शादी कार्ड में लिखाया नेग के पैसे से संवारेंगे स्कूल

अंकित मिंज

बिलासपुर।

शादी के मौके पर नेग में मिलने वाली राशि के लिए वर पक्ष में खासी ललक होती है। हिसाब में गड़बड़ न हो, इसके लिए एक व्यक्ति को कागज-पेन लेकर बिठाया जाता है, लेकिन शहर के दुर्गेश साहू ने अनूठी पहल की है। उन्होंने अपनी शादी के कार्ड में साफ साफ लिखवा दिया है कि उन्हें नेग में दी जाने वाली राशि कोरबा जिले के कुरुडीह स्कूल के विकास के काम आएगी।

परिवार भी साथ, कहा.नेग में मिली राशि कितने दिन चलेगी, बच्चों का भविष्य ही संवेर दुर्गेश की 24 जनवरी को शादी है। चरामेति फाउंडेशन नामक संस्था की ओर से एक ड्राप बाक्स कार्यक्रम स्थल में रखवाने कहा है। दुर्गेश इस संस्था के सदस्य हैं। खास बात यह है कि उनके इस फैसले पर उनका परिवार भी साथ है। सरकारी मिडिल स्कूल कुरुडीह स्कूल को सामाजिक संस्था चरामेती फाउंडेशन ने गोद लिया है।

समारोह में शामिल होने वाले लोग नेग के रूप में अपना लिफाफा उसमें डालेंगे। शहर के इमलीपारा में निवासरत दुर्गेश साहू का कहना है कि लिफाफे में मिलने वाली नेग की राशि कितने दिन चलेगी। इससे अच्छा है कि वह एक सरकारी स्कूल के काम आ जाए, जहां कई बच्चों के भविष्य संवरते हैं।

उसने अपने इस निर्णय से परिवार को भी अवगत कराया। माता पिता ने कहा कि तुम्हें जो उचित लगे वह करो। यह अच्छा काम है और हम तुम्हारे साथ हैं। युवक दुर्गेश साहू सामाजिक संस्था चरामेती फाउंडेशन से है। कुछ समय पहले संस्था के अन्य पदाधिकारियों के साथ वह भी कुरुडीह स्कूल गया था जहां उसने स्कूल की कमियां देखी थी।

स्कूल को संस्था की ओर से गोद लेने के बाद उसने अपना यह निर्णय संस्था के अध्यक्ष प्रशांत महतो को बताया। इसके बाद परिवार वालों की सहमति मिलने के बाद शादी के लिए छपाए गए कार्ड में भी उसने इसका उल्लेख कर दिया। शादी के कार्ड में उल्लेख करने के बाद दुर्गेश को उसकी सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलना शुरू हो गई है।

मरीजों के परिजनों के लिए घर की छत पर बनता है खाना

सामाजिक संस्था से जुड़े होने के कारण दुर्गेश और उसका परिवार भी कहीं न कहीं इसमें शामिल है। संस्था की ओर से जिला अस्पताल में मरीजों के परिजनों के लिए भोजन बनवाया जाता है। इसमें संस्था से जुड़े परिवार की महिलाएं सहयोग करती हैं और भोजन करने वालों के साथ शामिल रहती हैं।

स्कूल के विकास में ये होंगे काम

काेरबा जिले के जिस कुरुडीह स्कूल के विकास की बात कही जा रही है वहां स्कूली बच्चे फर्श पर बैठते हैं। उनके लिए फर्नीचर की व्यवस्था की जाएगी। दीवारों पर वॉल पेंटिंग कर हिंदी और अंग्रेजी के लेटर लिखे जाएंगे। स्कूल के लिए कंप्यूटर खरीदे जाएंगे जिससे बच्चों को डिजिटल शिक्षा दी जा सके।

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