राष्ट्रीय

मात्र तीन मिनट में भारतीय दर्शन को प्रस्तुत करने वाले संन्यासी विवेकानंद

भोपाल।

स्वामी विवेकानंद ने शिकागो विश्व धर्म सम्मेलन में मात्र तीन मिनट में भारतीय दर्शन को प्रस्तुत कर दिया था। उस भाषण के बाद विवेकानंद आकर्षण का केंद्र बन गए। लोग उनको सुनने के लिए आने लगे। वह ऐसे संन्यासी थे, जिन्होंने श्रीहीन और कांतिहीन हो चुके भारत को दिशा देने के लिए अनेक प्रयास किए।

यह विचार वरिष्ठ पत्रकार रामभुवन सिंह कुशवाह ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में स्वामी विवेकानंद जयंती एवं राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर आयोजित संगोष्ठी में व्यक्त किए। इस अवसर पर वरिष्ठ टीवी पत्रकार प्रवीण दुबे ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे श्री कुशवाह ने कहा कि रामकृष्ण परमहंस ने स्वामी विवेकानंद में भारत के उत्थान के भाव को जाग्रत किया। उन्होंने उस समय की भारत की स्थिति से विवेकानंद को परिचित कराया। उसके बाद ही स्वामी विवेकानंद के मन में भारत के जागरण का संकल्प आया। बेचैन स्वामी विवेकानंद कन्याकुमारी जा पहुँचे और वहाँ समुद्र के बीच चट्टान पर तीन दिन तक लगातार भारत के संबंध में चिंतन किया। उन्होंने बताया कि स्वामी विवेकानंद नर सेवा को ही नारायण सेवा मानते थे।

चूँकि उन्होंने विज्ञान के साथ-साथ वेदों का भी अध्ययन किया था, इसलिए वह मानते थे कि प्रत्येक व्यक्ति देव है, एक ही ब्रह्म सबमें है। श्री कुशवाह ने कहा कि हम सबमें एक ही आत्मा है, जिसने थोड़ा अच्छा का किया वह महात्मा हो गए और जिसने थोड़ा और अधिक अच्छा काम किया वह परमात्मा हो गए।

प्रमुख वक्ता एवं वरिष्ठ टीवी पत्रकार श्री प्रवीण दुबे ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी में स्वाध्याय की प्रवृत्ति को बढ़ाने की आवश्यकता है। गूगल के कारण उनके हाथों से किताबें छूट गई हैं।

अध्ययन का कोई विकल्प नहीं है। पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए उन्होंने संदेश दिया कि नवागत पत्रकार को एक क्षेत्र की विशेषज्ञता अर्जित करनी चाहिए। यदि खेल पत्रकार बनना है तो विभिन्न खेलों के नियम-कायदे पता होना चाहिए। अपराध रिपोर्टिंग की इच्छा रखने वाले विद्यार्थी को उस तरह के समाचारों और शब्दावली पर अपनी पकड़ बनानी चाहिए।

दुबे ने कहा कि युवा पीढ़ी को अपना लक्ष्य तय करना चाहिए और उसके लिए ही काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद के प्रसिद्ध कथन ‘उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्ति तक रुको मत’ का गूढ़ अर्थ हमारी युवा पीढ़ी को समझना चाहिए।

कार्यक्रम का संचालन जनसंचार विभाग के अध्यक्ष प्रो. संजय द्विवेदी ने किया। कार्यक्रम का संयोजन एवं धन्यवाद ज्ञापन मीडिया प्रबंधन विभाग के अध्यक्ष डॉ. अविनाश बाजपेयी ने किया। इस अवसर पर प्राध्यापक, अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

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