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दो टूक (श्याम वेताल) : संविधान बचाओ या मोदी भगाओ…?

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श्याम वेताल
एससी – एसटी एक्ट में बदलाव के विरोध में दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में कांग्रेस की संविधान बचाओ रैली में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने जो भाषण दिया वह संविधान बचाओ के बजाय मोदी भगाओ विषय में बदल गया था. भाषण की शुरुआत ही नरेंद्र मोदी की किताब ‘कर्मयोग’ के उद्धरण से हुई और अंत तक पूरा भाषण नरेंद्र मोदी पर ही केंद्रित रहा.

राहुल ने दलितों, आदिवासियों, महिलाओं, युवाओं को लेकर भाजपा की नीतियों की खूब धज्जियां उड़ाई और हर नीति के लिए सिर्फ और सिर्फ नरेंद्र मोदी को जिम्मेदार बताया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दावा करते हैं कि केंद्र की सत्ता में भाजपा के आने के बाद विदेशों में भारत की छवि निखरी है जबकि राहुल ने एक घटना को लेकर यह साबित करने की कोशिश की कि नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में विदेशों में भारत की छवि को धक्का लगा है. राहुल ने उस घटना को पुरजोर तरीके से उठाया जिसमें नरेंद्र मोदी को लंदन दौरे के दौरान आईएमएफ चीफ ने कहा कि आप देश की महिलाओं का सम्मान नहीं कर रहे हो. इस घटना को लेकर राहुल ने कहा कि 70 साल के इतिहास में देश के किसी भी प्रधानमंत्री से किसी विदेशी ने ऐसी टिप्पणी नहीं की. नरेंद्र मोदी ने भारत की इज्जत मिट्टी में मिला दी.

राहुल कहते हैं कि भाजपा ने नारा दिया कि बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ लेकिन नरेंद्र मोदी बेटी बचा नहीं पा रहे हैं. आये दिन महिलाओं की आबरू तार-तार हो रही हैं. मासूम और नाबालिग बच्चियों से रेप हो रहे हैं ऐसी स्थिति में बेटी बचाओ नारे का क्या मतलब है? उन्होंने यह भी कहा कि वास्तव में बेटी बचाओ भाजपा से, भाजपा के एमएलए से. राहुल का इशारा उन्नाव के भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की ओर रहा.

राहुल कहते हैं कि मोदी जी के राज में दलितों की हत्या, दलितों पर अत्याचार, महिलाओं एवं मासूम बच्चियों से रेप, युवाओं को झूठे आश्वासन का बोल – बाला रहा.

राहुल ने अपनी दक्षिण अफ्रीका यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि वहां मेरी कई लोगों से बात हुई और सभी ने भारत के लोकतंत्र, संविधान, सुप्रीम कोर्ट, लोकसभा, राज्यसभा, विधानसभा की सराहना की और कहा कि हम लोग भारत की ओर देखते हैं लेकिन जब से मोदी का राज आया है हमारी हर संस्था में गड़बड़ी आयी है. राहुल कहते हैं कि मोदी जी सांसदों, विधायकों को बोलने नहीं दे रहे हैं. मोदी सांसदों से कहते हैं कि प्रेस को मसाला ना दे, प्रेस को भी दबाया जा रहा है.

राहुल ने भाषण की शुरुआत मोदी की पुस्तक ‘कर्मयोग’ से की थी और कहा कि पुस्तक में मोदी जी ने मैला ढोने की प्रथा को सही ठहराया है और वाल्मीकि समाज के लिए इसे आध्यात्मिक अनुभव करार दिया है. यह पीएम की दलित विरोधी मानसिकता को दर्शाता है. राहुल बोले – मोदी जी किसी को बोलने नहीं देना चाहते और खुद ही बोलना चाहते हैं. मन की बात करते हैं. अगले चुनाव में जनता मोदी को अपने मन की बात बताएगी. इस समय देश की जनता के सामने ढेरों सवाल हैं जिनका जवाब मोदी के पास नहीं है लेकिन कांग्रेस उन सवालों का जवाब दे सकती है. अब देश को नया रास्ता बनाना पड़ेगा.

कुल मिलाकर, पूरे भाषण में राहुल गांधी ने नरेंद्र मोदी को जमकर कोसा. वह मोदी के खिलाफ इतना बोले कि सभा स्थल ने शेम शेम और नरेंद्र मोदी मुर्दाबाद के नारे लगने शुरु हो गए. इस पर, राहुल ने सदाशयता दिखाते हुए माइक से ही कहा कि हम किसी के मुर्दाबाद के नारे नहीं लगाते.

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