छत्तीसगढ़

डॉ. सौरभ निर्वाणी ने केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय को लिखा पत्र

-"पिछड़ा वर्ग" शब्द को सरकारी दस्तावेजों से विलोपित कर उसके बदले "विशेष वर्ग" करने की मांग की

रायपुर।

आम आदमी पार्टी छत्तीसगढ़ के युवा विंग के कार्यकर्ताओ ने केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय को पत्र लिखकर “पिछड़ा वर्ग” शब्द को सरकारी दस्तावेजों से विलोपित कर उसके बदले “विशेष वर्ग” करने की मांग रखी है.

आम आदमी पार्टी के युवा इकाई के प्रदेश अध्यक्ष एवं मानव अधिकार कार्यकर्ता डॉ. सौरभ निर्वाणी ने आप कार्यकर्ताओ के हस्ताक्षर युक्त पत्र केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री थावर चंद गहलोत को लिखा जिसमे उन्होंने समाज में “पिछड़े वर्ग” के रूप में चिन्हित जातियों के लिए ‘पिछड़ा वर्ग” शब्द के बजाय “विशेष वर्ग” शब्द का उपयोग सभी शासकीय दस्तावेजों में करने की मांग की है.

मानव अधिकार कार्यकर्ता डॉ सौरभ निर्वाणी ने तर्क दिया है कि अगड़े और पिछड़े शब्दावलियों जैसे शब्द के उपयोग से समाज मे वर्ग संघर्ष की उत्पत्ति होती है, किसी भी बालक को जब वह स्कूल में शब्दों की समझ रखने लगता है तब पिछड़ा वर्ग जैसे शब्द अगर वह उस श्रेणी में आता है तो उसे कुंठा और पिछड़े होने का अहसास कराते हैं.

साथ ही साथ अन्य वर्गों के प्रति जो पिछड़े नही है स्वाभाविक प्रतिस्पर्धा उसके अंतस में हमेसा के लिए घर कर जाती है, एक वर्ग विभेद की नींव रख जाती है ,यह एक मनोवैज्ञानिक विश्लेषण है, किसी भी व्यक्ति को पिछड़ा, बीमार या कमजोर कहलाना उसके आत्मसम्मान को चोटिल करती है.

उसे यह पसंद नही होता,सरकार की मंशा इस वर्ग के लोगो का सामाजिक उत्थान कर आगे बढ़ाना है तो क्या यह जरूरी है कि उसके समाज के पिछड़ेपन का सामूहिक अहसास हर दस्तावेजों में कराया जाय, अगर उनकी अलग पहचान ही करनी है तो जिस तरह से विकलांगो को प्रधानमंत्री जी द्वारा दिव्यांग नाम दिया गया वैसे ही “पिछड़ा वर्ग” के बजाय “विशेष वर्ग” का उपयोग किया जाए ताकि उस वर्ग के लोग कम से कम शब्द की चोट से आहत न महसूस करें, समाज में हम अपनी बोलचाल में शिष्टाचार से दृष्टिहीनों के लिए अंधा के बजाय सूरदास उपयोग करते है.

पिछड़ा वर्ग में , पिछड़ा शब्द ही, हारे हुए कम योग्यता रखने, कमजोर होने के भाव को अपने आप मे समेटे हुए है ऐसे में किसी भी कल्याणी कारी राज्य को अपने जनता के लिए इस शब्द के प्रयोग से बचना चाहिए जबकि विकल्प के रूप में अच्छे शब्द हमारे पास मौजूद हैं. आज हम इक्कीसवी सदी में हैं जहाँ प्रत्येक व्यक्ति गरिमा है, इस छोटे से प्रयास से हम सभी उस गरिमा को सम्मान दे सकते हैं, वर्गो में बटे हुए भारतीय समाज को एक धरातल में ला सकते है.

हम सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय से यह अपेक्षा रखते हैं कि पत्र की भावनाओ से अवगत होकर इस संवेदन शील विषय पर हमारे द्वारा दिए गए सुझावों पर गौर कर शीघ्र कदम उठाएगी। इस पत्र की प्रति युवा आप के कार्यकर्ताओं ने देश के सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ साथ प्रधानमंत्री कार्यालय को भी प्रेषित किया है.

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डॉ. सौरभ निर्वाणी ने केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय को लिखा पत्र
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