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सड़को में काल बनकर दौड़ रही संजीवनी 108..!

दीपक वर्मा राजिम

राजिम: एक ओर जहां जीवन बचाने के लिये 108 संजीवनी वाहन का उयोग हो रहा हैं अगर वही जीवन ले ले तो इसे क्या कहेंगे….

आपको बता दे कि संजीवनी आय दिन द्रुतगति से सड़कों में दौड़ते नजर आते हैं पर जान बचाने वाली संजीवनी 108, अब सड़को में काल बनकर दौड़ रही ।

सड़कों पर गरियाबंद जिले के  पाण्डुका में घटना को अंजाम देकर फरार हो गई संजीवनी 108, और तड़पता सड़क पर पड़ा रहा घायल युवके सड़कों पर आए दिन हो रही घटना, दुर्घटना को देखते हुए सरकार ने घायलों की जान बचाने के लिए संजीवनी 108 शुरू किया है। शासन के इस योजना का लाभ भी मिलता है परंतु इनमें सवार कुछेक ड्राईवरों के नादानी और स्पीड पर कंट्रोल न रखने की वजह से जान बचाने वाली 108 लोगों के लिए काल भी बन जाती है।

अभी ताजा मामला तीन दिन पहले शुक्रवार दोपहर का है। गरियाबंद से राजिम की ओर खूनी रफ्तार में दौड़ रही संजीवनी 108 ने पाण्डुका चारोधाम मार्ग के पास मोटर सायकल सवार दो युवकों को अपनी चपेट में ले लिया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक इस घटना को अंजाम देने के बाद गाड़ी को रोकने के बजाय वह काफी स्पीड से बढ़ाकर ले गया।

चक्के के नीचे ये युवक 30-40 फीट तक घसीटते रहे। इसे चमत्कार ही कहा जाए कि इतने बड़े हादसे के बाद भी दोनों युवक सकुशल बच गए। हालांकि 20 साल के नवयुवक गुलशन शर्मा के छाती और शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोट आई जिनका प्राथमिक उपचार पाण्डुका के सरकारी अस्पताल में करने के बाद उसे रायपुर मेकाहारा के लिए रिफर कर दिया गया। इस दौरान रिफर किए गए दर्द से कराहते घायल युवक को ले जाने के लिए कोई सरकारी गाड़ी पाण्डुका के चिकित्सकों ने उपलब्ध नही कराया।

प्राईवेट गाड़ी करके पाण्डुका से 70 किमी दूर मेकाहारा रायपुर ले जाना पड़ा। बताया गया है कि घायल युवक का ईलाज मेकाहारा में चल रहा है। घायल के परिजनों ने इस दुर्घटना की रिपोर्ट पाण्डुका थाने में की है। जिस पर अपराध कायम किया गया है।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक जिस वक्त 108 के ड्राईवर ने इस घटना को अंजाम दिया उस वक्त वह मोबाईल से बात करने में किसी के साथ व्यस्त था। उनका ध्यान सड़क पर नही था। ड्राईवर के नशे में होने की बात कही जा रही है। उल्लेखनीय है कि गरियाबंद और राजिम के बीच किसी भी प्रकार से घटना, दुर्घटना होने पर घायलों को सरकारी अस्पताल ले जाया जाता है परंतु सरकारी अस्पताल में मात्र काम चलाऊ प्राथमिक उपचार करने के बाद सीधा रायपुर के लिए रिफर कर दिया जाता है। एक तरह से इन अस्पतालों को रिफर सेंटर ही कहे तो कोई अतिशयोक्ति वाली बात नही है।

संजीवनी 108 का रफ्तार में रहना लाजिमी है परंतु सड़कों के किनारे हर गांव में स्कूल है। किसी भी दिन स्कूल के बच्चे भी इसकी चपेट में आ सकते हैं। खेती किसानी का भी दिन चल रहा है। मजदूर, किसान, बैलगाड़ी सड़कों पर है। घायलों के जान को बचाने के लिए रफ्तार में 108 का चलना जरूरी भी है परंतु रफ्तार को कंट्रोल करना भी उतना ही जरूरी है। कहीं ऐसा न हो कि जान बचाने के लिए रफ्तार में चलते हुए जान लेने की नौबत न आ जाए। लोगों ने मांग किया है कि 108 में चलने वाले ड्राईवरों के ऊपर नियंत्रण के साथ, साथ समय-समय पर इन्हें चेक भी किया जाए कि वास्तविक में ये सही हालत में है कि नही? शुक्रवार को पाण्डुका में हुई घटना ने ड्राईवर के अमानवीय हरकत को रेखांकित किया है। इस ड्राईवर के खिलाफ गांव में जमकर आक्रोश का वातावरण है।

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