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Bigg Boss के घर में शिवानी दुर्गा की एंट्री पर भड़के संत

पहले स्वामी ओम बाबा और अब शिवानी दुर्गा की बिग बॉस में एंट्री से संत समाज में आक्रोश है। संतों ने बिग बॉस के घर में कथित संतों को संत मानने से ही इनकार कर दिया है। संतों की मानें तो जो बिग बॉस में जाए वो संत ही नहीं है। संत समाज ने ऐसे फर्जी संतों का बहिष्कार करने की मांग की है।

पिछले साल बिग बोस में स्वामी ओम का जैसा चेहरा लोगों ने देखा उससे संत समाज की छवि खराब हुई थी। बिग बॉस के सहारे सुर्खियां बटोरने के चक्कर में ओम को पहले ही अखाड़ा परिषद फर्जी करार दे चुका है। इस बार कथित महिला संत शिवानी दुर्गा की बिग बॉस में एंट्री के विरोध में संतों ने फिर से मोर्चा खोल दिया है।

शिवानी दुर्गा वही हैं, जिन्होंने 2015 के कुंभ में अपना अखाड़ा बनाकर बवाल मचा दिया था। ऐसे में संत समाज के निशाने पर फिर बिग बॉस और उसमें भाग लेने वाली कथित संत शिवानी दुर्गा आ गई हैं। हरिद्वार में पत्रकारों से बातचीत में अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी ने कहा है कि जो संत बिग बॉस में जाए वो संत ही नहीं है, ये संतों का अपमान है। कहा कि ये सनातन धर्म को बदनाम करने के कुचक्र चलाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि बिग बॉस के आयोजन संतों की आस्था पर ठेस न पहुंचाएं। विदेशी ताकतें हमारी संस्कृति को नष्ट करने पर आमादा हैं।

संतों और धर्माचार्यों के बारे में अनर्गल प्रचार किया जा रहा है। जबकि दूसरे धर्मों के बारे में कोई कुछ बोलने का तैयार नहीं। ऐसा लगाता है कि विदेशी ताकतें भारतीय संस्कृति को पूरी तरह नष्ट करना चाहती हैं। लेकिन उनके ये मंसूबे कभी कामयाब नहीं होने दिए जाएंगे।

ऐसे लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए

भारत साधु समाज के प्रवक्ता संजय महंत ने सिनेमा की दुनिया में जाने वाले संतों की निंदा करते हुए कहा है कि हिन्दू धर्म में एक संवैधानिक कानून बनाकर ऐसे लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने इस संबंध में बिग बॉस के खिलाफ सेंसर बोर्ड और सरकार से वार्ता कर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। वहीं अखाड़ा परिषद के महामंत्री हरिगिरि का कहना है कि अभी कुछ और फर्जी संतों को बाहर किया जाना है। जो पहले बिग बॉस में गए वो अपनी बेइज्जती करवाकर बाहर निकले, कहीं ऐसा न हो की इनका भी कुछ ऐसा ही हाल हो। बता दें कि अखाड़ा परिषद फर्जी संतों की दूसरी लिस्ट जल्द जारी करने वाला है। पहली लिस्ट में 14 संतों को फर्जी बताते हुए उनके नाम सार्वजनिक किए गए थे। इसमें आसराम बापू, स्वामी ओम, गुरमीत राम रहीम, राधे मां समेत कई के नाम शामिल हैं।

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