्याय नहीं था.

राउत ने पूछा कि उन्होंने(बीजेपी) आपको धक्का देने का प्रयत्न किया और आपने उनको उल्टा धक्का दे दिया. इस पर ठाकरे ने कहा कि इस प्रकार की धक्का-मुक्की महाराष्ट्र की राजनीति में कभी नहीं हुई थी. लेकिन इसमें धक्का देना और मुक्का मिलना दोनों बातें आईं हैं.

राउत ने पूछा कि इसमें धक्का किसे मिला और मुक्का किसे मिला है? इस पर ठाकरे ने कहा कि महाराष्ट्र और पूरा देश देख रहा है. ठाकरे परिवार की परंपरा भंग करने के सवाल पर ठाकरे ने कहा कि शिवसेना प्रमुख ने कभी भी कोई पद नहीं संभाला और मेरी भी ऐसी कोई इच्छा नहीं थी लेकिन जब हमें लगा कि हम जिसके साथ हैं, उनके साथ सही ढंग से काम नहीं कर सकते तब मुझे यह बड़ी जिम्मेदारी लेनी पड़ी.

ठाकरे ने कहा कि मेरा तो कुछ नहीं बिगड़ा है और जिसका बिगड़ा है उन्होंने खुद से बिगाड़ा है. उसमें हमारी कोई जवाबदेही नहीं है. गृह मंत्री अमित शाह से संबंधों पर ठाकरे ने कहा, ‘जो भी करने का खुलकर करने का. चोरी छुपे कुछ नहीं.

25 साल से हमारा उनका गठबंधन

जब वह (अमित शाह) आए तो मुझे लगा कि ठीक है, 25 साल से हमारा उनका गठबंधन है. पीढ़ी बदली थोड़ा सा इधर उधर हुआ लेकिन फिर से अगर संबंध सुधर रहे हैं और हमारा उद्देश्य और ध्येय एक है तो अलग-अलग रास्ते पर बैठने से अच्छा भूल चूक माफ कर एक नई शुरुआत करनी चाहिए.’

ठाकरे ने कहा, ‘मेरी तरफ से तो कोई कमी नहीं थी. मैं उनके बुलाने पर अहमदाबाद गया था. नरेंद्र भाई से मिलने वाराणसी गया था. मेरे मन में पिछला कोई भी किंतु-परंतु नहीं था. लोकसभा के प्रचार में मैंने गठबंधन का प्रचार किया था.’
मत सिखाइए.’

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