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पद्मावती पर SC की केन्द्र को फटकार, कहा- फिल्म पर बयानबाजी से बचें

पद्मावती पर SC की केन्द्र को फटकार, कहा- फिल्म पर बयानबाजी से बचें

पद्मावती पर जारी विवाद के बीच मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र सरकार को खरी खोटी सुनाई. सुप्रीम कोर्ट ने नसीहत देते हुए कहा कि सेंसर बोर्ड की क्लीयरेंस से पहले फिल्म के खि‍लाफ बयानबाजी से बचें, इससे खराब माहौल बन रहा है.

कोर्ट ने साफ कहा कि उच्च पदों पर बैठे लोग इस तरह के बयान ना दें. सुप्रीम कोर्ट ने ये टिप्पणी एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान की. सुप्रीम कोर्ट ने सवाल किया कि जो फिल्म सेंसर बोर्ड की ओर से क्लीयर नहीं हुई है, जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग उसपर कैसे टिप्पणी कर सकते हैं?

दरअसल, पद्मावती पर जारी विवाद के दौरान केंद्रीय मंत्रियों, सांसदों, कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने विवादित बयान दिए. माना जा रहा था कि ऐसे बयान आग में घी डालने का काम कर रहे हैं.

पंजाब के कांग्रेस सीएम राजपूतों के साथ
तीन राज्यों में बीजेपी की सरकारों द्वारा फिल्म के खुलेआम विरोध के अलावा पंजाब की कांग्रेस सरकार भी इसके खिलाफ खड़ी नजर आ रही है. पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने फिल्म को लेकर राजपूतों की आपत्तियों का समर्थन किया है.

क्या पद्मावती राष्ट्रमाता ?
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक समारोह में ऐलान किया कि संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावती मध्यप्रदेश की धरती पर रिलीज नहीं होगी. पद्मावती को राष्ट्रमाता करार देते हुए उन्होंने कहा, ‘महारानी पद्मावती से जुड़े ऐतिहासि‍क तथ्यों से छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी. मैं स्पष्ट कहना चाहता हूं कि मध्यप्रदेश की धरती पर पद्मावती फिल्म रिलीज नहीं होगी.’ यही नहीं शिवराज ने भोपाल में देश की वीरों की याद में बनने वाले वीर भारत स्मारक स्थल में महारानी पद्मावती का स्मारक बनाने की भी घोषणा की.

SC ने खारिज की याचिका
सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका को खारिज कर दिया गया. इसमें ‘पद्मावती’ फिल्म से कथित आपत्तिजनक सीन हटाने की मांग की गई थी. सोमवार को चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस ए एम खानविलकर और जस्टिस धनंजय वाई चंद्रचूड की तीन सदस्यीय खंडपीठ को सूचित किया गया कि इस फिल्म को अभी तक केन्द्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड से प्रमाण पत्र नहीं मिला है. इस पर पीठ ने कहा, ‘इस याचिका में हमारे हस्तक्षेप का मतलब पहले ही राय बनाना होगा जो हम करने के पक्ष में नहीं है.’

वहीं दूसरी तरफ अब ये मामला संसद की पिटीशन कमेटी के पास भी पहुंच गया है. ऐसे में उत्तर भारत की राज्य सरकारों द्वारा फिल्म का विरोध और राजपूत समुदाय का सड़कों पर गुस्सा पद्मावती की रिलीज के लिए बड़ा खतरा पैदा हो सकता है.

68 दिन से पहले नहीं होगी रिलीज
प्रसून ने कहा है कि फिल्म की वर्तमान स्थिती को देखते हुए फिल्म को सर्टिफिकेट देने में 68 दिन लग सकते हैं. उनका यह बयान उन मीडिया रिपोर्ट्स को कंफर्म करता दिख रहा है, जिसमें कहा गया था कि सेंसर बोर्ड ने फिल्म के मेकर्स द्वारा सर्टिफिकेट देने की प्रक्रिया को जल्दी करने की अर्जी ठुकरा दी है.

प्रसून ने सोमवार को IFFI में मीडिया से बात करते हुए यह कहा. उन्होंने फिल्म को सेंसर बोर्ड में सबमिट करने से पहले कुछ मीडियापर्सन्स को फिल्म दिखाने पर अपनी निराशा भी जाहिर की. उन्होंने कहा कि अगर लोग चाहते हैं कि सेंसर बोर्ड फिल्म पर कोई फैसला ले तो उन्हें बोर्ड को समय, स्वतंत्रता और मानसिक स्पेस देना होगा.

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