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यूनिटेक एमडी की बेल खारिज, SC बोला- 16 हजार निवेशकों को सौंपें फ्लैट

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को रियल एस्टेट कंपनी यूनिटेक के प्रमोटर संजय चंद्रा की अंतरिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। इसके साथ ही कोर्ट ने कहा है कि 16,300 खरीदारों के आंसू बिल्डर की आजादी की तुलना में ज्यादा महत्वपूर्ण हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने संजय चंद्रा को चेतावनी दी कि अगर खरीदारों को फ्लैट या रिफंड नहीं मिलता है तो कोर्ट रिसीवर और नीलामी परियोजनाओं के लिए नियुक्ति खुद करेगा। साथ ही पीठ ने कहा कि इस बारे में जानकारी दें कि कौन खरीदार यूनिटेक समूह की परियोजनाओं में फ्लैट लेना चाहते हैं और कौन लोग अपने पैसे वापस पाना चाहते हैं। और साथ ही यह भी कहा कि हमें बात से कोई मतलब नहीं है कि यूनिटेक रकम का जुगाड़ कहां से करेगा।

कोर्ट में सुनवाई के दौरान चंद्रा के वकील ने जज से अनुरोध किया कि उनके मुवक्किल को जमानत की इजाजत दें ताकि वह अपने कार्यालय में काम करके पैसे की व्यवस्था कर सकें।

हालांकि कोर्ट ने यह कहते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया कि जब तक घर खरीदारों को अपना पैसा वापस नहीं मिलता तब तक यूनिटेक के प्रबंध निदेशक संजय चंद्रा को मुक्त नहीं किया जा सकता है।

उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले भी 15 सितंबर को चंद्रा बधंओं की जमानत याचिका खारिज की थी। बताते चलें कि चंद्रा बधुं कथित तौर पर नोएडा और गुड़गाम की आवासीय परियोजनाओं के निवेशकों से धोखाधड़ी करने के आरोपी हैं। चंद्रा और उनके भाई अजय को इसी साल अप्रैल में गिरफ्तार किया गया था।

यूनिटेक की ओर से पेश वकील ने पीठ से कहा कि जो निवेशक फ्लैट या प्लॉट लेना चाहते हैं उन्हें फ्लैट मिलेगा और जो रकम वापस चाहते हैं उन्हें रकम वापस मिलेगा। उन्होंने कहा कि पूर्व आदेशानुसार यूनिटेक ने और पांच करोड़ रुपये जमा करा दिए हैं। अब तक उनकी ओर से 20 करोड़ रुपये सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री में जमा कराए जा चुके हैं।

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