सावन 2018: कैसे करें पहले सावन में भोले की पूजा,जाने विधि

सोमवार के प्रतिनिधि ग्रह चंद्र और देवता शिव

नई दिल्ली। भगवान के शिव के सबसे प्रिय माह सावन का पहला सोमवार आज (30 जुलाई) को है। वैसे तो भगवान शिव को प्रसन्न् करने के लिए पूरे श्रावण माह में विशेष पूजा की जाती है, लेकिन सोमवार का विशेष महत्व है।

क्योंकि सोमवार के प्रतिनिधि ग्रह चंद्र और देवता शिव हैं। भगवान शिव ने अपने मस्तक पर अर्धचंद्र धारण किया हुआ है, इसलिए सोमवार की पूजा से न केवल शिव की कृपा प्राप्त होती है बल्कि जन्मकुंडली में बुरे प्रभाव दे रहे चंद्र की भी शांति होती है।

सोमवार की पूजा सोमवार की पूजा के लिए प्रात: सूर्योदय के समय (सूर्योदय प्रात: 5.58 बजे, उज्जैन) उठकर जल में गंगाजल डालकर स्नान करें। साफ-स्वच्छ श्वेत वस्त्र धारण करें।

पुरुष श्वेत सूती धोती और स्त्री श्वेत या पीले रंग की साड़ी पहनें। इसके बाद अपने पूजा स्थान में बैठकर भगवान शिव को गंगाजल मिश्रित शुद्ध जल से स्नान करवाएं।

इसके बाद पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शकर) से स्नान करवाकर पुन: स्वच्छ जल से स्नान करवाएं। इसके बाद भगवान शिव को चांदी के पात्र या श्वेत रेशमी कपड़े पर विराजित करें। उन्हें चंदन, अष्टगंध का त्रिपुंड लगाएं। जनेऊ पहनाएं।

बिल्वपत्र, धतूरा और आंकड़े के पुष्प अर्पित करें। नैवेद्य में फल और दूध से बनी मिठाई का भोग लगाएं। श्रद्धानुसार दक्षिणा अर्पित करें। धूप-दीप करें। इसके बाद शिव पंचाक्षरी मंत्र ऊं नम: शिवाय या महामृत्युंजय मंत्र की एक माला जाप करें।

सोमवार व्रत कथा का पाठ करें और कर्पूर से आरती करें। सोमवार का व्रत करने वाले पुरुष और स्त्री दिन भर निराहार रहें। फल, दूध का सेवन कर सकते हैं। शाम के समय एक बार फिर भगवान की आरती करें और भोजन ग्रहण करें।

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